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बिहार विधान परिषद में सूखे नशे के खिलाफ पक्ष-विपक्ष की एकजुटता, जानिए सदन में क्या हुआ

बिहार में शराबबंदी लागू होने के बाद से सूखे नशे (ड्रग्स) का कारोबार और उससे जुड़े मामलों में लगातार बढ़ोतरी देखने को मिली है. पुलिस समय-समय पर गांजा, ब्राउन शुगर, हेरोइन, अफीम समेत विभिन्न नशीले पदार्थों की बड़ी खेप बरामद करती रही है.

बिहार विधान परिषद में सूखे नशे के खिलाफ पक्ष-विपक्ष की एकजुटता, जानिए सदन में क्या हुआ
बिहार विधानसभा
  • बिहार विधान परिषद में सूखे नशे के बढ़ते खतरे पर गंभीर चर्चा हुई और सरकार से कड़े कदम उठाने की मांग हुई.
  • मेडिकल दुकानों पर बिना पर्ची नशीली दवाओं की बिक्री पर सदन में तीखी बहस और सख्त कानून बनाने की अपील की गई.
  • सदस्यों ने सूखे नशे के खिलाफ व्यापक अभियान चलाने और ग्राम स्तर पर जिम्मेदारी तय करने की आवश्यकता जताई.
पटना:

बिहार विधान परिषद में मंगलवार को प्रश्नकाल के दौरान सूखे नशे का मुद्दा जोरदार तरीके से उठा. सत्ता पक्ष और विपक्ष के सदस्यों ने कहा कि सूखे नशे की वजह से बड़ी संख्या में युवा बर्बाद हो रहे हैं. सभी ने इस पर चिंता जताई और सरकार से इसे रोकने के लिए सख्त कदम उठाने की मांग की. चर्चा के दौरान मेडिकल दुकानों में बिना पर्ची नशीली दवाओं की बिक्री को लेकर की गई टिप्पणी पर सदन में कुछ देर के लिए तीखी बहस भी हुई.

RJD के विधान पार्षद अजय कुमार ने कहा कि सूखे नशे की वजह से युवाओं का भविष्य खराब हो रहा है. उन्होंने कहा कि यह बहुत गंभीर मामला है. सरकार को इस विषय पर अलग से चर्चा करनी चाहिए और इसे रोकने के लिए कड़े कानून बनाने चाहिए. उन्होंने कहा कि अगर समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो यह समस्या और बढ़ जाएगी.

'सूखे नशे के खिलाफ अभियान चलाना चाहिए'

अजय कुमार की बात का समर्थन करते हुए जदयू के विधान पार्षद नीरज कुमार ने कहा कि सरकार को पूरे राज्य में सूखे नशे के खिलाफ अभियान चलाना चाहिए. उन्होंने कहा कि गांव के मुखिया और वार्ड सदस्यों को भी इसमें जिम्मेदारी दी जाए. अगर किसी गांव में कोई युवक नशा करता है तो इसकी जानकारी प्रशासन तक पहुंचनी चाहिए. उन्होंने कहा कि लोगों की शिकायत सुनने के लिए एक टोल फ्री नंबर भी शुरू किया जाना चाहिए.

कड़ा कानून बनाने की मांग

राजद के विधान पार्षद सुनील सिंह ने कहा कि कई मेडिकल दुकानों पर बिना डॉक्टर की पर्ची के ऐसी दवाइयां आसानी से मिल जाती हैं, जिनका इस्तेमाल नशे के लिए किया जाता है. उन्होंने कहा कि कई बार छोटे बच्चों और युवाओं को भी ये दवाइयां बेच दी जाती हैं. उन्होंने ऐसी दवाइयों की बिक्री पर सख्ती से रोक लगाने और कड़ा कानून बनाने की मांग की. अपनी बात के दौरान सुनील सिंह ने कहा कि कई मंदिरों और मठों में भी गांजे का सेवन होता है. इस बयान पर सदन में हंगामा शुरू हो गया. बिहार सरकार के मंत्री प्रमोद चंद्रवंशी ने इसका विरोध किया. उन्होंने कहा कि बिना सबूत पूरे मंदिर और मठों पर ऐसा आरोप लगाना सही नहीं है. इसके बाद दोनों नेताओं के बीच कुछ देर तक बहस हुई.

बिहार में पिछले कुछ वर्षों से, खास कर शराबंदी के बाद से, सूखे नशे का मामला लगातार सामने आ रहा है. पुलिस समय-समय पर गांजा, ब्राउन शुगर, हेरोइन, अफीम और दूसरी नशीली चीजों की बड़ी खेप पकड़ती रही है. नेपाल सीमा से सटे कई जिलों में भी नशीले पदार्थों की तस्करी के मामले सामने आते रहे हैं. इसके अलावा कई जगहों पर बिना पर्ची नशीली दवाइयां बेचने की शिकायतें भी मिलती रही हैं.

पिछले कुछ समय से बिहार में नशीले पदार्थों की तस्करी और सूखे नशे के मामलों में लगातार कार्रवाई हो रही है. मई 2026 में राजस्व खुफिया निदेशालय ने बिहार में 104.9 किलो गांजा जब्त किया था और दो लोगों को गिरफ्तार किया था. डीआरआई के अनुसार, पिछले एक साल में उसकी लखनऊ जोन की टीम ने बिहार में 1,277.81 किलो गांजा, 107.5 किलो चरस, 18.92 किलो हाइड्रोपोनिक वीड, 6 किलो कोकीन, 112.8 ग्राम हेरोइन और 8,012 बोतल कोडीन युक्त कफ सिरप जब्त किए. इन मामलों में 31 लोगों को गिरफ्तार किया गया. जब्त किए गए नशीले पदार्थों की अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमत करीब 46.5 करोड़ रुपये आंकी गई है.

बिहार के सीमावर्ती इलाकों में तस्करी का 'खेल'

पुलिस और दूसरी एजेंसियां भी लगातार नशे के कारोबार के खिलाफ अभियान चला रही हैं. बिहार के सीमावर्ती इलाकों, खासकर नेपाल सीमा से जुड़े जिलों में गांजा, ब्राउन शुगर, हेरोइन और दूसरी नशीली चीजों की तस्करी के मामले सामने आते रहे हैं. इसके अलावा कई जगहों पर बिना डॉक्टर की पर्ची के नशीली दवाइयां बेचने की शिकायतें भी मिली हैं. इसी वजह से विधान परिषद में भी सदस्यों ने कहा कि केवल पुलिस कार्रवाई से काम नहीं चलेगा. मेडिकल दुकानों पर सख्त निगरानी, लोगों की जागरूकता और नशा मुक्ति अभियान को भी मजबूत करना होगा.

इन सबके बावजूद युवाओं में नशे की लत बढ़ने को लेकर चिंता बनी हुई है. डॉक्टरों और विशेषज्ञों का कहना है कि केवल पुलिस कार्रवाई से यह समस्या खत्म नहीं होगी. परिवार, स्कूल, समाज और सरकार को मिलकर काम करना होगा. मेडिकल दुकानों पर सख्त निगरानी और नशा मुक्ति केंद्रों को मजबूत करना भी जरूरी है.

चर्चा के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के सभी सदस्यों ने माना कि सूखा नशा एक बड़ी सामाजिक समस्या बनता जा रहा है. उनका कहना था कि युवाओं को नशे से बचाने के लिए सरकार को सख्त कानून बनाने के साथ-साथ जागरूकता अभियान भी तेज करना चाहिए.

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