- पटना में छात्र संगठनों ने एसआईआर के विरोध और चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग को लेकर मार्च किया
- छात्रों ने पुलिस बैरिकेड तोड़कर आगे बढ़ने का प्रयास किया, जिससे पुलिस और छात्रों के बीच कहासुनी हुई
- पुलिस प्रदर्शनकारियों को पीछे हटाकर स्थिति नियंत्रण में लाई और कुछ छात्रों को हिरासत में भी लिया
बिहार की राजधानी पटना में मंगलवार को ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (आईसा) सहित अन्य संगठनों के लोक भवन मार्च के दौरान जमकर हंगामा हुआ. विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के विरोध और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर सड़क पर उतरे छात्रों ने जेपी गोलंबर पर पुलिस बैरिकेड तोड़ दिया और आगे बढ़ने की कोशिश की. इस दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच तनाव की स्थिति बनी रही.
पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को पीछे धकेलकर स्थिति नियंत्रित करने का प्रयास किया. कुछ प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिए जाने की भी जानकारी सामने आई है. जानकारी के अनुसार, आईसा से जुड़े छात्र मंगलवार को पटना के गांधी मैदान स्थित गेट नंबर 10 पर एकत्र हुए थे. यहां से उन्हें लोक भवन की ओर मार्च करना था. हालांकि, प्रदर्शन को देखते हुए इलाके में बड़ी संख्या में पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई थी. छात्रों को काफी देर तक आगे बढ़ने से रोका गया.
#WATCH पटना, बिहार: AISA कार्यकर्ताओं ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर गांधी मैदान में विरोध प्रदर्शन किया। https://t.co/Micp6xf0LY
— ANI_HindiNews (@AHindinews) October 13, 2026
इसके बाद राम गुलाम चौक से जेपी गोलंबर जाने वाली सड़क पर भी आवागमन बंद कर दिया गया और गोलंबर के पास बैरिकेडिंग कर दी गई. प्रदर्शनकारी छात्रों ने पुलिस की रोक के बावजूद आगे बढ़ने की कोशिश की. इस दौरान उन्होंने बैरिकेड गिरा दिया और डाकबंगला की ओर बढ़ने लगे. पुलिस ने उन्हें रोकने के लिए कार्रवाई की और प्रदर्शनकारियों को पीछे धकेला. पूरे घटनाक्रम के दौरान सड़क पर अफरातफरी की स्थिति बनी रही. छात्रों ने जमकर नारेबाजी की और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विरोध जताया.
प्रदर्शन में शामिल छात्रों के हाथों में तख्तियां थीं, जिन पर ज्ञानेश कुमार और सरकार के विरोध में नारे लिखे गए थे. प्रदर्शनकारियों ने एसआईआर की प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग की. मार्च को लोक भवन तक पहुंचने से रोकने के लिए पुलिस ने सुरक्षा व्यवस्था कड़ी रखी. इस बीच, पटना जिला प्रशासन ने प्रदर्शन को लेकर पहले ही दिशा-निर्देश जारी किए थे. जिलाधिकारी और वरीय पुलिस अधीक्षक की ओर से जारी निर्देश में कहा गया था कि धरना-प्रदर्शन के लिए गर्दनीबाग स्थित निर्धारित स्थल का ही उपयोग किया जाए.

प्रशासन के मुताबिक, बिना पूर्व सूचना या अनुमति के अन्य स्थानों पर प्रदर्शन करने से यातायात व्यवस्था प्रभावित होती है और आम नागरिकों को परेशानी का सामना करना पड़ता है. प्रशासन ने यह भी कहा था कि ऐसे प्रदर्शनों से स्कूल, कॉलेज, अस्पताल और न्यायालय सहित महत्वपूर्ण संस्थानों के कामकाज पर असर पड़ता है. बुजुर्गों, बीमार व्यक्तियों, स्कूली बच्चों और एंबुलेंस जैसी आपातकालीन सेवाओं के आवागमन में भी बाधा उत्पन्न हो सकती है.
जिला प्रशासन ने सभी संगठनों से शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से अपनी मांगें रखने के लिए निर्धारित धरना स्थल का इस्तेमाल करने की अपील की थी. साथ ही, निर्देशों का उल्लंघन कर अन्य स्थानों पर प्रदर्शन करने वालों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की चेतावनी भी दी थी.
इसे भी पढ़ें: सुप्रीम कोर्ट में क्यों लिस्टेड नहीं हुई विपक्ष की ज्ञानेश कुमार के खिलाफ याचिका? प्वाइंट्स में जानें 14 खामियां और मांगें
इसे भी पढ़ें: सुप्रीम कोर्ट में सीईसी के खिलाफ प्रदर्शन से जुड़े मामले की सुनवाई 15 अक्टूबर तक टली
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं