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15 साल पहले से पंजाब से जापान गया शख्स, भारत के 30 खड़े मसालों से बनाता है खाना; उंगलियां चाट लेते हैं जापानी

जापानियों को दीवाना बना रहा है इस भारतीय का 'कुर्ता-पायजामा' और देसी स्वाद, उंगलियां चाटने पर मजबूर हुए लोग. बिना मैदा और मिलावट के मां के हाथ जैसा असली भारतीय जायका चखने के लिए हिरोशिमा में लग रही है भारी भीड़.

15 साल पहले से पंजाब से जापान गया शख्स, भारत के 30 खड़े मसालों से बनाता है खाना; उंगलियां चाट लेते हैं जापानी
भारत के पंजाब के रहने वाले अरुण ने जापानी लड़की से शादी की और वहीं बिजनेस शुरू कर दिया.

Viral Video: जापान के हिरोशिमा में जब देसी मसालों की महक उठती है, तो जापानी भी अपनी चॉपस्टिक्स छोड़कर उंगलियां चाटने लगते हैं. यह कहानी है भारतीय शेफ अरुण की, जिन्होंने जापान आकर न सिर्फ अपना रेस्टोरेंट 'स्पाइस मैजिक' खड़ा किया, बल्कि जापानियों को असली हिंदुस्तानी स्वाद का मुरीद बना दिया. 2 महीने पहले एक जापानी यूट्यूबर ने अरुण का इंटरव्यू लिया, जो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है. इस वीडियो को अब तक 1.9 मिलियन से ज्यादा बार देखा जा चुका है.

15 साल पहले जापान आया अरुण, यहीं का होकर रह गया

अरुण का यह सफर किसी चकाचौंध से नहीं, बल्कि खालिस देसी जड़ों से जुड़ा है. करीब 15 साल पहले जापान पहुंचे मूलत: पंजाब के अरुण ने अपनी जापानी गर्लफ्रेंड साकुरा से शादी के बाद हिरोशिमा में यह रेस्टोरेंट शुरू किया. रेस्टोरेंट में अरुण का यूनिफॉर्म है कुर्ता-पायजामा. वे गर्व से जापानी ग्राहकों को यह दिलचस्प बात भी बताते हैं कि दुनिया भर में मशहूर 'पायजामा' शब्द असल में भारत की ही देन है.

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भारतीय मसालों का खुशबू से दौड़े चले आते हैं जापानी

अब बात करते हैं असली जायके की. आम जापानी करी के उलट, अरुण का खाना 100% प्राकृतिक और सेहतमंद होता है. यहां न मैदा डलता है और न ही कोई बनावटी प्रिजर्वेटिव. खुशबूदार बासमती चावल और खास दालें सीधे भारत से मंगाई जाती हैं, जबकि सब्जियां वे हिरोशिमा के स्थानीय किसानों से ताजी लेते हैं. उनकी रसोई में 20 से 30 असली भारतीय खड़े मसाले हैं, दालचीनी, चक्रफूल, तेजपत्ता, ताजी कढ़ी पत्ती और दुनिया का सबसे कीमती मसाला केसर (जाफरान).

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मां से सीखी अरुण ने कुकिंग, रोज बदलता है होटल का मेन्यू

अरुण ने कुकिंग किसी बड़े शेफ स्कूल से नहीं, बल्कि अपनी मां के पल्लू की छांव में सीखी है. महज 10 साल की उम्र में पिता के दफ्तर जाने से पहले सुबह की कड़क चाय बनाने से शुरू हुआ यह हुनर आज जापान की सरजमीं पर महक रहा है.

रेस्टोरेंट का मेन्यू रोज बदलता है. केरला चिकन, टोमैटो पेपर फिश, तड़का दाल, परतदार लच्छा पराठा और दम बिरयानी. यही नहीं, हिरोशिमा में दुर्लभ माना जाने वाला साउथ इंडियन क्रिस्पी डोसा भी वे ग्राहकों को बेहद चाव से परोसते हैं. जापानी ग्राहक भी चटपटे खाने के बाद जब भारतीय कुल्हड़-स्टाइल मीठी चाय की चुस्की लेते हैं, तो बस वाह-वाह कर उठते हैं. अरुण का फलसफा एकदम साफ है, "जैसे भारत में मां सुबह उठकर पूरे परिवार के लिए दिल से ताजा खाना बनाती है, मैं वही ममता और अपनापन अपने ग्राहकों को परोसता हूं."

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