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This Article is From Aug 04, 2025

राहुल गांधी की पदयात्रा से पहले कांग्रेस के लिए कितना बड़ा झटका है कद्दावर दलित नेता का इस्‍तीफा?

अशोक राम के इस्‍तीफे से कांग्रेस का संपर्क एक कद्दावर राजनीतिक परिवार से टूट गया. भले अशोक राम की बिरादरी से ही आने वाले राजेश राम के हाथ में बिहार प्रदेश की कमान सौंप दी गई हो, लेकिन चुनाव से पहले अशोक राम का जाना कांग्रेस को खलेगा.

राहुल गांधी की पदयात्रा से पहले कांग्रेस के लिए कितना बड़ा झटका है कद्दावर दलित नेता का इस्‍तीफा?
  • बिहार में दिग्‍गज दलित नेताओं में शुमार अशोक राम ने कांग्रेस से इस्‍तीफा दे दिया है और जदयू जॉइन कर लिया.
  • अशोक राम ने कांग्रेस पर नाराजगी जताते हुए कहा कि पार्टी अब नेहरू और राजीव गांधी के दौर जैसी नहीं रही है.
  • राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार अशोक राम के कांग्रेस छोड़ने से पार्टी की दलितों में पैठ पर भी असर पड़ सकता है.
पटना:

कांग्रेस ने बिहार में एक दलित चेहरे को आगे बढ़ाया. प्रदेश का कार्यकारी अध्‍यक्ष बनाया. कांग्रेस के सीनियर लीडर रहे हैं. 6 बार के विधायक रहे. राबड़ी सरकार में मंत्री भी रहे. ये कह के निकल लिए कि कांग्रेस को अब मेरी जरूरत नहीं. जाहिर तौर पर हम अशोक राम की ही बात कर रहे हैं. कांग्रेस के दिग्‍गज नेताओं में शुमार अशोक राम अब जनता दल यूनाइटेड (JDU) के नेता हो गए हैं. राजनीतिक विश्‍लेषकों की मानें तो चुनाव से कुछ महीने पहले ये कांग्रेस के लिए झटका साबित हो सकता है. 

अशोक राम ने पटना में जेडीयू कार्यालय में औपचारिक रूप से पार्टी की सदस्‍यता ग्रहण की. संसदीय कार्य मंत्री विजय चौधरी और प्रदेश अध्यक्ष उमेश कुशवाहा की मौजूदगी में जेडीयू के कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष संजय कुमार झा ने उन्हें सदस्यता दिलाई. 

खबर है कि 10 अगस्त से राहुल गांधी बिहार में पदयात्रा कर सकते हैं. इस दौरान 18 जिलों का दौरा करने की संभावना है. ऐसे में इस यात्रा से महज कुछ दिन पहले अशोक राम का पार्टी छोड़ जाना राहुल गांधी के सामने भी सवाल खड़े कर सकता है. 

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कद्दावर राजनीतिक परिवार से कांग्रेस का संपर्क टूटा 

अशोक राम, बिहार के प्रमुख दलित चेहरों में रहे हैं और वे कद्दावर राजनेता के परिवार से आते हैं. वो 6 बार के विधायक रहे हैं और सदन में कांग्रेस विधायक दल के नेता भी रहे हैं. साल 2000 में बनी राबड़ी देवी की सरकार में वो कैबिनेट मंत्री भी रहे थे.

अशोक राम के पिता बालेश्वर राम भी बिहार की राजनीति में सक्रिय नेता रहे हैं. साल 1952 से 1977 तक वो 7 बार विधायक रहे. वो केंद्र में मंत्री भी रहे हैं. पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की कैबिनेट में उन्‍हें राज्यमंत्री बनाया गया था.  

बिहार में लंबे समय तक पॉलिटिकल बीट कवर करने चुके विश्‍लेषक दीपक कुमार मिश्रा का कहना है कि अशोक राम के इस्‍तीफे से कांग्रेस का संपर्क एक कद्दावर राजनीतिक परिवार से टूट गया. भले अशोक राम की बिरादरी से ही आने वाले राजेश राम के हाथ में बिहार प्रदेश की कमान सौंप दी गई हो, लेकिन चुनाव से पहले अशोक राम का जाना कांग्रेस को खलेगा. 

क्‍यों नाराज चल रहे थे अशोक राम?

कांग्रेस का दामन छोड़ते ही अशोक राम ने बड़ा बयान दिया, कहा कि लालू यादव बिहार में कांग्रेस को खत्‍म करने में सफल रहे. उनके बयानों में कांग्रेस से उनकी नाराजगी भी स्‍पष्‍ट रूप से सामने आई. उन्‍होंने कहा, 'कांग्रेस को अब मेरी जरुरत नहीं है. पार्टी अब नेहरू-राजीव गांधी के दौर की नहीं रही. अशोक राम ने कहा कि कांग्रेस पार्टी का पूरा परिदृश्य बदल गया है. 

राजनीतिक विश्‍लेषक रवींद्र नाथ तिवारी का कहना है कि अशोक कांग्रेस में खुद को हाशिये पर धकेले जाने से खफा चल रहे थे. वो बिहार कांग्रेस प्रभारी कृष्णा अल्लावरू से भी नाराज चल रहे थे. अशोक राम ने ये भी कहा है कि उन्‍हें पहले ही पार्टी छोड़ देनी चाहिए थी. 

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'घर बिठा दिया, पूछा तक नहीं!'

अशोक राम ने कांग्रेस पर उन्‍हें दरकिनार करने का आरोप लगाया. कहा कि पिछले लोकसभा चुनाव में मुझे किनारे कर दिया गया, घर बैठा दिया गया. एक बार पूछा तक नहीं गया. कम से कम पूछना चाहिए था न! उस वक्त टिकट बाहर से आए व्‍यक्ति को टिकट दिया गया. ये तो अपमानित करने जैसा है न! वे बोले- मुझे उसी समय कांग्रेस छोड़ देना चाहिए था. 

अशोक राम ने ये भी दावा किया कि अभी कुछ और नेता कांग्रेस छोड़ेंगे. जदयू के कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा भी उनके इस दावे में हां मिलाते हैं. उन्होंने कहा, ' कांग्रेस के लोगों को पता है कि जमीन पर उनका कुछ बचा नहीं. इसलिए वे पार्टी छोड़ना चाहते हैं.

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