
छत्तीसगढ़ के विधानसभा चुनाव में व्यवधान उत्पन्न करने का कोई भी मौका नक्सली छोड़ नहीं रहे हैं। सूबे के नक्सल प्रभावित दंतेवाड़ा जिले में इंद्रावती नदी पार बसे गांवों के ग्रामीणों को मतदान करने से रोकने के लिए नक्सलियों ने बारसूर के नजदीक कोडार घाट की सभी नावें पानी में डुबो दी हैं।
इसके चलते शुक्रवार को दर्जनभर से ज्यादा गांवों के ग्रामीण बारसूर साप्ताहिक बाजार नहीं पहुंच पाए। इन्हीं नावों के सहारे ग्रामीण 11 नवंबर को मतदान करने पहुंचते।
जानकारी के मुताबिक इंद्रावती नदी के पार स्थित कोसलनार, मंगनार, बेड़मा, हांदावाड़ा, चेरपाल, तुमरीगुंडा, पदमेटा, काऊरगांव सहित अन्य गांवों के ग्रामीणों के लिए कोडार घाट की नावें ही बारसूर पहुंचने का एकमात्र साधन है। प्रशासन की ओर से मुहैया कराई गई दो नावों के अलावा ग्रामीणों द्वारा बनाई गई 6 छोटी डोंगियां सामान्य दिनों में इस घाट पर उपलब्ध रहती हैं। नक्सलियों ने सभी नावें पानी में डूबो दी हैं।
इस संबंध में गीदम के तहसीलदार आरके कृपाल ने कहा, "प्रशासन को 2 नावों को डुबोए जाने की खबर मिली थी, जिसकी रिपोर्ट दे दी गई है। निजी नावों के बारे में अब तक कोई जानकारी नहीं मिली है।"
इंद्रावती पार बसे गांवों के लिए मतदान केंद्र नदी के इस पार के गांवों में शिफ्ट करने की अनुमति पहले ही चुनाव आयोग ने दे दी है, जिससे मतदान दलों को इन इलाकों में जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। लेकिन मतदाताओं को नदी पार कर ही केंद्र तक पहुंचना होगा।
नए निर्देश के मुताबिक हांदावाड़ा के मतदान केंद्र को पूर्व माध्यमिक शाला मुचनार के कक्ष-1 में, हितावाड़ा के केंद्र को पूर्व माध्यमिक शाला मुचनार के कक्ष-2 में, काउरगांव के केंद्र को पूर्व माध्यमिक शाला मुस्तलनार के कक्ष-1 में, चेरपाल के केंद्र को नवीन मिडिल स्कूल भवन मुचनार के कक्ष-1 में, छोटेकरका के केंद्र को नवीन मिडिल स्कूल मुचनार कक्ष-2 में, पाहुरनार के मतदान केंद्र को हाईस्कूल छिंदनार के कक्ष-1 में संचालित किया जाएगा। नक्सलियों की हरकतों से ग्रामीण मतदाता भयभीत हैं।
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