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10.5 लाख की नौकरी छोड़ महिला ने चुनी 8.5 लाख वाली WFH जॉब, वजह जानकर लोग बोले- सही फैसला

बेंगलुरु की शिखा प्रियदर्शिनी ने 10.5 लाख रुपये की ऑफिस जॉब छोड़ 8.5 लाख रुपये की वर्क फ्रॉम होम जॉब चुनी है. उनका कहना है कि इससे खर्च, स्ट्रेस और ट्रैफिक की परेशानी कम हुई है.

10.5 लाख की नौकरी छोड़ महिला ने चुनी 8.5 लाख वाली WFH जॉब, वजह जानकर लोग बोले- सही फैसला
शिखा प्रियदर्शिनी
X..सोशल मीडिया

बेंगलुरु की एक युवा प्रोफेशनल के करियर से जुड़ा फैसला सोशल मीडिया पर इन दिनों चर्चा का विषय बना हुआ है. दरअसल, पटना की रहने वाली 24 वर्षीय शिखा प्रियदर्शिनी ने ज्यादा सैलरी वाली नौकरी छोड़कर कम वेतन वाली वर्क फ्रॉम होम (WFH) नौकरी चुन ली. शिखा का यह फैसला अब लोगों के बीच बहस का विषय बन गया है कि क्या सिर्फ सैलरी ही नौकरी चुनने का सबसे बड़ा पैमाना होना चाहिए. एक्स की पोस्ट के अनुसार, शिखा बेंगलुरु की एक कंपनी में काम कर रही थीं और उनकी एनुअल सैलरी 10.5 लाख रुपये थी. लेकिन कंपनी ने जब हफ्ते में पांच दिन ऑफिस आना शुरू करवा दिया, तो उन्होंने नौकरी छोड़ने का फैसला कर लिया.

रोज का लंबा सफर बना परेशानी की वजह

एक्स (X) पोस्ट में दावा किया गया है कि शिखा को हर दिन बेंगलुरु के भारी ट्रैफिक के बीच करीब 30 किलोमीटर का सफर तय करना पड़ता था. यहीं वजह है कि उनका काफी समय बर्बाद होता था, बल्कि खर्च भी लगातार बढ़ रहा था. पोस्ट में यह भी कहा गया कि वह हर महीने सिर्फ कैब पर ही 12 हजार से 15 हजार रुपये खर्च कर रही थीं. यह तो एक खर्च था, इसके अलावा ऑफिस जाने से जुड़े खाने-पीने और दूसरे खर्च भी अलग थे.

कम सैलरी लेकिन ज्यादा आजादी

शिखा ने अपने खर्च और सेविंग का पूरा हिसाब लगाया. इसके बाद उन्होंने 8.5 लाख रुपये एनुअल पैकेज वाली वर्क फ्रॉम होम नौकरी स्वीकार कर ली. फिलहाल वह एक कंपनी में इम्प्लीमेंटेशन एडवाइजर के तौर पर काम कर रही हैं. अब वह पहले से ज्यादा सेविंग कर रही हैं और उनके पास अपने समय पर बेहतर कंट्रोल है. ट्रैफिक में घंटों बिताने की जगह अब उन्हें परिवार के साथ समय बिताने, नई स्किल सीखने और कंटेंट क्रिएशन करने का मौका मिल रहा है.

सोशल मीडिया पर लोगों ने किया समर्थन

सोशल मीडिाय पर शिखा के इस समर्थन को काफी स्पोर्ट मिल रहा है. कई लोगों का कहना है कि बड़ी सैलरी से ज्यादा जरूरी मेंटल पीस और बेहतर वर्क-लाइफ बैलेंस है. एक यूजर ने लिखा कि अगर जॉब तक पहुंचने में ही टाइम, पैसा और एनर्जी खर्च हो जाए तो बड़ी सैलरी का फायदा काफी कम हो जाता है. वहीं दूसरे यूजर ने कहा कि कभी-कभी कम सैलरी वाली जॉब बेहतर जीवन और ज्यादा खुशी दे सकती है. एक अन्य यूजर ने लिखा कि बेंगलुरु का ट्रैफिक और रोजाना आना-जाना कई लोगों के लिए स्ट्रेस की बड़ी वजह है. ऐसे में अगर कम सैलरी के बदले बेहतर जीवन मिलता है, तो यह एक समझदारी भरा फैसला है.

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