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बिहार के इस गांव ने कर लिया 'मुफ्त गैस' का जुगाड़, इन्हें नहीं है सिलेंडर की लाइन में लगने की जरूरत

Bihar Village gobas gas during LPG Crisis: इस पहल से शहरों की तरह यहां भी गैस पाइपलाइन के जरिए सीधे रसोई तक पहुंचती है. हर घर के बाहर गैस मीटर लगा है, ताकि खपत का सटीक हिसाब रखा जा सके. रंजन सिन्हा की रिपोर्ट

बिहार के इस गांव ने कर लिया 'मुफ्त गैस' का जुगाड़, इन्हें नहीं है सिलेंडर की लाइन में लगने की जरूरत
  • बिहार के गयाजी जिले के बतसपुर गांव में चार वर्षों से गोबर गैस प्लांट से घरेलू गैस की आपूर्ति हो रही है
  • इस गांव में हर घर के बाहर गैस मीटर लगाया गया है जिससे गैस की खपत का सही हिसाब रखा जाता है
  • प्लांट में जमा गोबर से गैस निकलने के बाद बचा अवशेष जैविक खाद के रूप में किसानों को दिया जाता है

जहां एक ओर वैश्विक तनाव और युद्ध के चलते देश के कई हिस्सों में LPG गैस की किल्लत देखी जा रही है. कई शहरों-कस्बों में लोग लंबी लाइनों में लगे हैं. वहीं, बिहार के गयाजी जिले का एक छोटा सा गांव बतसपुर पूरी दुनिया के लिए एक मिसाल पेश कर रहा है. जब लोग सिलेंडर के लिए लंबी लाइनों में लगे हैं, तब इस गांव के घरों में गोबर से बनी गैस से चूल्हे जल रहे हैं. इससे गांव के करीब 50 घरों का चूल्हा जल रहा है. 

बतसपुर: आत्मनिर्भरता की नई कहानी

गयाजी जिले के बोधगया प्रखंड में स्थित बतसपुर गांव ने पिछले चार सालों से गैस संकट को मात दे रखी है. लोहिया स्वच्छ अभियान और गोबरधन योजना के तहत इस गांव में एक विशाल 'गोबर गैस प्लांट' लगाया गया है. इस पहल से शहरों की तरह यहां भी गैस पाइपलाइन के जरिए सीधे रसोई तक पहुंचती है. हर घर के बाहर गैस मीटर लगा है, ताकि खपत का सटीक हिसाब रखा जा सके. जो ग्रामीण प्लांट को गोबर देते हैं, उन्हें गैस मुफ्त मिलती है. वहीं, अन्य लोगों से मात्र 25 रुपये प्रति यूनिट का शुल्क लिया जाता है. 

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सफाई भी और कमाई भी

ग्रामीणों के अनुसार, इस प्लांट के लगने से गांव की तस्वीर बदल गई है. पहले गांव की गलियों में गोबर फैला रहता था, जिससे गंदगी और बीमारियां फैलती थीं. अब सारा गोबर प्लांट में जमा होता है. गैस निकलने के बाद जो अवशेष बचता है, उसे किसान अपने खेतों में जैविक खाद के रूप में इस्तेमाल कर रहे हैं, जिससे फसल की गुणवत्ता सुधरी है. ग्रामीण महिलाओं ने बताया, "पहले लकड़ी के चूल्हे पर खाना बनाते समय धुएं से आंखों में जलन होती थी और समय भी बहुत लगता था. अब गोबर गैस से खाना जल्दी बनता है और रसोई भी साफ रहती है."

प्रशासन और पंचायत की पहल

गांव के मुखिया ईश्वर मांझी का कहना है कि यह प्रोजेक्ट न केवल पर्यावरण के अनुकूल है, बल्कि आर्थिक रूप से भी ग्रामीणों को मजबूत बना रहा है. आज करीब 40 से 50 परिवार पूरी तरह से बाहरी गैस की आपूर्ति से मुक्त हो चुके हैं. 

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वैश्विक संकट और भारत पर असर

ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव का असर अब भारत की रसोई तक पहुंचने लगा है. कई राज्यों में गैस की आपूर्ति प्रभावित हुई है, जिससे न केवल आम आदमी परेशान है, बल्कि होटल और रेस्टोरेंट का कारोबार भी ठप होने की कगार पर है.
 

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