अगर वाकई कुछ कर गुजरने का हौसला हो तो हर मुश्किल आसान हो जाती है... ऐसी ही एक कहानी गोपालगंज की उस बच्ची है जो अपने दोनों पैरों से विकलांग है लेकिन रोज दो किलोमीटर का सफर कर स्कूल जाती है. गोपालगंज की ये कहानी उन बच्चों के लिए किसी प्रेरणा से कम नहीं है, जो संसाधन होने के बावजूद स्कूल जाने से कतराते हैं. लेकिन इस 15 साल की मासूम बच्ची की पढ़ाई को लेकर ललक और स्कूल जाने का संघर्ष हर किसी को हैरान कर देगा.
15 साल की सोनी कुमारी गोपालगंज के भोरे प्रखंड के हुस्सेपुर गांव की रहने वाली है. सोनी के जन्म के कुछ समय बाद ही उनके पिता नंदकिशोर राम की मौत हो गई थी.
मां अकेले ही चलाती है घर
मां गुलाइची देवी अकेले ही अपनी दिव्यांग बेटी को पाल पोस रही हैं. मां का कहना है कि उनकी बेटी बचपन से ही दोनों पैरों से दिव्यांग है. उनके पास इतने पैसे नहीं है कि बच्ची का इलाज करा सकें. वह कहती हैं कि घर का खर्चा भी मुश्किल से चल पाता है. ऐसे में बच्ची का इलाज कराएं या फिर परिवार का खर्चा चलाए.

गुलाइची देवी ने अपनी बेटी का दाखिल अपने गांव के पास में ही एक पब्लिक स्कूल में करवाया है. इस स्कूल की दूरी उनके गांव से करीब दो किलोमीटर है.
वीडियो वायरल हुआ, तब मिली ट्राईसाइकिल
गुलाइची देवी ने बताया कि दिव्यांगों के लिए सरकार कई योजनाएं चलाती है. ट्राईसाइकिल भी मुफ्त में देती है. लेकिन उनकी बेटी को यह ट्राइसाइकिल भी मयस्सर नहीं हुई. उन्होंने कहा कि उन्होंने मदद के लिए अधिकारियों के पास गुहार भी लगाई, आवेदन भी दिए लेकिन उनकी बेटी को किसी भी योजना का लाभ नहीं मिल सका.
जिला प्रशासन ने 15 वर्षीय दिव्यांग छात्रा सोनी कुमारी की मदद के लिए हाथ बढ़ाया है। सोशल मीडिया पर साझा किए गए एक वीडियो का संज्ञान लेते हुए, जिला पदाधिकारी (DM) श्री पवन कुमार सिन्हा ने त्वरित कार्रवाई करते हुए छात्रा को ट्राईसाइकिल उपलब्ध कराई। @DrKumarVishwas @maithilithakur pic.twitter.com/Bf9F8eWSKe
— District Gopalganj (@Dist_Gopalganj) March 12, 2026
हालांकि, सोनी कुमारी का पैदल ही स्कूल जाने का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ तो उसे प्रशासन की तरफ से ट्राईसाइकिल दी गई. गोपालगंज के डीएम पवन कुमार सिन्हा ने सोनी को तत्काल ट्राईसाइकिल दी.
इसी विधानसभा से है शिक्षा मंत्री
सोनी जिस गांव में रहती हैं, वह भोरे विधानसभा में आता है, जहां से जेडीयू के सुनील कुमार विधायक हैं. सुनील कुमार बिहार सरकार में शिक्षा मंत्री भी हैं. इसके बावजूद शिक्षा मंत्री के ही क्षेत्र में दिव्यांग बच्ची पैदल ही स्कूल जाने को मजबूर है.

सोनी ने बताया कि वह दो साल से पब्लिक स्कूल में पढ़ने जाती है. स्कूल में उनकी फीस नहीं लगती, लेकिन वह रोज पैदल ही जाती हैं. उनका कहना है कि वह पढ़-लिखकर डॉक्टर बनना चाहती हैं और समाज सेवा करना चाहती हैं.
दिव्यांग होने के कारण स्कूल जाने में सोनी को थोड़ी परेशानी भले ही होती हो लेकिन उनका हौसला टूटा नहीं है.
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