गोपालगंज में एक हैरान कर देने वाली खबर सामने आई है. यहां सदर अस्पताल में बुधवार (22 अप्रैल) की शाम सड़क दुर्घटना में घायल दो लोगों को भर्ती कराया गया था. दोनों घायलों का इलाज शुरू कर दिया गया. वहीं एक घायल को बेहतर इलाज के लिए गोरखपुर के लिए रेफर कर दिया गया. जबकि आरोप है कि इलाज के दौरान दूसरे मरीज की मौत की पुष्टि की गई. पुष्टि किसी और ने नहीं बल्कि ड्यूटी पर तैनात डाक्टर और अस्पताल कर्मियों ने की. इसके बाद मृतक को पिकअप पर रख दिया गया और उसे पोस्टमार्टम रूम ले जाने के लिए औपचारिकता पूरी की जाने लगी. लेकिन इसी दौरान एक महिला सफाई कर्मी ने देखा कि जिस घायल को मृत घोषित कर पिकअप पर रखा गया है. उसके शरीर में कुछ हरकत हो रही है. फिर महिला सफाई कर्मी ने चिल्ला चिल्लाकर परिजनों को इसकी सूचना दी.
मृतक के परिजनों ने जब डेड बॉडी को टच किया तो उसकी धड़कने चल रही थी. परिजन पिकअप से उतार कर दोबारा उसे इमरजेंसी वार्ड में भर्ती कराया. यहां पर उसका दोबारा इलाज शुरू किया गया. लेकिन इलाज के थोड़ी देर बाद ही उसकी फिर से मौत हो गई.
कार से हुआ था दो लोगों का एक्सीडेंट
दरअसल बुधवार को कुचायकोट के जलालपुर के रहने वाले साले और बहनोई अपने निजी काम से मांझागढ़ के कोइनी बाइक से गए थे. वहां से वापस लौटने के दौरान दिल्ली रजिस्ट्रेशन नंबर की वैगन आर कार से इन दोनों लोगों का एक्सीडेंट हो गया. घायलों में एक का नाम ओमप्रकाश गुप्ता है. जबकि दूसरे घायल का नाम राजकुमार गुप्ता है.

ओमप्रकाश को रेफर करने के बाद राजकुमार को मृत घोषित किया गया
घायल ओमप्रकाश गुप्ता के दोस्त मुसाफिर यादव ने बताया कि दोनों घायलों को सदर अपस्ताल के इमरजेंसी वार्ड में भर्ती कराया गया. जिसमें ड्यूटी पर तैनात चिकित्सक ने ओमप्रकाश गुप्ता को गोरखपुर के लिए रेफर कर दिया गया. जबकि दूसरे मरीज राजकुमार को मृत घोषित कर दिया गया. मुसाफिर यादव ने बताया कि इलाज के थोड़ी देर बाद ही घायल राजकुमार को मृत घोषित कर दिया गए था. तब उसे पिकअप पर लादकर पोस्टमार्टम रूम ले जाने की तैयारी शुरू कर दी गई थी. वह करीब एक घंटे तक पिकअप पर मृत पड़ा रहा. इस दौरान सदर अस्पताल में काम कर रही एक नर्स सह सफाई कर्मी गायत्री देवी की नजर पिकअप पर रखे शव पर पड़ी. तो उसने बताया कि डेड बॉडी में हलचल लग रही थी. शव झटका दे रहा था.
सफाई कर्मी सह नर्स ने देखा बॉडी में हरकत
सफाई कर्मी सह नर्स गायत्री देवी ने बताया कि बॉडी में हरकत देखकर चिल्ला उठी और आसपास के लोगों को बुलाने लगी. तभी परिजन भी मौके पर पहुंचे तो बॉडी छूकर देख तो धड़कन चल रही थी. परिजनों का आरोप है कि स्वास्थ्यकर्मियों को लापरवाही से उनका मरीज एक घंटे तक ऐसे ही बिना इलाज के मृत समझकर पिकअप पर पड़ा रहा. फिर दोबारा मृतक को इमरजेंसी वार्ड में लाया गया. यहां उसका इलाज शुरू किया गया. लेकिन इलाज के थोड़ी देर बाद उसकी दोबारा मौत हो गई.
हालांकि इस मामले में जब ड्यूटी पर तैनात डॉक्टरों से बात करने की कोशिश की गई तो वे उपलब्ध नहीं हो सके. परिजन स्वास्थ्य विभाग पर लापरवाही का आरोप लगा रहे है.
बहरहाल यह घटना स्वास्थ्य विभाग पर सवाल खड़े करती है कि क्या मरीज को बिना पूरी देखे ही मृत घोषित किया जा रहा है. या फिर अंतिम सांस तक मरीज को बेड पर रखा नहीं जा रहा है. अगर ऐसा है तो यह इंसानियत को शर्मसार करने वाली घटना है.
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