बिहार में अनुसूचित जाति - जनजाति के विद्यार्थियों के लिए संचालित आवासीय स्कूल, शिक्षकों की कमी से जूझ रहे हैं. इन आवासीय स्कूलों में शिक्षकों के 60 फीसदी पद खाली हैं. इसकी वजह से अब स्कूलों में छात्र - छात्राओं की संख्या भी घट रही है. छात्र - छात्राएं अब स्कूल से बाहर हो रहे हैं. विभाग की योजनाओं, प्री मैट्रिक, पोस्ट मैट्रिक स्कॉलरशिप के बावजूद इन स्कूलों में स्टूडेंट के 30% से अधिक सीटें खाली हैं. यह सब विभाग के आंकड़ों से साफ हुआ है.
शिक्षकों के 60% पद खाली
अनुसूचित जाति एवं जनजाति कल्याण विभाग द्वारा राज्य में 91 आवासीय स्कूल संचालित हैं. 50 स्कूल सिर्फ लड़कों के लिए, 37 लड़कियों के लिए और 4 लड़के - लड़कियां (Co - ed) दोनों के लिए हैं. इन स्कूलों में शिक्षकों के 3 हजार 456 पद स्वीकृत हैं. इनमें सिर्फ 1326 पदों पर शिक्षक कार्यरत हैं. 2130 पद खाली हैं. यानी शिक्षकों के 60 % से अधिक पद खाली हैं. विभाग का दावा है कि इन पदों पर भर्ती की प्रक्रिया की जा रही है.
30% स्टूडेंट स्कूल से बाहर
शिक्षकों की कमी का असर स्कूली शिक्षा पर हो रहा है. बच्चे स्कूल से बाहर हो रहे हैं. विभाग के इन विद्यालयों में 44 हजार 240 स्टूडेंट पढ़ सकते हैं. लेकिन अभी इन स्कूलों में 29 हजार 202 स्टूडेंट ही पढ़ रहे हैं. यानी क्षमता के मुकाबले 15 हजार 38 छात्र कम हैं. इस साल 2 हजार 895 सीटों पर एडमिशन होना है. इसके लिए 64 हजार 178 आवेदन आए हैं.इन स्कूलों में क्लास 1, क्लास 6 और क्लास 11 में ही एडमिशन होता है.
मंत्री का दावा जल्द भरे जाएंगे शिक्षकों के खाली पद
अनुसूचित जाति, जनजाति कल्याण विभाग के मंत्री लखेंद्र रौशन ने कहा कि हमने शिक्षकों की कमी को गंभीरता से लिया है. BPSC के माध्यम से TRE 4 के तहत हो रही शिक्षक भर्ती के लिए 4896 शिक्षकों की नियुक्तियां भेजी गई है. यह भर्ती प्रक्रिया पूरी होते ही शिक्षकों के पद भी भरे जाएंगे.
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