बिहार में भरत तिवारी के एनकाउंटर पर न्यायिक जांच की रिपोर्ट आने के बाद सरकार ने उनके परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने का ऐलान किया है. सिर्फ नौकरी ही नहीं, बल्कि सरकार भरत तिवारी के परिवार को आर्थिक सहायता भी देगी.
बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने गुरुवार को X पर पोस्ट कर बताया कि न्यायिक जांच की अंतरिम रिपोर्ट के आधार पर बिहार सरकार दिवंगत भरत तिवारी के परिवार को आर्थिक सहायता और एक परिजन को सरकारी नौकरी देगी.
न्यायिक जाँच के अंतरिम रिपोर्ट के आधार पर बिहार सरकार द्वारा दिवंगत भरत तिवारी के परिवार को आर्थिक सहायता एवं एक परिजन को सरकारी नौकरी प्रदान की जाएगी।
— Samrat Choudhary (@samrat4bjp) August 13, 2026
17 जून को हुआ था एनकाउंटर
भरत तिवारी का 17 जून को भोजपुर के बिलौती गांव में एनकाउंटर हो गया था. उनके एनकाउंटर को फर्जी बताया जा रहा था. आरोप लगा था कि जब भरत तिवारी ने हथियार डाल दिए थे, सरेंडर कर दिया था तो फिर पुलिस ने उसका एनकाउंटर क्यों किया?
वहीं, पुलिस का दावा था कि भरत लगातार गोली चला रहे थे, जिसके चलते जवाबी कार्रवाई में उनके पैर में गोली लगी और अस्पताल ले जाते समय उनकी मौत हो गई. बिहार सरकार ने इस एनकाउंटर की न्यायिक जांच करवाने के आदेश दिए थे.
11 अधिकारियों को बनाया गया है आरोपी
इस मामले में 11 अधिकारियों को आरोपी बनाया गया है. भरत तिवारी की पैरवी करने वाले सुप्रीम कोर्ट में सीनियर एडवोकेट संजीव कुमार सिंह के मुताबिक, इस मामले में तत्कालीन एसडीएम संजीत कुमार, तत्कालीन एसडीपीओ राजेश कुमार शर्मा, तत्कालीन एसएचओ राजेश मलाकर, पुलिस अधिकारी अंकित आर्यन और हरिश्चंद्र कुमार, एसटीएफ के अक्षय कुमार और विकास कुमार और एएसआई रमाशंकर यादव को आरोपी बनाया गया है. इस मामले में एसटीएफ के अक्षय कुमार को गिरफ्तार किया जा चुका है. बताया जा रहा है कि भरत तिवारी पर पहली गोली अक्षय कुमार ने ही चलाई थी.
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