- पटना में NEET छात्रा के साथ हुई दरिंदगी मामले में फॉरेंसिक जांच रिपोर्ट ने मेल स्पर्म की पुष्टि की है
- पुलिस की लापरवाही पर अवर निरीक्षक रोशनी कुमारी और अपर थानाध्यक्ष हेमंत झा को तत्काल निलंबित किया गया है
- पीड़िता के परिजन हॉस्टल संचालक, अस्पताल और पुलिस पर मिलीभगत का आरोप लगाकर न्यायिक जांच की मांग कर रहे हैं
बिहार के पटना में NEET छात्रा के साथ हुई दरिंदगी मालमे ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है. इस मामले में अभी पुलिस की जांच जारी है. घटना को लेकर अब फॉरेंसिक जांच की रिपोर्ट भी सामने आई हैं.इस रिपोर्ट में कई चौंकाने वाले खुलासे किए गए हैं. रिपोर्ट के अनुसार पीड़िता के अंडरगारमेंट्स में मेल स्पर्म होने की पुष्टि हुई है. रिपोर्ट के सामने आने के बाद पुलिस प्रशासन में हड़कंप मच गया है. मामले में लापरवाही बरतने को लेकर पटना पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए चित्रगुप्तनगर थाना में तैनात अवर निरीक्षक रोशनी कुमारी और कदमकुआं थाना के अपर थानाध्यक्ष हेमंत झा को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है. दोनों अधिकारियों पर आरोप है कि उन्होंने समय रहते सूचना संकलन और आवश्यक कार्रवाई नहीं की, जिससे मामले की गंभीरता को शुरुआत में ही नजरअंदाज किया गया.
इधर, फॉरेंसिक रिपोर्ट आने के बाद पीड़िता के परिजनों ने हॉस्टल संचालक,हॉस्पिटल और पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए हैं. पीड़िता के पिता का कहना है कि सबकी मिली भगत है. उन्होंने कहा कि हम चाहते हैं कि आरोपियों पर कड़ी से कड़ी कार्रवाई की जाए.हमें पुलिस और एसआईटी पर भरोसा नहीं है. हम चाहते हैं कि इस पूरे मामले की न्यायिक जांच की जाए.
साथ ही उन्होंने चेतावनी दी है कि अगर उन्हें न्याय नही मिला तो वे पटना में आत्मदाह कर लेंगे. पीड़ित परिजनों का यह भी आरोप है कि घटना की अगर सही जांच हुआ तो इसमें कई बड़े लोग फंसेंगे. SIT के लोग केस को गुमराह करने की कोशिश कर रहे हैं. बार-बार परिजनों को ही टॉर्चर किया जा रहा है. पीड़िता के पिता ने घटना के बाद सीसीटीवी फुटेज गायब होने को लेकर भी सवाल खड़े किए हैं. उनका कहना है कि यदि शुरुआत में ही सख्त कदम उठाए जाते, तो सच्चाई बहुत पहले सामने आ जाती.
वहीं, यह मामला सामने आने के बाद पटना समेत पूरे बिहार में छात्राओं की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं. खासकर कोचिंग हब के रूप में पहचाने जाने वाले इलाकों में संचालित गर्ल्स हॉस्टलों की सुरक्षा, निगरानी और प्रशासनिक जवाबदेही पर अब बहस तेज हो गई है. स्थानीय लोगों और सामाजिक संगठनों ने दोषियों के खिलाफ कड़ी से कड़ी कार्रवाई की मांग की है। फिलहाल यह मामला न सिर्फ कानून-व्यवस्था, बल्कि छात्राओं की सुरक्षा को लेकर व्यवस्था की पोल खोलता नजर आ रहा है.
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