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Honda को 60 साल में पहली बार भारी घाटा, जानिए कितना हुआ नुकसान और अब कैसी कारें बनाने का है प्‍लान

Honda Faces Loss First Time: केवल होंडा ही नहीं, बल्कि टोयोटा और निसान जैसी अन्य जापानी कंपनियां भी इस समय वैश्विक दबाव का सामना कर रही हैं.

Honda को 60 साल में पहली बार भारी घाटा, जानिए कितना हुआ नुकसान और अब कैसी कारें बनाने का है प्‍लान
Honda Big Loss: होंडा को पहली बार हुआ नुकसान

जापान की दूसरी सबसे बड़ी कार मेकर कंपनी होंडा (Honda) को बड़ा झटका लगा है. 1957 के बाद पहली बार कंपनी घाटे में है. इस वित्त वर्ष होंडा को बड़ा ऑपरेटिंग लॉस हुआ है. 1957 के बाद पहली बार कंपनी को ये घाटा हुआ है, जब होंडा ने 1960 के दशक की शुरुआत में बड़े पैमाने पर कारों की बिक्री शुरू भी नहीं की थी. इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) की धीमी पड़ती रफ्तार और अमेरिकी बाजार में आए नीतिगत बदलावों को इस बड़े घाटे की प्रमुख वजह माना जा रहा है.

कितना हुआ नुकसान?

कंपनी की वित्तीय रिपोर्ट के मुताबिक, EV ऑपरेशन्स में आई भारी गिरावट के कारण होंडा को 413.4 बिलियन येन (लगभग 2.6 बिलियन डॉलर) का ऑपरेटिंग लॉस हुआ है. वहीं कंपनी का शुद्ध नुकसान (Net Loss) थोड़ा और अधिक यानी 423.9 बिलियन येन रहा. मार्च को समाप्त हुए वित्त वर्ष में होंडा ने दुनिया भर में 34 लाख कारें बेचीं, जो पिछले साल की 37 लाख यूनिट्स के मुकाबले कम हैं.

हालांकि, होंडा के पुराने और बेहद सफल मोटरसाइकिल बिजनेस ने इस घाटे को काफी हद तक संभाल लिया. इस दौरान कंपनी ने 2.21 करोड़ मोटरसाइकिलें बेचीं, जबकि पिछले साल यह आंकड़ा 2 करोड़ था. होंडा अपने बजट 'सुपर कब' (Super Cub) मॉडल्स के दम पर भारत सहित कई वैश्विक बाजारों में मजबूत पकड़ बनाए हुए है.

घाटे की मुख्य वजहें

  • अमेरिकी नीति में बदलाव: होंडा ने कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प प्रशासन की नीतियों के कारण उसके सबसे बड़े बाजार में रणनीति प्रभावित हुई. सितंबर 2025 में अमेरिका के 'बिग ब्यूटीफुल बिल' के तहत EV खरीदारों को मिलने वाली टैक्स छूट खत्म कर दी गई. इसके अलावा आयातित कारों और पार्ट्स पर लगे टैरिफ ने भी मुनाफे को चोट पहुंचाई.
  • चीन में बढ़ती प्रतिस्पर्धा: चीन और अन्य एशियाई देशों में चीनी कंपनियों के तेजी से उभरने के कारण होंडा के प्रोडक्ट्स की प्रतिस्पर्धात्मकता में कमी आई है.
  • वैश्विक संकट: मिडिल ईस्ट (पश्चिम एशिया) में जारी तनाव के कारण कच्चे तेल और ऊर्जा की कीमतों में अस्थिरता का असर भी ऑटो इंडस्ट्री पर पड़ा है.

आगे का प्लान: हाइब्रिड पर फोकस

बाजार में EV की घटती मांग को देखते हुए होंडा ने अपनी रणनीति में बड़ा बदलाव किया है. कंपनी ने पिछले महीने ही इलेक्ट्रॉनिक्स दिग्गज सोनी (Sony) के साथ दो इलेक्ट्रिक कारें बनाने का प्रोजेक्ट अचानक रद्द कर दिया था. अब कंपनी पूरी तरह इलेक्ट्रिक कारों के बजाय हाइब्रिड (Hybrid) मॉडल्स पर ध्यान दे रही है. होंडा के सीईओ तोशिहिरो मिबे ने स्पष्ट किया कि कंपनी कार्बन न्यूट्रैलिटी के लक्ष्य पर काम करती रहेगी, लेकिन अब पेट्रोल-डीजल और हाइब्रिड कारों को भी साथ लेकर आगे बढ़ेगी.

राहत की बात यह रही कि कंपनी ने 2026-27 में फिर से मुनाफे में लौटने का भरोसा जताया है, जिससे निवेशक परेशान नहीं हुए और गुरुवार को होंडा के शेयरों में 8% तक का उछाल देखा गया. केवल होंडा ही नहीं, बल्कि टोयोटा और निसान जैसी अन्य जापानी कंपनियां भी इस समय वैश्विक दबाव का सामना कर रही हैं.

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