- वंदे मातरम् के 150 वर्ष पूरे होने पर देशभर में इस गीत पर विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है
- बंकिम चन्द्र चटर्जी के राष्ट्रगीत का मैथिली अनुवाद प्रो. अरविन्द कुमार मिश्र नीरज ने किया है
- डॉ. सुष्मिता झा ने इस मैथिली संस्करण को राग बागेश्वरी में गाकर यूट्यूब पर वीडियो फॉर्मेट में पेश किया है
राष्ट्रगीत वंदे मातरम् के 150 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में देशभर इस गीत पर केन्द्रित कार्यक्रमों की धूम मची है तो वहीं दूसरी ओर कलाकारों के बीच भी इसको लेकर नई ऊर्जा का संचार हो रहा है. इसी क्रम में इस राष्ट्रगीत का मैथिली संस्करण पहली बार जनसामान्य के बीच आया है. बंकिम चन्द्र चटर्जी द्वारा मूलतः बांग्ला में लिखे इस गीत का मैथिली अनुवाद सहरसा के प्रो. अरविन्द कुमार मिश्र नीरज ने किया है और दिल्ली की डॉ. सुष्मिता झा ने इसे गाया है.
गीत की धुन डॉ सुष्मिता झा ने तैयार कर इसे राग बागेश्वरी में प्रस्तुत किया है. उनके यूट्यूब चैनल पर यह गीत अब वीडियो फॉर्मेट में उपलब्ध है. डॉ. सुष्मिता ने ही गत माह यह गीत दिल्ली के मावलंकर सभागार में भी प्रस्तुत किया था जिसे लगभग 500 लोगों ने खड़े होकर गाया था. इस संस्करण को लोगों से मिल रही सकारात्मक प्रतिक्रिया से यह स्पष्ट होता है कि यह आम लोगों के दिलों में बस गया है.
प्रो. अरविन्द मिश्र नीरज ने इस बारे में बताया कि यह अनुवाद उन्होंने लगभग 20 वर्ष पूर्व किया था और अब वन्दे मातरम् 150 के अवसर पर इसे जनसामान्य के बीच पहुंचने का अवसर मिल पा रहा है. श्री नीरज श्रीमद्भागवत गीता का भी मैथिली अनुवाद कर चुके हैं जो प्रकाशनाधीन है. गणमान्य लोगों ने इस उपलब्धि के लिए श्री नीरज को बधाइयां दी हैं.
वंदे मातरम् 150 अभियान का उद्देश्य देशवासियों में देशभक्ति की भावना को प्रोत्साहित करना और स्वतंत्रता प्राप्ति के लिए किए गए संघर्ष का स्मरण कर इसकी महत्ता को लोगों तक पहुंचाना है. इस मैथिली संस्करण के आने से वंदे मातरम् 150 अभियान को और भी बल मिलेगा.
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