लेफ्टिनेंट कर्नाल निरंजन कुमार के नाम पर बेंगलुरु में सड़क का नामकरण किया जा रहा है.
बेंगलुरु:
लेफ्टिनेंट कर्नल ईके निरंजन को मरणोपरांत शौर्य चक्र से नवाज़ा गया है. अब बेंगलुरु में उनके नाम पर जल्द ही एक सड़क का नाम रखा जाएगा. बृहत बेंगलुरु महानगर पालिका के आयुक्त एम मंजुनाथ ने बताया कि शहीद लेफ्टिनेंट कर्नल निरंजन के नाम पर एक सड़क के नामकरण की प्रक्रिया काफी पहले शुरू की गई थी. अगले 15 दिनों के अंदर उनके घर के नज़दीक की एक सड़क का नाम बदलकर शहीद लेफ्टिनेंट कर्नल निरंजन रोड कर दिया जाएगा.
जनवरी 2016 में पठानकोट एयरबेस पर आतंकी हमले में एनएसजी कमांडो लेफ्टिनेंट कर्नल निरंजन उस वक्त शहीद हो गए जब वे एक ग्रेनेड को निष्क्रिय करने की कोशिश कर रहे थे. ग्रेनेड में विस्फोट हो गया था.
हालांकि सड़क का नामकरण करने में हो रही देरी से उनके दोस्त काफी निराश हैं. शहीद लेफ्टिनेंट कर्नल निरंजन के बचपन के दोस्त शशांक का कहना है कि वे लगातार सरकारी दफ्तरों के चक्कर पिछले एक साल से लगा रहे हैं ताकि उनके दोस्त के नाम से सड़क बनाई जाए जो कि युवाओं को प्रेरित कर सके.
हाल ही में बेंगलुरु में अतिक्रमण के खिलाफ मुहिम चलाई गई थी ताकि पानी निकालने का रास्ता निकाला जा सके. इसकी ज़द में शहीद लेफ्टिनेंट कर्नल निरंजन के घर का हिस्सा भी आया.जब इस पर काफी हंगामा मचा तो सरकार ने बीच का रास्ता निकाला और इस परिवार को छूट दी कि वह जरूरी अतिक्रमण वाले चिन्हित हिस्से को खुद ही तोड़ दें. इससे बुलडोज़र चलाने की जरूरत नही पड़ेगी. इस परिवार ने ऐसा ही किया.
इससे पहले हरियाणा सरकार ने पिछले साल एनएसजी के ऑडिटोरियम को शहीद निरंजन का नाम दिया और केरल सरकार ने एक स्कूल का नाम शहीद निरंजन के नाम पर रखा.
जनवरी 2016 में पठानकोट एयरबेस पर आतंकी हमले में एनएसजी कमांडो लेफ्टिनेंट कर्नल निरंजन उस वक्त शहीद हो गए जब वे एक ग्रेनेड को निष्क्रिय करने की कोशिश कर रहे थे. ग्रेनेड में विस्फोट हो गया था.
हालांकि सड़क का नामकरण करने में हो रही देरी से उनके दोस्त काफी निराश हैं. शहीद लेफ्टिनेंट कर्नल निरंजन के बचपन के दोस्त शशांक का कहना है कि वे लगातार सरकारी दफ्तरों के चक्कर पिछले एक साल से लगा रहे हैं ताकि उनके दोस्त के नाम से सड़क बनाई जाए जो कि युवाओं को प्रेरित कर सके.
हाल ही में बेंगलुरु में अतिक्रमण के खिलाफ मुहिम चलाई गई थी ताकि पानी निकालने का रास्ता निकाला जा सके. इसकी ज़द में शहीद लेफ्टिनेंट कर्नल निरंजन के घर का हिस्सा भी आया.जब इस पर काफी हंगामा मचा तो सरकार ने बीच का रास्ता निकाला और इस परिवार को छूट दी कि वह जरूरी अतिक्रमण वाले चिन्हित हिस्से को खुद ही तोड़ दें. इससे बुलडोज़र चलाने की जरूरत नही पड़ेगी. इस परिवार ने ऐसा ही किया.
इससे पहले हरियाणा सरकार ने पिछले साल एनएसजी के ऑडिटोरियम को शहीद निरंजन का नाम दिया और केरल सरकार ने एक स्कूल का नाम शहीद निरंजन के नाम पर रखा.
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