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आंखों के सामने लहरों में समा गए पिता, नेपाल की बाढ़ से बचकर बेतिया लौटा बेटा, 3 साथी अब भी लापता

Nepal Flood News: नेपाल की बाढ़ में कई परिवार पूरी तरह से बिखर गए. नेपाल में काम करने गए बिहार के कुछ मजदूरों ने इस बाढ़ की रुला देने वाली कहानी सुनाई है. एक बेटे के पिता उसके सामने ही बाढ़ की लहरों में समा गए थे.

आंखों के सामने लहरों में समा गए पिता, नेपाल की बाढ़ से बचकर बेतिया लौटा बेटा, 3 साथी अब भी लापता
नेपाल की बाढ़ से बचकर मजदूरों ने सुनाई पूरी कहानी
  • बिहार के बेतिया से नेपाल में मजदूरी करने गए कुछ मजदूर भी बाढ़ में फंस गए थे.
  • बाढ़ की चपेट से बचकर वापस लौटे मजदूरों ने 23 अगस्त के दिन की कहानी बताई है.
  • एक मजदूर के पिता उसके सामने ही बाढ़ में बह गए, कई मजदूरों का अब तक पता नहीं चला है.
बेतिया:

नेपाल की बाढ़ में बिहार के कई लोग भी प्रभावित हुए हैं. बिहार के बेतिया से नेपाल में मजदूरी करने गए कुछ मजदूर भी इस बाढ़ की चपेट में आ गए थे. जिसकी कहानियां अब सामने आ रही हैं. नेपाल की तबाही से बचकर घर लौटे तीन मजदूरों ने अपनी आपबीती बताई है. करीब दो दिनों के सफर के बाद जब चारों मजदूर शुक्रवार देर शाम अपने घर पहुंचे तो परिजनों की आंखों में खुशी के आंसू छलक पड़े, परिवार ने राहत की सांस ली. लेकिन इस पूरी घटना की सबसे दर्दनाक तस्वीर यह है कि इन मजदूरों के साथ काम करने वाले तीन लोग अब भी लापता हैं. जिससे उनके परिवारों में मातम पसरा हुआ है. एक बेटे के सामने ही बाढ़ के सैलाब में पिता का हाथ छूटा गया, बेटा अपने घर लौट गया हैं. नेपाल की तबाही से बचकर घर लौटे तीनों मजदूरों ने NDTV को पूरी घटना सुनाई है. 

नेपाल की बाढ़ में फंसे थे पश्चिम चंपारण के मजदूर 

नेपाल की आपदा के बीच फंसे पश्चिम चंपारण के मजदूरों को नेपाली सेना की मदद से हेलीकॉप्टर के जरिए सुरक्षित निकाला गया. इसके बाद करीब दो दिनों के सफर के बाद चारों मजदूर अपने घर पहुंचे. सुरक्षित घर लौटने वालों में चनपटिया प्रखंड के पूर्वी तुरहापट्टी पंचायत नेयाज मियां, सलमान आलम, जबारूल आलम उर्फ शिबू आलम और रामनगर थाना क्षेत्र के मेहदी हसन शामिल हैं. सभी मजदूर नेपाल में मजदूरी के साथ कारपेंटर और टाइल्स लगाने का काम करते थे. 

सलमान के पिता बाढ़ में बह गए 

घर लौटे 17 साल के सलमान आलम ने नेपाल की उस भयावह घटना को याद करते हुए बताया कि जहां वे लोग काम कर रहे थे, वहां एक कमरे में करीब सात लोग रहते थे. घटना के वक्त कुछ मजदूर कमरे में ही मौजूद थे. सलमान के मुताबिक सुबह करीब 9 बजकर 30 मिनट पर अचानक धुएं की तरह पानी का सैलाब उनकी तरफ आया. देखते ही देखते पानी तेजी से बढ़ने लगा. हालात को समझते ही वे लोग जान बचाने के लिए ऊंचाई की तरफ भागे. सलमान ने बताया कि पानी इतनी तेजी से आया कि कुछ देर के लिए पूरा इलाका धुंधला हो गया. चारों तरफ पानी ही पानी दिखाई दे रहा था. आसपास क्या हो रहा है, कुछ भी समझ में नहीं आ रहा था. वह अचानक ऊपर की तरफ भागा, जिससे उसकी जान बच गई, लेकिन पिता का हाथ छूट गया और जब मैने पीछे देखा तो मेरे पिता लापता थे. पिता का कुछ पता नहीं चल पाया. 

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पिता के वापसी की उम्मीद

सलमान ने बताया कि कुछ देर बाद जब पानी का सैलाब कम हुआ तो मजदूरों ने अपने साथियों की तलाश शुरू की. इस दौरान सलमान और उसके कुछ साथी तो मिल गए, लेकिन उनके साथ काम करने वाले तीन मजदूरों का अब तक कोई पता नहीं चल पाया है. सलमान तो घर लौट आया, लेकिन उसके पिता अरमान अंसारी अभी तक वापस नहीं आए हैं. पति के लापता होने की खबर से शहरून खातून और परिवार के लोगों का रो-रोकर बुरा हाल है। घर में चूल्हा तक नहीं जला है, परिवार लगातार अरमान के सुरक्षित लौटने की उम्मीद लगाए बैठा है.

वहीं मोख्तार मियां के परिवार में भी चिंता का माहौल है,  उनके दो बेटे और एक बेटी हैं. हादसे के बाद से परिवार के लोग अपने लापता परिजन की तलाश और सुरक्षित वापसी की उम्मीद में परेशान हैं. दूसरी तरफ समीर अंसारी भी अब तक लापता बताए जा रहे हैं. समीर की शादी नहीं हुई है और पांच भाइयों में सबसे छोटे हैं. उनके लापता होने की खबर के बाद परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है.

नेयाज आलम की कहानी 

वहीं सुरक्षित लौटे मजदूर नेयाज आलम ने बताया कि वे सभी करीब सात-आठ लोग साथ में थे, लेकिन घटना के समय वह दूसरी साइट पर काम करने गया हुआ था. इसी वजह से उसकी जान बच गई. जब उसे बाढ़ और अपने साथियों के फंसे होने की जानकारी मिली तो वह उन्हें देखने के लिए मौके पर पहुंचा. वहां का मंजर देखकर उसके भी होश उड़ गए. अचानक आए पानी के सैलाब ने पूरे इलाके को अपनी चपेट में ले लिया था. मजदूरों के मुताबिक पानी करीब 20 फीट तक ऊपर आ गया था. ऐसे में उनके पास अपनी जान बचाने के लिए ऊंचाई की तरफ भागने के अलावा कोई रास्ता नहीं था.

वहीं अपने घर सुरक्षित लौटी जवारुल आलम ने बताया कि जब तूफान आया तो चारों तरफ अंधेरा ही अंधेरा और धुआं ही धुआ था. पानी का बहाव इतना तेज था कि जो भी लोग उसके चपेट में आ रहे थे वह सभी पानी में बाहर जा रहे थे. मैं किसी तरह जान बचाकर ऊपर भागा. 1 घंटे बाद जब पानी का बहाओ कम हुआ तो मैंने देखा कि चारों तरफ लाश ही लाश बिखरा हुआ है. मौत का ऐसा मंजर हमने पहले कभी नहीं देखा था. 

नेपाल की बाढ़ में बिहार भी प्रभावित 

नेपाल की इस प्राकृतिक आपदा ने पश्चिम चंपारण के कई परिवारों को झकझोर कर रख दिया है. चार मजदूरों के सुरक्षित घर लौटने से परिवारों में राहत जरूर है, लेकिन उनके साथ काम करने वाले तीन मजदूरों के अब तक नहीं मिलने से चिंता बरकरार है. परिजनों की निगाहें अब भी रास्ते पर टिकी हैं। हर फोन की घंटी के साथ उन्हें उम्मीद होती है कि शायद उनके अपनों की कोई खबर आई हो. नेपाल की बाढ़ में जिंदगी और मौत के बीच जूझकर वापस लौटे मजदूरों की आपबीती ने उस भयावह मंजर की तस्वीर सामने रख दी है, जहां कुछ ही मिनटों में पानी का सैलाब सबकुछ अपने साथ बहा ले जाने को तैयार था. अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर लापता तीन मजदूर कहां हैं? क्या वे भी सुरक्षित हैं? परिवारों को उनके अपनों की खबर कब मिलेगी? इन सवालों के जवाब का सभी को बेसब्री से इंतजार है.

इनपुट: जितेंद्र कुमार गुप्ता 

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