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This Article is From Oct 20, 2025

मोटे अनाज की खेती... जीटी रोड से करीबी... बाराचट्टी में इस बार लहराया NDA का परचम

साल 2020 में बाराचट्टी सीट पर कुल वोटर्स की संख्या करीब 2,94,094 थी. साल 2020 में यहां पर वोटिंग परसेंटेज करीब 62.87 फीसदी था.

मोटे अनाज की खेती... जीटी रोड से करीबी... बाराचट्टी में इस बार लहराया NDA का परचम
  • बाराचट्टी विधानसभा सीट मगध क्षेत्र के गया जिले में स्थित है और यह अनुसूचित जाति आरक्षित सीट है.
  • बाराचट्टी झारखंड के करीब है और कठोर लैटराइट मिट्टी वाली जमीन को जो मोटे अनाज की खेती के लिए उपयुक्त है.
  • आबादी में 35 प्रतिशत से अधिक अनुसूचित जनजाति शामिल हैं, जिनमें चमड़ा काम करने वाले और मुसहर समुदाय प्रमुख हैं.
पटना:

बाराचट्टी विधानसभा सीट मगध क्षेत्र के गया जिले का एक ब्‍लॉक है. यह सीट एससी (अनुसूचित जाति) आरक्षित सीट है. यह सीट लोकसभा के लिए गया (लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र) (SC) का हिस्सा है. बाराचट्टी जिला मुख्यालय से करीब 45 किमी दक्षिण और राज्य की राजधानी पटना से करीब 150 किमी दूर स्थित है. जिले-वाले भाग के तौर पर यह ग्रामीण-प्राथमिकता वाला क्षेत्र है, जिसमें करीब 34 फीसदी एससी आबादी है. साथ ही यादव, मुस्लिम, राजपूत जैसे अन्य समुदाय भी मतदाताओं में महत्वपूर्ण हैं. बाराचट्टी में 11 नवंबर को वोट डाले गए थे.  यहां पर हिन्‍दुस्‍तानी आवाम मोर्चा (सेक्‍युलर) जो जीतन राम मांझी की पार्टी है, की ज्‍योति देवी ने जीत हासिल कर ली है. यह दल NDA का हिस्‍सा है और ज्‍योति देवी को राष्‍ट्रीय जनता दल (आरजेडी) की तनुश्री कुमारी को 8893 वोट्स से हराया. 

झारखंड बॉर्डर के करीब 

बाराचट्टी ग्रैंड ट्रंक रोड (जीटी रोड)  के चलते ठीक‑ठाक सड़क कनेक्टिविटी है. झारखंड बॉर्डर से इसकी दूरी सिर्फ 25 किमी है. साथ ही यहां पर छोटा नागपुर पठार और गंगीय मैदान के संधि‑क्षेत्र में पड़ने वाली इसकी कठोर, पथरीली भूमि लैटराइट मिट्टी से ढकी है. ऐसे में यहां पर सिर्फ मोटे अनाज की ही खेती हो सकती है. लोक‑कथाओं पर अगर यकीन करें तो इन चट्टानी पहाड़ियों को 'भीम का खेल‑मैदान' भी कहा गया है. लेकिन इस बात का कोई एतिहासिक प्रमाण मौजूद नहीं है. 

क्‍या है जाति गणित 

बाराचट्टी के वोटर्स में 35 फीसदी से ज्‍यादा वोटर्स अनुसूचित जनजाति के हैं और क्षेत्र में अभी तक विकास नहीं हो सका है. बदहाली के चलते अनेक परिवारों के लिए शिक्षा प्राथमिकता नहीं, बच्चों को काम पर लगाकर रोजमर्रा की आमदनी जुटाना ज्यादा जरूरी होता है. यहां की एससी आबादी में करीब 55‑60 फीसदी लोग चमड़े का काम करने वाले, 30‑35 फीसदी ‘दुसाध' यानी दिहाड़ी मजदूर या सीमांत किसान और और 5 से 8 फीसदी ‘मुसहर' हैं.  

फ्री राशन से बढ़ी बीजेपी की लोकप्रियता 

मुसहर को समाज का सबसे वंचित वर्ग माना जाता है. ‘मुसहर' यानी वो समुदाय जो चूहा खाता है. बाराचट्टी में कोविड‑19 दौरान में शुरू हुई केंद्र सरकार की मुफ्त राशन योजना ने मुसहर समुदाय में बीजेपी के लिए सकारात्मक सोच को बढ़ाया है. कहा गया था कि उन्होंने अपनी जिंदगी में पहली बार रोजाना दो वक्‍त का भोजन पाया था.  माना जा रहा है कि 2025 के विधानसभा चुनावों में यह समुदाय निर्णायक भूमिका निभा सकता है.

कैसा था 2020 का चुनावी गणित 

साल 2020 में बाराचट्टी सीट पर कुल वोटर्स की संख्या करीब 2,94,094 थी. साल 2020 में यहां पर वोटिंग परसेंटेज करीब 62.87 फीसदी था. इस सीट पर जीतन राम मांझी की पार्टी हिंदुस्‍तानी आवाम मोर्चा (सेक्युलर) – HAM(S) की  ज्योति देवी को जीत मिली थी. उन्हें  करीब 72,491 वोट हासिल किए थे. उनका वोट-शेयर करीब 39.21 फीसदी था. दूसरे स्थान पर राष्‍ट्रीय जनता दल (आरजेडी) की समता देवी थीं और उन्‍हें करीब 66,173 वोट मिले और उनका वोट शेयर 35.79 फीसदी था. ऐसे में अगर कहा जाए कि यहां मुकाबला अपेक्षाकृत कड़ा था यानी वोट-शेयर में विजेता और दूसरे की हार के बीच अंतर बहुत ज्‍यादा नहीं था. 

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