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क्या Bank और NBFCs की ब्याज दर होगी एक जैसी? जानें RBI ने क्या उठाया बड़ा कदम

ड्राफ्ट में कहा गया है, सभी रेगुलेटेड संस्थाओं के लिए एक जैसा निर्देश जारी करने का प्रस्ताव है. इसमें फिक्स्ड रेट और फ्लोटिंग रेट वाले लोन पर ब्याज दर तय करने के लिए सिद्धांतों पर आधारित एक व्यापक फ्रेमवर्क बताया जाएगा

क्या Bank और NBFCs की ब्याज दर होगी एक जैसी? जानें RBI ने क्या उठाया बड़ा कदम
RBI Governor Sanjay Malhotra
IANS

रिज़र्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ने बुधवार (12 अगस्त) को बैंकों और नॉन-बैंकिंग फाइनेंस कंपनियों (NBFCs) की नीतियों में तालमेल बिठाने के लिए ब्याज दर तय करने के नियमों का ड्राफ्ट जारी किया. RBI के नोटिफिकेशन के अनुसार, अभी लोन पर ब्याज दरों से जुड़ा रेगुलेटरी फ्रेमवर्क सिर्फ कमर्शियल बैंकों पर लागू होता है, जबकि NBFCs मुख्य रूप से कामकाज से जुड़े नियमों के तहत आती हैं.

ड्राफ्ट में कहा गया है, सभी रेगुलेटेड संस्थाओं के लिए एक जैसा निर्देश जारी करने का प्रस्ताव है. इसमें फिक्स्ड रेट और फ्लोटिंग रेट वाले लोन पर ब्याज दर तय करने के लिए सिद्धांतों पर आधारित एक व्यापक फ्रेमवर्क बताया जाएगा, जो रेगुलेटेड संस्था के कामकाज की प्रकृति, जटिलता और पैमाने के हिसाब से होगा.

11 सितंबर तक का समय

इन निर्देशों को रिज़र्व बैंक ऑफ़ इंडिया (लोन और एडवांस पर ब्याज दरें) निर्देश, 2026" कहा जाएगा और इनके अगले साल 1 अप्रैल से लागू होने का प्रस्ताव है. यह ड्राफ्ट रेगुलेशन में तालमेल बिठाने के लिए गवर्नर संजय मल्होत्रा ​​की 5 अगस्त की घोषणा के बाद जारी किया गया है. बुधवार को जारी ड्राफ्ट के अनुसार, आम जनता को 11 सितंबर तक का समय दिया गया है.

ये निर्देश सिर्फ रेगुलेटेड संस्थाओं के घरेलू कामकाज पर लागू होंगे. सभी रेगुलेटेड संस्थाओं के लिए जरूरी होगा कि उनके पास लोन और एडवांस पर ब्याज दरों से जुड़ी बोर्ड से मंजूर नीतियां हों, जिनकी हर साल कम से कम एक बार समीक्षा की जाए.

नीति में माइक्रोफाइनेंस लोन भी शामिल

ड्राफ्ट नियमों में कहा गया है, "यह नीति लोन की कीमत तय करने से जुड़े कई पहलुओं को तय करेगी, जिसमें माइक्रोफाइनेंस लोन भी शामिल हैं. इन पहलुओं में ब्याज दर तय करने का तरीका जैसे इंटरनल बेंचमार्क तय करना, स्प्रेड के हिस्से, लोन की कैटेगरी और लोन की कीमत तय करने के लिए अधिकार सौंपना शामिल होगा."

नियमों के अनुसार, रेगुलेटेड संस्था को माइक्रोफाइनेंस लोन और कम कीमत वाले लोन पर सालाना प्रतिशत दर (APR) की एक अधिकतम सीमा तय करनी होगी, जिसमें ब्याज दर और अन्य सभी शुल्क/फीस शामिल हों. साथ ही, यह भी पक्का करना होगा कि ये दरें बहुत ज्यादा या नाजायज न हों.

फिक्स्ड-रेट लोन के लिए, रेगुलेटेड संस्था अपने इंटरनल बेंचमार्क या बाहरी बेंचमार्क के आधार पर ब्याज दर तय करेगी, जिसमें रिस्क-बेस्ड स्प्रेड भी जोड़ा जाएगा. वहीं, फ्लोटिंग-रेट लोन के लिए भी रेगुलेटेड संस्था अपने इंटरनल बेंचमार्क या बाहरी बेंचमार्क के आधार पर ब्याज दर तय करेगी, जिसमें रिस्क-बेस्ड स्प्रेड जोड़ा जाएगा.

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