भारत ने EV कार बिक्री के मामले में एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है. अब भारत ने EV कारों की बिक्री में अमेरिका को पीछे छोड़ दिया है. यानी भारत में बिकने वाली नई कारों में इलेक्ट्रिक कारों का प्रतिशत अब अमेरिका से ज्यादा हो गया है. यह बदलाव सिर्फ ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री के लिए ही नहीं, बल्कि भारत की ग्रीन एनर्जी और भविष्य की मोबिलिटी के लिए भी काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है.

EV कारों की बढ़ती लोकप्रियता
पिछले कुछ वर्षों में भारत में इलेक्ट्रिक कारों की मांग लगातार बढ़ी है. पहले लोग EV कारों को महंगा और सीमित विकल्प वाला मानते थे, लेकिन अब स्थिति बदल रही है. Tata, MG, Mahindra और कई अन्य कंपनियों ने बेहतर रेंज, मॉडर्न फीचर्स और कम कीमतों वाली EV कारें बाजार में उतारी हैं. इससे ग्राहकों का भरोसा बढ़ा है और लोग धीरे-धीरे पेट्रोल-डीजल कारों की बजाय इलेक्ट्रिक गाड़ियों की तरफ बढ़ रहे हैं.
नई कार बिक्री के आंकड़ों के अनुसार, भारत में EV कारों की हिस्सेदारी तेजी से ऊपर गई है. जनवरी 2026 में यह करीब 3.6 प्रतिशत थी, फरवरी में 4.4 प्रतिशत तक पहुंची, मार्च में 5.1 प्रतिशत हुई और अप्रैल 2026 में यह बढ़कर 5.8 प्रतिशत हो गई. वहीं, अमेरिका में इसी अवधि के दौरान EV हिस्सेदारी लगभग 5.6 प्रतिशत तक रही. यानी अप्रैल में भारत ने अमेरिका को थोड़ा पीछे छोड़ दिया.
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ईंधन की बढ़ती कीमतों का असर
भारत में पेट्रोल और डीजल की बढ़ती कीमतें भी EV कारों की बिक्री बढ़ाने की एक बड़ी वजह बन रही हैं. जैसे-जैसे ईंधन महंगा हो रहा है, लोग कम रनिंग कॉस्ट वाली गाड़ियों की तरफ देख रहे हैं. इलेक्ट्रिक कारें लंबे समय में काफी सस्ती पड़ सकती हैं क्योंकि इनमें पेट्रोल या डीजल भरवाने की जरूरत नहीं होती और मेंटेनेंस खर्च भी कम हो सकता है.
यही कारण है कि मई 2026 तक भारत में EV कारों की हिस्सेदारी 6 प्रतिशत से ऊपर जाने की बात सामने आ रही है. अगर यह ट्रेंड जारी रहा, तो भारत EV अपनाने वाले बड़े बाजारों में और मजबूत स्थिति बना सकता है.

भारत की तेज ग्रोथ बनाम अमेरिका की धीमी रफ्तार
भारत में EV अपनाने की रफ्तार लगातार स्थिर रूप से बढ़ती दिख रही है. चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर बेहतर हो रहा है, सरकारी योजनाएं मदद कर रही हैं और कंपनियां नए मॉडल लॉन्च कर रही हैं. दूसरी तरफ अमेरिका में EV बाजार अभी भी बड़ा है, लेकिन हाल के महीनों में इसकी ग्रोथ थोड़ी धीमी दिखाई दी है.
इस तुलना में सबसे खास बात यह है कि भारत में EV कारों का ग्राफ लगातार ऊपर गया, जबकि अमेरिका में कुछ नरमी देखी गई. इसी वजह से अप्रैल 2026 में भारत आगे निकल गया.
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ऑटो सेक्टर और पर्यावरण के लिए बड़ा संकेत
भारत का EV बिक्री में आगे निकलना यह दिखाता है कि देश साफ ऊर्जा और टिकाऊ परिवहन की दिशा में तेजी से बढ़ रहा है. इलेक्ट्रिक कारों के बढ़ने से प्रदूषण कम करने, तेल पर निर्भरता घटाने और भविष्य की स्मार्ट मोबिलिटी को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है.
हालांकि अभी EV बाजार कुल कार बिक्री का छोटा हिस्सा है, लेकिन इसकी ग्रोथ यह संकेत देती है कि आने वाले वर्षों में भारत इलेक्ट्रिक वाहन बाजार में वैश्विक स्तर पर और मजबूत खिलाड़ी बन सकता है.
आगे क्या हो सकता है?
अगर ईंधन की कीमतें ऊंची बनी रहीं, बैटरी टेक्नोलॉजी बेहतर हुई और चार्जिंग नेटवर्क तेजी से फैला, तो भारत में EV कारों की मांग और बढ़ सकती है. भविष्य में अधिक लोग पेट्रोल कारों से EV की ओर शिफ्ट हो सकते हैं. भारत का अमेरिका को पीछे छोड़ना सिर्फ एक आंकड़ा नहीं, बल्कि बदलती ऑटोमोबाइल सोच का संकेत है.