आज के समय में अपनी पसंदीदा कार या बाइक खरीदने के लिए बैंक और फाइनेंस कंपनियां मिनटों में ऑटो लोन पास कर देती हैं. लेकिन कई बार जिंदगी में कुछ ऐसे आर्थिक उतार-चढ़ाव आते हैं, जिनकी वजह से समय पर EMI चुकाना मुश्किल हो जाता है. जैसे ही एक या दो EMI मिस होती है, बैंक की तरफ से फोन आने शुरू हो जाते हैं और मन में यह डर बैठ जाता है कि कहीं बैंक वाले आकर हमारी गाड़ी न उठा ले जाएं. अगर आप भी ऐसी किसी स्थिति से गुजर रहे हैं, तो आपको घबराने की बिल्कुल जरूरत नहीं है. रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ने लोन लेने वाले ग्राहकों को कई ऐसे अधिकार दिए हैं, जिनकी जानकारी होने पर आप अपनी गाड़ी को सीज होने से बचा सकते हैं.

अचानक गाड़ी नहीं उठा सकते बैंक वाले
कई लोगों को लगता है कि एक भी EMI बाउंस हुई तो बैंक के रिकवरी एजेंट घर के बाहर से गाड़ी उठाकर ले जाएंगे, लेकिन ऐसा बिल्कुल नहीं है. कानूनन कोई भी बैंक या फाइनेंस कंपनी अचानक से आपकी गाड़ी नहीं जब्त कर सकती. इसके लिए एक पूरी कानूनी प्रक्रिया होती है, जिसका पालन करना बैंक के लिए अनिवार्य है. यदि बैंक नियमों का उल्लंघन करता है, तो आप उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई कर सकते हैं.
RBI का 'फेयर प्रैक्टिस कोड' क्या है?
RBI ने लोन रिकवरी को लेकर बहुत कड़े नियम बनाए हैं, जिसे 'फेयर प्रैक्टिस कोड' (Fair Practice Code) कहा जाता है. इस नियम के तहत, जब आप लोन लेते हैं, तो लोन एग्रीमेंट में गाड़ी की जब्ती (Repossession) का पूरा प्रोसेस साफ-साफ लिखा होना चाहिए. बैंक को डिफॉल्ट की स्थिति में ग्राहक को पर्याप्त समय और नोटिस देना पड़ता है, ताकि वह अपने बकाया का भुगतान कर सके.
नोटिस मिलना है आपका कानूनी अधिकार
अगर आपकी EMI मिस होती है, तो बैंक सबसे पहले आपको एक लिखित नोटिस भेजेगा. आमतौर पर बैंक गाड़ी जब्त करने की कार्रवाई शुरू करने से पहले 60 दिनों का एक 'डिमांड नोटिस' जारी करता है. इस अवधि के दौरान ग्राहक को अपनी बात रखने और पैसे का इंतजाम करने का पूरा मौका मिलता है. अगर इस नोटिस के बाद भी आप भुगतान नहीं करते हैं, तो बैंक आपको एक और Final Notice देगा, जिसमें गाड़ी को सरेंडर करने के लिए कहा जाता है.
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दादागिरी या गाली-गलौज करने का हक नहीं
सोशल मीडिया पर अक्सर ऐसे वीडियो दिखते हैं जहां रिकवरी एजेंट ग्राहकों से बदतमीजी करते हैं, लेकिन RBI का नियम इस पर पूरी तरह पाबंदी लगाता है. किसी भी बैंक या उसके रिकवरी एजेंट को ग्राहक को धमकाने, गाली-गलौज करने, मानसिक रूप से प्रताड़ित करने या उसके घर पर जाकर दुर्व्यवहार करने का कोई अधिकार नहीं है. इतना ही नहीं, रिकवरी एजेंट सिर्फ सुबह 7 बजे से शाम 7 बजे के बीच ही आपसे संपर्क कर सकते हैं. रात के समय फोन करना या घर आना पूरी तरह गैर-कानूनी है.
मुसीबत के समय बैंक से खुद करें बात
अगर आपकी आर्थिक स्थिति सचमुच खराब है, तो डरकर भागने के बजाय सीधे अपने बैंक से संपर्क करें. आप बैंक के मैनेजर से मिलकर उन्हें अपनी समस्या बता सकते हैं और लोन को री-स्ट्रक्चर करने की मांग कर सकते हैं. बैंक आपकी सुविधा के अनुसार EMI की राशि को कम कर सकता है या आपको कुछ महीनों की मोहलत दे सकता है. याद रखें, सही जानकारी और सूझबूझ से आप किसी भी बड़ी परेशानी से बच सकते हैं.
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