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हाई स्पीड पर क्यों फेल हो जाते हैं करोड़ों की कारों के सेफ्टी फीचर्स?

मुंबई-बडौदा हाइवे पर हुए BMW हादसे ने हाई स्पीड पर कार के सेफ्टी फीचर्स की लिमिटेशन को लेकर बहस छेड़ दी है. खबर में जानिए क्यों 250 किमी की रफ्तार पर साइंस के आगे तकनीक फेल हो जाती है.

हाई स्पीड पर क्यों फेल हो जाते हैं करोड़ों की कारों के सेफ्टी फीचर्स?
BMW Crash: कार के सेफ्टी फीचर्स में कुछ लिमिटेशन होती हैं.
NDTV File Photo

मुंबई-बडौदा हाईवे पर बीती देर रात BMW Z4 का भयंकर हादसा हुआ. खबर है कि कार ओवरस्पीडिंग 250 किमी प्रति घंटे की रफ्तार में दौड़ रही थी. एक्सीडेंट इतना भयंकर था कि कार का इंजन 30 मीटर दूर गिरा मिला. इसके बाद महंगी कार के सेफ्टी फीचर्स को लेकर एक बार फिर चर्चाएं शुरू हो गई हैं. सवाल है क्या करोड़ों रुपये की कार में मिलने वाले ये फीचर्स इतनी तेज रफ्तार में काम करना बंद कर देते हैं? ऑटो एक्सपर्ट से समझने की कोशिश करते हैं कि सेफ मानी जाने वाली ये कारें हाई स्पीड में कैसे क्रैश कर जाती हैं.

एक्टिव और पैसिव सेफ्टी का खेल

नाम ना बताने की शर्त पर ऑटो एक्सपर्ट ने बताया कि मॉर्डन कारों में सेफ्टी सिस्टम दो तरह से काम करता है. पहला एक्टिव सेफ्टी, जिसमें एबीएस, इलेक्ट्रॉनिक स्टेबिलिटी कंट्रोल, ट्रैक्शन कंट्रोल और ADAS जैसे नई तकनीक शामिल होती है. इनका प्राइमरी काम एक्सीडेंट को होने से रोकना है.

दूसरा सिस्टम पैसिव सेफ्टी है. इसमें एयरबैग्स, सीट बेल्ट और क्रम्पल जोन शामिल हैं. इनका काम एक्सीडेंट हो जाने के बाद पैसेंजर की जान बचाना है. 

सुपर स्पीड पर क्यों फेल हो जाती हैं महंगी कारें?

ऑटो एक्सपर्ट के अनुसार जब कोई कार 50 किमी की रफ्तार से टकराती है या फिर 250 किमी से, दोनों में फर्क बहुत है. इसके पीछे फिजिक्स का काइनेटिक एनर्जी वाला नियम काम करता है. यानी जब 250 किमी प्रति घंटे की रफ्तार पर कार डिवाइडर या फिर किसी दीवार से टकराती है तो उसकी पावर कुछ ही मिली सेंकेंड में जीरो हो जाती है. इसका इंपैक्ट कार का क्रम्पल जोन सहन नहीं कर पाता. क्रम्पल जोन कार में झटका को झेलने वाला हिस्सा होता है. नतीजन कार के परखच्चे उड़ जाते हैं. 

एयरबैग, एबीएस की लिमिटेशन

एक्सपर्ट के अनुसार 100 से 120 किमी प्रति घंटे की स्पीड पर एबीएस टायरों को लॉक होने से बचाता है. और इलेक्ट्रॉनिक स्टेबिलिटी कंट्रोल कार को फिसलने नहीं देता. पर 250 किमी प्रति घंटे पर टायरों और सड़क के बीच फ्रैक्शन खत्म हो जाता है. इसलिए कंप्यूटर को सेंस और कमांड देने का मौका ही नहीं मिलता है. 

वहीं एयरबैग के लिए एक्सपर्ट का कहना है कि इसके लिए भी लिमिटेशन है. 250 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से अगर कोई गाड़ी टकराती है तो गाड़ी का केबिन ही सिकुड़ जाता है, जिससे एयरबैग्स खुलने की जगह ही नहीं मिल पाती. ऐसे में महंगी कार हो या बजट वाली, हाईस्पीड में सेफ्टी फीचर्स के लिए काम करना मुश्किल हो जाता है. 

इसके अलावा अगर रेटिंग की बात करें तो BNCAP हो या ग्लोबल NCAP हो, ये दोनों ही एक तय लिमिट में अपनी सेफ्टी रेटिंग जारी करती है.इसलिए ओवरस्पीडिंग के मामले में इनका सेफ्टी पैटर्न लागू नहीं होता है.

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शुभम उपाध्याय
shubham.upadhyay@ndtv.com
साल 2018 से पत्रकारिता जारी है. इंडिया टुडे ग्रुप (बिज तक), न्यूज नेशन, न्यूज 24 और अमर उजाला के बाद सफर एनडीटीवी आ पहुंचा है. यहां बतौर प्रोड्यूसर का... और पढ़ें
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