- बिहार के अररिया जिले में एक शिक्षिका ने जलभराव में बच्चों से बेंच उठवाकर खुद स्कूल भवन तक पहुंचने को कहा.
- शिक्षिका अफसाना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, जिसमें बच्चे पानी में बेंच रखते हुए दिखाई दे रहे हैं.
- विद्यालय की प्रधानाध्यापिका ने कहा कि शिक्षिका को एलर्जी है इसलिए वह पानी में चल नहीं सकतीं.
एक शिक्षक के कंधों पर बच्चों का भविष्य संवारने की जिम्मेदारी होती है. लेकिन जब वहीं शिक्षक अपनी सुविधा के लिए मासूम बच्चों से ऐसा काम करवाने लगे, जो उनके अधिकारों और सुरक्षा पर सवाल खड़ा कर दे, तो शिक्षा व्यवस्था की तस्वीर खुद-ब-खुद सामने आ जाती है. मामला बिहार के अररिया जिले का है, जहां एक शिक्षिका का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है. वीडियो में देखा जा सकता है कि विद्यालय परिसर में जलभराव होने के कारण शिक्षिका ने छोटे-छोटे बच्चों से बेंच उठवाकर पानी में रखवाईं और फिर उन्हीं बेंचों के सहारे खुद स्कूल भवन तक पहुंचीं. आरोप है कि बच्चों से यह काम एक से अधिक बार कराया गया.
स्थानीय लोगों ने सोशल मीडिया पर शेयर किया वीडियो
वायरल वीडियो में बच्चे पानी के बीच बेंच रखते नजर आ रहे हैं, जबकि शिक्षिका आराम से उन बेंचों पर चलकर आगे बढ़ती दिखाई दे रही हैं. शिक्षिका की पहचान अफसाना परवीन, विशिष्ट शिक्षिका, प्राथमिक विद्यालय खजूरबाड़ी, वार्ड संख्या-10 के रूप में हुई है. बताया जा रहा है कि किसी ग्रामीण ने इस पूरी घटना का वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर साझा कर दिया, जिसके बाद मामला चर्चा का विषय बन गया. वीडियो सामने आते ही लोगों में नाराजगी बढ़ गई और शिक्षिका के खिलाफ कार्रवाई की मांग उठने लगी. अभिभावकों का कहना है कि वे अपने बच्चों को शिक्षा ग्रहण करने के लिए स्कूल भेजते हैं, न कि शिक्षकों की सुविधा के लिए इस तरह के काम करने के लिए.
हालांकि, मामले पर विद्यालय की प्रधानाध्यापिका नीलिमा पाठक ने सफाई देते हुए कहा कि अफसाना परवीन को एलर्जी की समस्या है और वह पानी में चल नहीं सकती हैं. उन्होंने यह भी बताया कि विद्यालय परिसर में लंबे समय से जलभराव की समस्या बनी हुई है, जिसकी शिकायत कई बार संबंधित विभाग को भेजी जा चुकी है, लेकिन अब तक समाधान नहीं हो सका है.
DEO ने 24 घंटे में मांगा स्पष्टीकरण
उधर, वीडियो वायरल होने के बाद शिक्षा विभाग हरकत में आ गया है. जिला शिक्षा पदाधिकारी (DEO) ने शिक्षिका से 24 घंटे के भीतर पूरे मामले पर स्पष्टीकरण मांगा है. अब सभी की नजर इस बात पर है कि जांच के बाद विभाग क्या कार्रवाई करता है. यह घटना एक बड़ा सवाल भी खड़ा करती है—क्या शिक्षकों की सुविधा के लिए बच्चों से इस तरह का कार्य कराना उचित है, या फिर यह बच्चों के अधिकारों और शिक्षा की गरिमा के साथ खिलवाड़ है?
ये भी पढ़ें : इसरो की कहानी: साइकिल-बैलगाड़ी से लेकर चंद्रयान-3 और 'विक्रम-1' तक, अंतरिक्ष में कैसे बना भारत का दबदबा
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं