आरजेडी नेता और बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव (Tejashwi yadav) ने मुजफ्फरपुर शेल्टर होम मामले में मंगलवार को सीएम नीतीश कुमार (Nitish Kumar) पर निशाना साधा है. तेजस्वी ने कहा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार मुजफ्फरपुर बलात्कार कांड (Muzaffarpur Shelter Home Case) में स्पष्ट और सीधे रूप से संलिप्त है क्योंकि इन्होंने TISS की रिपोर्ट आने के दो महीनों तक ब्रजेश ठाकुर पर FIR नहीं होने दी. उसे जेल नहीं भेजा. दबाव में भेजा तो जेल में मोबाइल समेत तमाम सुविधाएं दी गईं. बच्चियों को गायब किया गया. साथ ही यादव ने कहा कि मामला सामने आने पर नीतीश कुमार ने एकदम सिरे से हमारी CBI जांच की मांग को खारिज कर दिया. उन्हें CBI जांच का डर क्यों था?
तेजस्वी ने कहा, 'जब हमने मुजफ्फरपुर बालिका गृह का दौरा कर वहां बच्चियों के साथ किए गए डरावने और अमानवीय कृत्यों को पब्लिक डोमेन में रखा तब जाकर दबाव मे केस सीबीआई को सौंपा गया. नीतीश कुमार तो छाती पीट-पीटकर तत्कालीन समाज कल्याण मंत्री मंजू वर्मा को निर्दोष बता रहे थे. लेकिन जब कांड का कच्चा चिट्ठा खुला और मीडिया में ब्रजेश ठाकुर की सीडीआर डिटेल्स में मिलीभगत का पर्दाफाश होने और विपक्ष व जनदबाव के कारण मंजू वर्मा का इस्तीफा लेना पड़ा. CM उसे क्यों बचा रहे थे?.'
मुख्य अभियुक्त ब्रजेश ठाकुर से जेल में चर्चित डायरी बरामद हुई थी जिसमें "पटना वाले बड़े सर” का ज़िक्र था? क्या CBI ने खोज लिया था वह “पटना वाला बड़ा सर” कौन है? क्या CBI जाँच की आँच उस “बड़े सर” के पास पहुँच गयी थी जिसके चलते आनन-फ़ानन में CBI अधिकारी का तबादला किया गया था?
— Tejashwi Yadav (@yadavtejashwi) February 19, 2019
एक साथ कई ट्वीट करते हुए तेजस्वी ने लिखा है, 'मुख्य अभियुक्त ब्रजेश ठाकुर से जेल में चर्चित डायरी बरामद हुई थी जिसमें 'पटना वाले बड़े सर' का ज़िक्र था? क्या CBI ने खोज लिया था वह 'पटना वाला बड़ा सर' कौन है? क्या CBI जांच की आंच उस 'बड़े सर' के पास पहुंच गयी थी, जिसके चलते आनन-फानन में CBI अधिकारी का तबादला किया गया था? CBI अधिकारी का तबादला नहीं करने के कोर्ट के आदेश के विपरीत जाकर, कोर्ट की अवमानना कर CBI निदेशक ने तत्कालीन जांच अधिकारी एसपी का बिना कारण बताए अचानक तबादला क्या इसलिए किया गया था ताकि वो 'पटना वाले बड़े साहब' को बचा सके? ऐसा क्यों किया गया?'
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार मुज़फ़्फ़रपुर बलात्कार कांड में स्पष्ट और सीधे रूप से संलिप्त है क्योंकि इन्होंने TISS की रिपोर्ट आने के दो महीनों तक ब्रजेश ठाकुर पर FIR नहीं होने दी।जेल नहीं भेजा। दबाव में भेजा तो जेल में मोबाइल समेत तमाम सुविधाएँ प्रदान की।बच्चियों को ग़ायब किया गया।
— Tejashwi Yadav (@yadavtejashwi) February 19, 2019
तेजस्वी ने पूछा, 'आप बताइये क्या यह मामला संदेहास्पद नहीं है? क्योंकि सीबीआई निदेशक स्तर का अधिकारी 'किसी बड़े व्यक्ति' को बचाने के लिए ही कोर्ट की अवमानना करने का जोखिम उठायेगा? बाद में उस CBI अधिकारी को कोर्ट की अवमानना का दोषी क़रार कर माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने जुर्माने के साथ सजा भी दी? CM नीतीश ने केस में सीबीआई जांच में सबूत जुटा सहयोग करने वाली तत्कालीन जिला पुलिस अधीक्षक हरप्रीत कौर को सम्मानित करने की बजाय उनका तबादला क्यों किया? वो केस से संबंधित सभी जानकारियां जुटा रही थीं तो क्यों उन्हें मुजफ्फरपुर से आनन-फानन में हटाया क्यों? मुख्यमंत्री जवाब दें?'
मामला उजागर होने पर नीतीश जी ने एकदम सिरे से हमारी CBI जाँच की माँग को ख़ारिज किया? उन्हें CBI जाँच का डर क्यों था?
— Tejashwi Yadav (@yadavtejashwi) February 19, 2019
जब हमने मुजफ्फरपुर बालिका गृह का दौरा कर वहाँ बच्चियों के साथ किए गए डरावने और अमानवीय कृत्यों को पब्लिक डोमेन में रखा तब जाकर दबाव मे केस CBI को सुपुर्द करना पड़ा
VIDEO- SC ने मुजफ्फरपुर शेल्टर होम केस किया दिल्ली ट्रांसफर
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