मुंबई-बडौदा हाईवे पर बीती देर रात BMW हादसे ने सोचने पर मजबूर कर दिया. एक महंगी कार, स्पीड 250 किमी प्रति घंटे से ज्यादा और देखते ही देखते सब कुछ खत्म. हादसा इतना बड़ा था कि कार के परखच्चे उड़ गए और दो लोगों की मौत हो गई, जबकि एक का इलाज अस्पताल में चल रहा है. इस घटना ने फिर एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया कि क्या भारत के हाईवे 250 किमी प्रति घंटे की स्पीड के लिए बने हैं? इस खबर में देश के एक्सप्रेसवे और उनके नियमों को समझने की कोशिश करते हैं.
डिजाइन स्पीड और डिलीवर स्पीड का खेल
हमने पूरे मामले को समझने के लिए ऑटो एक्सपर्ट से बात की. उन्होंने कहा देश के नए एक्सप्रेसवे जैसे मुंबई-अहमदाबाद या फिर मुंबई-दिल्ली की डिजाइन स्पीड अधिकतम 120 किमी प्रति घंटा है. डिजाइन स्पीड का मतलब है कि एक सेफ स्पीड को देखते हुए सड़क के मोड़, ढलान को तैयार किया जाता है.
ऐसे में अगर 120 की डिजाइन स्पीड वाली सड़क पर अगर 250 किमी प्रति घंटे की स्पीड से कोई कार चलाता है तो सारे विज्ञान के नियम पीछे छूट जाते हैं. इतनी तेज स्पीड पर बाहर की तरफ से खींचने वाला फोर्स इतना बढ़ जाता है कि गाड़ी पर कोई कंट्रोल ही नहीं रह पाता.
250 किमी पर क्या आती है समस्या?
एक्सपर्ट के अनुसार, इतनी तेज स्पीड पर दो बड़ी प्रॉब्लम सामने आती हैं. पहला तो ये कि इतनी बड़ी स्पीड पर रिएक्शन टाइम ना के बराबर होता है. यानी जब तक ड्राइवर ब्रेक पर पैर रखेगा, तब तक गाड़ी का एक्सीडेंट होना तय है.
इसके अलावा दूसरी समस्या टायर और हीटिंग के लेकर आती है. अमूमन हाई स्पीड पर टायर के अंदर का प्रेशर और हीट बढ़ जाती है, जिससे टायर फटने के चांस काफी हद तक बढ़ जाते हैं.
देश में क्या है स्पीड के नियम?
एनएचएआई के नियमों के अनुसार देश के एक्सप्रेसवे पर कारों के लिए अधिकतम स्पीड 120 किमी प्रति घंटा और नेशनल हाईवे पर 100 किमी प्रति घंटा तय की गई है. केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार देश में होने वाले टोटल सड़क हादसों में 70% से ज्यादा हादसे सिर्फ ओवरस्पीडिंग की वजह से होते हैं.
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