ग्रामीण पंचायत टैक्स (Gram Panchayat Tax) किसी गांव के ग्राम पंचायत द्वारा अपने अधिकार क्षेत्र में आने वाले लोगों के मकानों और व्यवसायों पर लगाया जाता है. भारतीय संविधान के 73वें संशोधन के तहत ग्राम पंचायतों को स्व-शासन की इकाई माना गया है. ऐसे में राज्य सरकार को ग्रामीण पंचायत टैक्स वसूलने की शक्तियां मिलती है. इसके तहत होल्डिंग टैक्स, प्रॉपर्टी टैक्स, व्यावसायिक टैक्स, सफाई टैक्स, पानी पर टैक्स वसूलती है. राज्य सरकार ग्राम पंचायतों के विकास के लिए यह टैक्स लगाई जाती है.
हाल ही में बिहार सरकार ने ग्रामीण पंचायत टैक्स मंजूरी दी है. सरकार ने ग्राम पंचायतों को आत्मनिर्भर और आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के लिए ग्राम पंचायत टैक्स दर और शुल्क नियमावली-2026 को मंजूरी दी है. इसके तहत ग्रामीण इलाकों में सालाना मकानों और व्यावसायिक समेत सार्वजनिक सुविधाओं पर सालाना टैक्स वसूल किया जाएगा.
मकानों पर होल्डिंग टैक्स की दरें
पक्के मकान में रहने वाले लोगों से सालाना 100 रुपये का शुल्क लिया जाएगा.
आधे पक्के मकान से सालाना 50 रुपये टैक्स के रूप में शुल्क लिया जाएगा.
जबकि मिट्टी या कच्चे मकानों किसी तरह का टैक्स नहीं वसूल किया जाएगा.
प्रधानमंत्री आवास और इंदिरा आवास के लाभार्थियों से सालाना 25 रुपये शुल्क लिया जाएगा. जिसका भुगतान संबंधित सरकारी विभाग द्वारा किया जाएगा.
व्यावसायिक प्रतिष्ठानों और अन्य सेवाओं पर भी वसूला जाएगा टैक्स
मकानों के अलावा गांवों में मौजूद विभिन्न व्यावसायिक स्थलों और सार्वजनिक सुविधाओं पर भी सालाना 100 रुपये से लेकर 5,000 रुपये तक का कर लगाया जा सकेगा.
बड़े व्यावसायिक प्रतिष्ठान: होटल, विवाह भवन, पेट्रोल पंप, गैस एजेंसी और सिनेमा हॉल से टैक्स लिया जाएगा.
बाजार और पड़ाव: हाट-बाजार, मेले, दुकानों, बस पड़ाव, टेंपो स्टैंड और पशु मेलों पर भी निर्धारित शुल्क लागू होगा.
सार्वजनिक सुविधाएंः पंचायतें गांवों में पेयजल आपूर्ति, कचरा उठाव (वेस्ट मैनेजमेंट) और सार्वजनिक शौचालय जैसी सेवाओं के लिए भी शुल्क वसूल सकेंगी.
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