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बिहार पुलिस के 21 हजार नए सिपाहियों के लिए DGP का बड़ा आदेश, 5 साल तक नहीं बनेंगे बॉडीगार्ड; जानें नए नियम

बिहार को जल्द ही 21 हजार नए जवान मिलने वाले हैं, लेकिन उनकी ड्यूटी का तरीका अब पहले जैसा नहीं होगा. 'पुलिस दीदी' से लेकर VIP सुरक्षा और होमगार्ड्स की जगह तैनाती तक, पुलिस मुख्यालय ने कौन से 4 बड़े बदलाव किए हैं? पूरी डिटेल यहां पढ़ें.

बिहार पुलिस के 21 हजार नए सिपाहियों के लिए DGP का बड़ा आदेश, 5 साल तक नहीं बनेंगे बॉडीगार्ड; जानें नए नियम
बिहार के डीजीपी ने नए सिपाहियों के लिए 4 बड़े फैसले लिए हैं. (प्रतीकात्मक तस्वीर)

Patna News: बिहार पुलिस में शामिल होने जा रहे करीब 21 हजार नए सिपाहियों का इंतजार अब खत्म होने वाला है. इन जवानों की ट्रेनिंग अपने अंतिम चरण में है और इसी महीने के अंत तक ये राज्य के अलग-अलग जिलों में अपनी ड्यूटी संभाल लेंगे. लेकिन, फील्ड में उतरने से ठीक पहले पुलिस मुख्यालय ने इन नए सिपाहियों के लिए कुछ अहम नियम जारी कर दिए हैं. अगर आप या आपका कोई जानने वाला इस नई भर्ती का हिस्सा है, तो आपको बिहार के डीजीपी विनय कुमार के इन नए आदेशों के बारे में जरूर जानना चाहिए.

शुरुआती 5 साल सिर्फ फील्ड ड्यूटी

डीजीपी विनय कुमार ने सभी जिलों के पुलिस कप्तानों को साफ निर्देश दिया है कि नए सिपाहियों को नौकरी के शुरुआती 5 सालों तक सिर्फ डिस्ट्रिक्ट आर्म्ड पुलिस के रूप में ही काम करना होगा. इन 5 सालों में इनकी मुख्य जिम्मेदारी इलाके में कानून-व्यवस्था बनाए रखना, सशस्त्र ड्यूटी और पुलिस गश्त करना और जरूरत पड़ने पर अपराधियों की धरपकड़ करना ही होगी.

बॉडीगार्ड या ऑफिस ड्यूटी पर सख्त पाबंदी

अक्सर देखा जाता था कि नई भर्ती वाले जवानों को बड़े अफसरों का बॉडीगार्ड बना दिया जाता था या ऑफिस के काम में लगा दिया जाता था. लेकिन नए नियमों के तहत इस पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है. पुलिस मुख्यालय से स्पष्ट आदेश है कि एक जवानों को किसी भी अधिकारी का बॉडीगार्ड नहीं बनाया जाएगा. साथ ही, अगले 5 सालों तक इन्हें किसी ऑफिस या स्पेशल यूनिट में भी तैनात नहीं किया जाएगा.

होमगार्ड की जगह नए जवानों को मिलेगी प्राथमिकता

डीजीपी ने इस बात पर भी नाराजगी जताई है कि जिलों में नए सिपाही होने के बावजूद कई अहम जगहों पर होमगार्ड के जवानों की ड्यूटी लगा दी जाती है. अब इस व्यवस्था को बदला जाएगा. गश्ती, भीड़ नियंत्रण और सुरक्षा व्यवस्था जैसे संवेदनशील और महत्वपूर्ण कामों में सीधे भर्ती होकर आए इन नए सिपाहियों को ही प्राथमिकता दी जाएगी.

'पुलिस दीदी' के लिए भी अब अनुभव जरूरी

बिहार में महिलाओं और छात्राओं की सुरक्षा के लिए 'पुलिस दीदी' नाम की एक बेहतरीन पहल चल रही है. इसमें महिला पुलिसकर्मी स्कूटी और बाइक से स्कूल-कॉलेज और बाजारों में गश्त करती हैं. नए नियमों के मुताबिक, 'पुलिस दीदी' में अब सीधे नई महिला सिपाहियों को तैनात नहीं किया जाएगा. इस विशेष टीम का हिस्सा बनने के लिए महिला सिपाहियों को कम से कम 5 साल का अनुभव होना अनिवार्य कर दिया गया है.

क्या होगी एक DAP कंपनी की संरचना?

पुलिस मुख्यालय ने डिस्ट्रिक्ट आर्म्ड पुलिस (DAP) की एक कंपनी का स्ट्रक्चर भी तय कर दिया है. एक कंपनी में कुल 95 पुलिसकर्मी होंगे, जिनमें एक सूबेदार, चार एनसीओ, 18 हवलदार और 72 सिपाही शामिल होंगे. 

नए नियमों का असर क्या होगा?

विशेषज्ञों का मानना है कि इस फैसले से बिहार पुलिस की कार्यक्षमता में जबरदस्त सुधार आएगा। जब 21 हजार युवा और ऊर्जावान सिपाही सीधे फील्ड पर उतरकर अपराध नियंत्रण और गश्त का काम करेंगे, तो न सिर्फ थानों में पुलिस बल की कमी दूर होगी, बल्कि बिहार में आम जनता को और भी ज्यादा सुरक्षित माहौल मिल सकेगा.

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