विधानसभा चुनाव में मिली करारी हार के बाद राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के अंदर बड़े बदलाव की आहट तेज हो गई है. पार्टी सूत्रों के मुताबिक नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव संगठन की गहन समीक्षा के बाद 200 से अधिक नेताओं और कार्यकर्ताओं पर कार्रवाई करने की तैयारी में हैं. बताया जा रहा है कि यह कार्रवाई पार्टी विरोधी गतिविधियों, निष्क्रियता और चुनाव के दौरान लापरवाही जैसे आरोपों के आधार पर की जाएगी. पार्टी के इस एक्शन का असर 26 तारीख के बाद जमीन पर दिखने लगेगा.
सूत्रों के अनुसार RJD नेतृत्व का मानना है कि चुनावी हार से सबक लेते हुए अब आधे-अधूरे फैसलों से काम नहीं चलेगा. पार्टी को दोबारा मजबूत करने के लिए सख्त कदम उठाने जरूरी हैं. तेजस्वी यादव का फोकस अब संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूत करने पर है. कमजोर कड़ियों को हटाकर नए, सक्रिय और प्रतिबद्ध चेहरों को जिम्मेदारी देने की रणनीति बनाई जा रही है. पार्टी के अंदर यह संदेश साफ दिया जा रहा है कि अब केवल पद नहीं, बल्कि प्रदर्शन और जवाबदेही ही प्राथमिकता होगी.
संगठन की समीक्षा के बाद बड़ा फैसला
सूत्रों का कहना है कि हालिया चुनाव में कई स्तरों पर संगठनात्मक कमजोरियां सामने आईं. कुछ नेताओं पर आरोप है कि उन्होंने न तो चुनाव प्रचार में सक्रिय भूमिका निभाई और न ही कार्यकर्ताओं को सही दिशा दी. वहीं, कुछ पर पार्टी विरोधी गतिविधियों और अंदरखाने नुकसान पहुंचाने के आरोप भी लगे हैं. ऐसे में RJD नेतृत्व अब एक्शन मोड में है.
RJD का बयान संगठन मजबूती पर जोर
इस पूरे मामले पर RJD प्रवक्ता एजाज अहमद ने कहा कि पार्टी संगठन को मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ रही है. उन्होंने कहा कि लालू यादव के विचार और तेजस्वी यादव के कार्यों के साथ पार्टी आगे बढ़ेगी. संगठन को मजबूत बनाने के लिए जो भी सुझाव सामने आए हैं, उन पर गंभीरता से विचार किया जाएगा. एजाज अहमद के मुताबिक यह प्रक्रिया किसी के खिलाफ नहीं, बल्कि पार्टी को मजबूत बनाने के लिए है.
विपक्ष का हमला हार की बौखलाहट
वहीं विपक्षी दलों ने RJD के इस कदम पर तीखा हमला बोला है. भाजपा प्रवक्ता प्रभाकर मिश्रा ने कहा कि करारी हार के बाद RJD अपनी संगठनात्मक कमजोरी स्वीकार करने के बजाय अपने ही नेताओं और कार्यकर्ताओं को दोषी ठहरा रही है. उन्होंने कहा कि 200 से ज्यादा लोगों पर कार्रवाई कोई संगठन सुधार नहीं, बल्कि हार की बौखलाहट है. प्रभाकर मिश्रा ने आरोप लगाया कि पहले परिवारवाद और अब डर व दमन, यही RJD की असली पहचान है. उनके मुताबिक जनता ने फैसला दे दिया है और अब तेजस्वी यादव अपने ही लोगों को बलि का बकरा बना रहे हैं.
जदयू का तंज जवाबदेही से भाग रहे हैं
जदयू प्रवक्ता अभिषेक झा ने भी RJD नेतृत्व पर सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि तेजस्वी यादव चुनाव हारने के बाद हताश नजर आ रहे हैं. 40 दिन तक घूमने के बाद अब समीक्षा बैठक के नाम पर पार्टी के कार्यकर्ताओं पर कार्रवाई की खबरें सामने आ रही हैं. अभिषेक झा ने सवाल किया कि इससे क्या साबित करना चाहते हैं? क्या यह मान लिया जाए कि पार्टी के भीतर ही घात हुआ, इसलिए चुनाव हारे? उन्होंने तेजस्वी यादव से नैतिक जवाबदेही लेते हुए इस्तीफा देने की मांग भी की.
सुधार या संदेश?
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि RJD का यह कदम दो तरह से देखा जा सकता है. एक तरफ यह संगठन को दुरुस्त करने की कोशिश है, ताकि भविष्य में पार्टी ज्यादा मजबूत होकर चुनावी मैदान में उतरे. वहीं दूसरी तरफ यह संदेश भी है कि पार्टी नेतृत्व अब किसी भी तरह की ढिलाई बर्दाश्त नहीं करेगा.
हालांकि चुनौती यह है कि इतनी बड़ी संख्या में कार्रवाई से पार्टी के भीतर असंतोष भी बढ़ सकता है. अगर कार्रवाई पारदर्शी और निष्पक्ष नहीं रही, तो इसका उल्टा असर भी पड़ सकता है. तेजस्वी यादव के लिए यह एक कठिन संतुलन बनाने का समय है जहां एक ओर सख्ती दिखानी है, वहीं दूसरी ओर संगठन को टूटने से भी बचाना है. आने वाले दिनों में यह साफ हो जाएगा कि RJD का यह कदम पार्टी के लिए संजीवनी साबित होता है या फिर आंतरिक कलह को और बढ़ाता है. फिलहाल इतना तय है कि विधानसभा चुनाव की हार के बाद RJD अब पुराने ढर्रे पर चलने के मूड में नहीं है और संगठन में बड़े बदलाव तय माने जा रहे हैं.
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