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Fact Check: नया केंद्रशासित प्रदेश बनाने का दावा कितना सही, PIB ने बता दिया पूरा सच

सोशल मीडिया पर ये दावा तेजी से किया जा रहा है, जिसमें कहा गया है कि सिलीगुड़ी कॉरिडोर के पास बिहार और पश्चिम बंगाल के जिलों को मिलाकर नया केंद्रशासित प्रदेश बनाया जाएगा.

Fact Check:  नया केंद्रशासित प्रदेश बनाने का दावा कितना सही, PIB ने बता दिया पूरा सच
नई दिल्ली:

सोशल मीडिया पर फैल रही उन खबरों को केंद्र सरकार ने खारिज कर दिया है, जिनमें दावा किया जा रहा था कि ‘सिलीगुड़ी कॉरिडोर' के नजदीक स्थित बिहार और पश्चिम बंगाल के कुछ जिलों को मिलाकर नया केंद्रशासित प्रदेश (Union Territory) बनाया जाएगा. प्रेस इन्फॉर्मेशन ब्यूरो (PIB) ने साफ किया कि ऐसा कोई प्रस्ताव सरकार के विचाराधीन नहीं है और वायरल पोस्ट पूरी तरह फर्जी हैं. पीआईबी ने लोगों से अपील की कि बिना आधिकारिक पुष्टि के ऐसी सूचनाएं न मानें, न साझा करें.

क्या चल रहा था सोशल मीडिया पर?

कई पोस्ट में दावा किया गया कि सुरक्षा मजबूती के नाम पर केंद्र सरकार बिहार के पूर्णिया, अररिया, किशनगंज और कटिहार, पश्चिम बंगाल के मालदा और उत्तर दिनाजपुर जैसे जिलों को मिलाकर नया केंद्रशासित प्रदेश बनाने पर विचार कर रही है. इन तमाम पोस्टों में तर्क दिया गया कि यह कदम रणनीतिक रूप से संवेदनशील सिलीगुड़ी कॉरिडोर की सुरक्षा पुख़्ता करने के लिए उठाया जा रहा है. इस कथित योजना को लेकर तरह-तरह की अटकलें साझा की जा रही थीं, जिससे लोगों में भ्रम और चिंता दोनों बढ़ रहे थे.

‘कोई प्रस्ताव नहीं, दावा भ्रामक'

पीआईबी के फैक्ट-चेक के मुताबिक, “सोशल मीडिया पोस्ट दावा कर रहे हैं कि सरकार सिलीगुड़ी कॉरिडोर के पास बिहार और पश्चिम बंगाल के जिलों को मिलाकर नया यूटी बनाने की योजना बना रही है, असल में यह दावा फर्जी है.” एजेंसी ने दोहराया कि भारत सरकार के पास ऐसा कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है. साथ ही नागरिकों से कहा गया कि किसी भी संवेदनशील सूचना को आगे बढ़ाने से पहले उसे आधिकारिक स्रोतों से ज़रूर परखें वरना गलत जानकारी अनावश्यक अफवाह और तनाव पैदा कर सकती है.

सिलीगुड़ी कॉरिडोर क्या है और क्यों अहम है?

सिलीगुड़ी कॉरिडोर, जिसे अक्सर भारत का ‘चिकन नेक' कहा जाता है, पश्चिम बंगाल के उत्तरी हिस्से में सिलीगुड़ी शहर के आसपास स्थित एक संकरा गलियारा है इसकी चौड़ाई सबसे पतले हिस्से में लगभग 20–22 किलोमीटर और लंबाई करीब 60 किलोमीटर मानी जाती है. सीमित चौड़ाई के बावजूद इसका महत्व बेहद बड़ा है, क्योंकि यही मुख्य भू-मार्ग है जो मुख्यभूमि भारत को पूर्वोत्तर के आठ राज्यों असम, अरुणाचल प्रदेश, नागालैंड, मणिपुर, मिज़ोरम, मेघालय, त्रिपुरा और सिक्किम से जोड़ता है. यही वजह है कि इसे देश की आर्थिक, परिवहन और सामरिक ‘लाइफ़लाइन' भी कहा जाता है.

अफवाहें क्यों उठीं और क्या सावधानी बरतें

रणनीतिक महत्व के कारण सिलीगुड़ी कॉरिडोर अक्सर चर्चा में रहता है. ऐसे में सोशल मीडिया पर कोई भी ऐसी खबर तेजी से फैलती है. खासकर तब जब वो मुद्दा राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा हो. लेकिन सरकार की हालिया सफाई के बाद यह साफ हो गया है कि नए यूटी को लेकर कोई औपचारिक पहल नहीं हुई है. इसलिए वायरल संदेशों पर भरोसा करने से पहले पीआईबी, गृह मंत्रालय या राज्य सरकारों जैसे आधिकारिक चैनलों की रिलीज/पोस्ट देखें. साथ ही बिना तथ्य जांचे इस तरह की पोस्ट को शेयर करने से परहेज करें.

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