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आनंद मोहन ने जेडीयू कार्यकर्ताओं को बगावत के लिए उकसाया, बोले- 'नीतीश से गन प्वाइंट पर लिया इस्तीफा'

आनंद मोहन ने फिर आरोप लगाया है कि नीतीश कुमार को अपमानित किया गया और इसके खिलाफ जेडीयू कार्यकर्ताओं को बगावत करनी चाहिए.

आनंद मोहन ने जेडीयू कार्यकर्ताओं को बगावत के लिए उकसाया, बोले- 'नीतीश से गन प्वाइंट पर लिया इस्तीफा'
आनंद मोहन ने मुजफ्फरपुर में एक सभा में अपनी पार्टी के नेताओं पर आरोप लगाए
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जनता दल यूनाइटेड के पूर्व  सांसद आनंद मोहन बिहार में नीतीश कुमार की जगह सम्राट चौधरी को मुख्यमंत्री बनाने और सत्ता का नेतृत्व बीजेपी को सौंपे जाने के बाद से लगातार आक्रामक बयान दे रहे हैं. एक बार फिर अब उनके नए बयान की चर्चा हो रही है. आनंद मोहन ने मुजफ्फरपुर में एक विवादित राजनीतिक बयान देकर राजनीतिक गलियांरो में भूचाल ला दिया है. उन्होंने कहा है कि नीतीश कुमार से गन प्वाइंट पर इस्तीफा लिया गया था. इस बयान ने न केवल सत्ता और विपक्ष के बीच सियासी तल्खी बढ़ा दी है, बल्कि बिहार की हालिया राजनीतिक घटनाओं को लेकर भी कई सवाल खड़े कर दिए हैं. 

"लोग कहते हैं कि नीतीश कुमार से गन प्वाइंट पर इस्तीफा लिया गया."

अचानक नीतीश कुमार को क्यों हटाया?

मुजफ्फरपुर में आयोजित एक जनसभा को संबोधित करते हुए आनंद मोहन ने दावा किया कि पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से गन प्वाइंट पर इस्तीफा लिया गया था. उन्होंने कहा, "तुमने कहा था 25 से 30, फिर से नीतीश. फिर ऐसी क्या परिस्थिति हो गई कि अचानक नीतीश कुमार को हटाया गया? लोग कहते हैं कि नीतीश कुमार से गन प्वाइंट पर इस्तीफा लिया गया."

 कि कभी नीतीश के यहां दरबार लगता था आज उसी नीतीश कुमार को दरबारी बना दिया गया. आनंद मोहन ने अपने संबोधन में बिना किसी का नाम लिए इशारों-इशारों में कई राजनीतिक हस्तियों पर निशाना साधा. उन्होंने कहा कि जिन लोगों को कभी बेईमान और "चिरकुट नेता" कहा जाता था, आज उन्हीं के दरवाजे पर बड़े नेताओं को जाना पड़ रहा है. 

जेडीयू कार्यकर्ताओं से बगावत की अपील

आनंद मोहन ने जेडीयू कार्यकर्ताओं से बगावत करने की अपील की. उन्होंने कहा,"ये हमारे नेता का अपमान है. ये नीतीश कुमार जैसे स्थापित नेता की अवमानना है. इसलिए जेडीयू के कार्यकर्ताओं से मैं कहूंगा कि इस सबके खिलाफ बगावत करो. इस सबके खिलाफ आवाज उठाओ."

उनके इस तंज को राजनीतिक पर्यवेक्षक बिहार की बदलती सत्ता संरचना और गठबंधन राजनीति से जोड़कर देख रहे हैं.आनंद मोहन का यह बयान ऐसे समय में आया है जब राज्य में राजनीतिक समीकरणों को लेकर लगातार चर्चाएं चल रही हैं. उन्होंने यह भी संकेत दिया कि बिहार की राजनीति में कई महत्वपूर्ण फैसले स्वेच्छा से नहीं, बल्कि दबाव और परिस्थितियों के प्रभाव में लिए गए. 

वही राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह बयान केवल एक राजनीतिक टिप्पणी नहीं, बल्कि सत्ता के भीतर और बाहर चल रही खींचतान का संकेत भी हो सकता है. बिहार में गठबंधन राजनीति के दौर में ऐसे आरोप अक्सर नए विवादों और जवाबी हमलों की वजह बनते रहे हैं. 

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