आज 1 अक्टूबर है यानी 'वर्ल्ड कॉफी डे'. सुबह की शुरुआत हो या दफ्तर की थकान मिटानी हो, एक प्याला गरमा-गरम कॉफी हमें तरोताजा कर देती है. लेकिन क्या आप दुनिया की सबसे महंगी कॉफी के बारे में जानते हैं जो भारत में 9 हजार से 12 हजार रुपए किलो बिकती है. इतना ही नहीं इसे बनाने का अनोखा तरीका जानकर, आप अगली बार घूंट भरने से पहले आप सौ बार सोचेंगे. हम बात कर रहे हैं 'सिवेट कॉफी' की, जिसे 'कोपी लुवाक' भी कहा जाता है. जो इंडोनेशिया और दक्षिण-पूर्व एशिया के जंगलों में घूमने वाली खास तरह की बिल्ली की पॉटी से बनती है.
दुनिया की सबसे महंगी कॉफी बनने का सीक्रेट
दुनिया की सबसे महंगी कॉफी का राज छिपा है एक बिल्ली जैसे दिखने वाले छोटे से जंगली जानवर 'एशियन पाम सिवेट' की भूख में. ये जानवर बेहद नखरेबाज होता है. जब इसे भूख लगती है, तो यह कॉफी के बागानों में जाकर सिर्फ सबसे पके और सबसे रसीले कॉफी के फलों (चेरीज) को चुन-चुनकर खाता है.
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सारी कड़वाहट हटा देता है सिवेट
असली खेल इसके बाद शुरू होता है. सिवेट इन फलों को खा तो लेता है, लेकिन उसके पेट में कॉफी के सख्त बीज पच नहीं पाते. बिल्ली के पेट के अंदर मौजूद पाचक एंजाइम्स और एसिड्स इन बीजों के साथ मिलकर एक प्राकृतिक फर्मेंटेशन (खमीर उठाने) की प्रक्रिया करते हैं. इससे कॉफी की कड़वाहट पूरी तरह गायब हो जाती है और उसमें चॉकलेट और कैरेमल जैसा एक अनोखा, मखमली स्वाद आ जाता है.
पॉटी से निकलते हैं बीज
इसके बाद, सिवेट जब मल त्याग करता है, तो उन बीजों को इकट्ठा किया जाता है. इस महंगी कॉफी को बिल्ली की पॉटी से निकाला जाता है. फिर इन बीजों को बेहद बारीकी और साफ-सफाई से धोया जाता है, सुखाया जाता है और भूनकर तैयार की जाती है दुनिया की सबसे नायाब कॉफी. चूंकि यह पूरी प्रक्रिया बेहद मेहनत वाली है और सालभर में बेहद कम मात्रा में ही यह कॉफी मिल पाती है, इसलिए इसकी कीमत आसमान छूती है. अमीर और शौकीन लोग इसके एक-एक कप के लिए हजारों रुपये पानी की तरह बहा देते हैं.
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कुछ लालची इंसानों ने ज्यादा मुनाफे के लिए इन मासूम जानवरों को तंग पिंजरों में कैद करना शुरू कर दिया है, ताकि जबरन उनसे बीजों का उत्पादन कराया जा सके. इसलिए आज जागरूक लोग सिर्फ उसी सिवेट कॉफी को तवज्जो देते हैं जो जंगलों से बिना किसी क्रूरता के, प्राकृतिक रूप से इकट्ठा की गई हो.
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