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This Article is From Oct 02, 2025

बिहार SIR में पुरुषों के मुकाबले महिलाओं के नाम ज्यादा कटे, पढ़ें पूरा मामला

भाकपा माले के महासचिव दीपांकर भट्टाचार्य ने आरोप लगाया कि माइक्रो फाइनेंस के कर्ज के जाल में महिलाएं फस गई हैं. उन महिलाओं का सरकार के प्रति गुस्सा है. इसलिए महिलाओं के नाम काटे जा रहे हैं.

बिहार SIR में पुरुषों के मुकाबले महिलाओं के नाम ज्यादा कटे, पढ़ें पूरा मामला
  • बिहार में अंतिम मतदाता सूची से महिलाओं के नाम पुरुषों की तुलना में सात लाख अधिक कटे हैं.
  • आयोग ने कहा कि जिन मतदाताओं के पास पर्याप्त दस्तावेज नहीं थे उनके नाम हटाए गए हैं.
  • भाकपा माले ने महिलाओं के नाम अधिक कटने पर पलायन के आंकड़ों के विपरीत सवाल उठाए हैं और इसे राजनीतिक साजिश माना.
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बिहार में SIR के बाद जारी हुई अंतिम मतदाता सूची भी विवादों के घेरे में है. आंकड़े बताते हैं कि पुरुष मतदाताओं के अनुपात में महिला मतदाताओं का नाम अधिक कटा है. आयोग का कहना है कि उन्हीं लोगों के नाम काटे गए हैं जिनके पास पर्याप्त दस्तावेज नहीं थे. इसके अलावा एब्सेंट, शिफ्टेड और डुप्लीकेट वोटर्स के नाम लिस्ट से बाहर हुए हैं. भाकपा माले ने इस तर्क के सहारे सवाल उठाए हैं. पार्टी का कहना है कि पुरुष महिलाओं के मुकाबले अधिक पलायन करते हैं, फिर महिलाओं के अधिक नाम कैसे काटे गए. 

क्या कहते हैं आंकड़े? 

SSR (7 जनवरी 2025) के बाद 7 करोड़ 80 लाख 22 हजार 933 मतदाता थे. इनमें महिला मतदाताओं की संख्या 3 करोड़ 72 लाख 57 हजार 477 थी और पुरूष मतदाताओं की संख्या 4 करोड़ 7 लाख 63 हजार 352 थी. SIR के फाइनल ड्राफ्ट (30 सितंबर 2025) के बाद कुल संख्या 7 करोड़ 41 लाख 92 हजार 357 है. इनमें महिला मतदाताओं की संख्या 3 करोड़ 49 लाख 82 हजार 828 रह गई, जबकि पुरुष मतदाताओं की संख्या 3 करोड़ 92 लाख 7 हजार है. 

पुरुषों के मुकाबले 7 लाख अधिक महिलाओं के नाम कटे 

SSR और SIR के बीच बिहार में पुरुष मतदाताओं की संख्या 15 लाख 56 हजार 352 घटी. वहीं, 22 लाख 74 हजार 649 महिला मतदाता घट गई. यानी पुरुषों के मुकाबले 7 लाख 18 हजार 297 महिला मतदाताओं के नाम अधिक कटे. इस तरह वोटर लिस्ट से 4.91% मतदाता घटे. इनमें 3.82% पुरुष घटे, जबकि 6.11% महिलाएं सूची से बाहर हुईं. इसकी वजह से मतदाताओं का लिंगानुपात भी घटा है. मतदाताओं का लिंगानुपात जनवरी में 914 था, अब यह 892 पहुंच गया है. 

महिलाओं के नाम काटे जाने पर राजनीति तेज 

भाकपा माले के महासचिव दीपांकर भट्टाचार्य ने आरोप लगाया कि माइक्रो फाइनेंस के कर्ज के जाल में महिलाएं फस गई हैं. उन महिलाओं का सरकार के प्रति गुस्सा है. इसलिए महिलाओं के नाम काटे जा रहे हैं. महिलाएं पुरुषों के मुकाबले ज्यादा पलायन नहीं करती हैं. फिर उनके नाम ज्यादा काटने का दूसरा कोई कारण नहीं है. 

भाजपा प्रवक्ता कुंतल कृष्ण ने कहा कि SIR की पूरी प्रक्रिया पारदर्शी है, जो सही दस्तावेज पेश नहीं कर पाए या अब्सेंट, शिफ्टेड और डुप्लीकेट कैटेगरी में आए, उनका ही नाम कटा है. साजिश से किसी का नाम नहीं कटा है. 

पिछले 2 साल SSR में बढ़ती रही महिलाओं की संख्या 

दिलचस्प यह है कि सालाना होने वाले SSR की प्रक्रिया में पिछले दो साल से पुरुष मतदाताओं के मुकाबले महिला मतदाता अधिक जुड़ीं. 2024 में 5 लाख 78 हजार 766 पुरुष जुड़े थे. वहीं, 6 लाख 30 हजार 597 महिलाएं जुड़ी थीं. 2025 के SSR के दौरान 3 लाख 25 हजार 298 पुरुष मतदाता सूची में जुड़े. वहीं, 4 लाख 69 हजार 235 महिलाएं जुड़ीं. लेकिन अब SIR की प्रक्रिया में महिला मतदाताओं के नाम ज्यादा कटे हैं. यह समूह आमतौर पर एनडीए को ज्यादा वोट करता है. ऐसे में महिलाओं के ज्यादा नाम काटे जाने का चुनाव पर क्या प्रभाव होता है, यह देखने वाली बात होगी.

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