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मठ की जमीन पर नियंत्रण की जंग! रामधनी और राजकुमार गुड्डू की लड़ाई में EO की हत्या

भागलपुर हत्याकांड के पीछे नगर परिषद के टेंडर में हिस्सेदारी, वर्चस्व की जंग के साथ-साथ मठ की जमीन पर कब्जा भी तात्कालिक कारण बना. जिसमें एग्जिक्यूटिव ऑफिसर (EO) की जान चली गई.

मठ की जमीन पर नियंत्रण की जंग! रामधनी और राजकुमार गुड्डू की लड़ाई में EO की हत्या
Bihar News:

भागलपुर के सुल्तानगंज नगर परिषद के कार्यपालक पदाधिकारी (EO) की हत्या को 2 दिन बीत गए हैं, लेकिन परिसर में अब भी खून के गहरे धब्बे फैले हुए हैं. घटना का मुख्य आरोपी रामधनी यादव पुलिस एनकाउंटर में मारा जा चुका है. इस पूरे विवाद के पीछे नगर परिषद के टेंडर में हिस्सेदारी, वर्चस्व की जंग के साथ-साथ मठ की जमीन पर कब्जा भी तात्कालिक कारण बना. जिसमें एग्जिक्यूटिव ऑफिसर (EO) की जान चली गई. जबकि निशाना पर राजकुमार गुड्डू था.

12 बीघे जमीन पर रामधनी यादव का नियंत्रण

दरअसल, अजगैबी नाथ मंदिर के पास शहर के बीच 12 बीघे जमीन है. इस जमीन पर मठ ने 2014 में दुकानें बनानी शुरू की. इस जमीन का एक हिस्सा रामधनी यादव के घर के सामने की ओर है. मठ की 12 बीघे जमीन की देखरेख रामधनी यादव करता था, इस जमीन पर 20 दुकानें हैं. आम का बगीचा भी है. खाली जमीन पर सावन के महीने में पार्किंग की व्यवस्था की जाती है. इस सभी से मठ को आमदनी होती है. पार्किंग, आम के फल और फसल से होने वाली आमदनी का एक हिस्सा रामधनी यादव देखरेख के नाम पर रखता था. एक तरह से देखें तो यह जमीन मठ की जरूर थी लेकिन यहां होने वाली गतिविधियां पूरी तरह से रामधनी यादव के नियंत्रण में थी.

गौशाला के जरिए जमीन हो जाएगी मुक्त 

नगर परिषद के चेयरमैन राजकुमार गुड्डू इस जमीन पर नगर परिषद की तरफ से गौशाला बनाना चाहते थे. इसके पीछे यह कारण था कि गौशाला बनने से यह जमीन रामधनी यादव के कथित "कब्जे" से मुक्त हो जाएगी. बीते शुक्रवार को उन्होंने धार्मिक न्यास बोर्ड के चेयरमैन रणवीर नंदन से मुलाकात की थी. उन्होंने मठ के महंत प्रेमानंद गिरी को भी इसकी सूचना नहीं दी थी. प्रेमानंद गिरी को जब राजकुमार गुड्डू के इरादे की जानकारी मिली तो उन्होंने राजकुमार गुड्डू को मिलने बुलाया, लेकिन वे नहीं आ पाए. इसी दौरान यह घटना भी हुई. 

प्रेमानंद गिरी कहते हैं कि यह पूरी संपत्ति मठ की है. रामधनी को यह इसलिए दी गई थी कि कोई और वहां देखभाल नहीं करता था. रामधनी का घर मठ की जमीन के सामने था. लोग उससे डरते भी थे. इसलिए उसे यह जमीन दी गई थी. रामधनी यादव को लगा कि यह जमीन भी उससे छीन जाएगी. गुड्डू से उसकी अदावत पुरानी ही थी. लेकिन इस जमीन पर गौशाला बनाने की खबर ने इसे और हवा दी.

रामधनी यादव की बेटी प्रियंका ने NDTV से बातचीत में कहा, "मेरे पिता की दुश्मनी राजकुमार गुड्डू से थी. कार्यपालक पदाधिकारी उनको बचाने में मारे गए. अगर आग जल रही हो तो वहां से भागना चाहिए, बाकी स्टाफ भी भाग रहे थे. उनका राजकुमार गुड्डू से क्या ताल्लुक था, हम नहीं जानते. राजकुमार गुड्डू ने मेरे पिता की हत्या करवाने की कोशिश की थी. उन दोनों की अदावत थी. कार्यपालक पदाधिकारी को बीच में नहीं आना चाहिए था.

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