Financial Fraud Explained : सोचिए...अगर कोई आपसे कहे कि 'बस 45 दिन दीजिए, आपका पैसा खुद-ब-खुद डेढ़ गुना हो जाएगा' तो क्या आप सवाल करेंगे या ख्वाब देखने लगेंगे? अक्सर यहीं से दिमाग पीछे रह जाता है और उम्मीद आगे निकल जाती है. आसान पैसा, बिना मेहनत मुनाफा और 'गारंटी' का मीठा जहर इंसान को वो दिखाता है, जो हकीकत में कभी था ही नहीं. दुनिया के हर कोने में लाखों लोग इसी ख्वाब के पीछे भागते रहे हैं और ज्यादातर खाली हाथ लौटे. इस धोखे का एक नाम है, जो सदी भर बाद भी लोगों को डराता है...Ponzi Scheme, लेकिन ये सिर्फ एक स्कैम नहीं, ये इंसानी कमजोरी, लालच और भरोसे की सबसे खौफनाक कहानी है. इस कहानी की शुरुआत होती है एक ऐसे शख्स से, जिसने पैसा नहीं बेचा...उम्मीद बेची. नाम था...चार्ल्स पॉन्जी
Ponzi Scheme क्या है? (What is a Ponzi Scheme?)
जब कोई निवेशक पैसा लगाता है, तो उम्मीद होती है कि वह किसी असली बिजनेस में लगेगा, लेकिन Ponzi Scheme में पैसा न तो किसी प्रोडक्ट में लगता है, न किसी सर्विस में. यहां पुराने निवेशकों को पैसा दिया जाता है नए निवेशकों की जेब से. मुनाफा सिर्फ कागजों और बातों में होता है...हकीकत में नहीं.
कौन था चार्ल्स पॉन्जी? (Who Was Charles Ponzi?)
चार्ल्स पॉन्जी का जन्म 1882 में इटली में हुआ. कभी अमीरी देखी, फिर सब छिन गया. अमेरिका पहुंचकर उसने मेहनत की, लेकिन सब्र नहीं. उसे चाहिए था...जल्दी पैसा, शानो-शौकत और शोहरत. यहीं से शुरू हुआ उसका फरेब.

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International Reply Coupon का बहाना (The International Reply Coupon Trick)
1919 में पॉन्जी ने IRC यानी International Reply Coupon का हवाला देकर दावा किया कि वह देशों के बीच कीमत के फर्क से मुनाफा कमा रहा है. असल में यह मुनाफा नामुमकिन था, लेकिन कहानी इतनी असरदार थी कि लोग आंख मूंदकर भरोसा करने लगे.
लालच, भरोसा और इंसानी कमजोरी (Greed, Trust and Human Psychology)
45 दिनों में 50% रिटर्न का वादा, शुरुआती निवेशकों को तुरंत पैसा, और 'सीक्रेट सिस्टम' ये सब एक psychological trap था. अखबारों ने सच लिखा, लेकिन लोगों ने सच से ज्यादा अपने ख्वाबों पर यकीन किया.
जब झूठ का महल ढह गया (Rise and Fall of Ponzi)
एक वक्त जब पॉन्जी रोज 2.5 लाख डॉलर इकट्ठा कर रहा था. तब करीब 40,000 लोग बर्बाद हुए. आखिरकार उसे जेल हुई, बैंक डूबे और 'Ponzi Scheme' हमेशा के लिए धोखे का दूसरा नाम बन गया. आज क्रिप्टो स्कैम, फर्जी ट्रेडिंग ऐप्स और ऑनलाइन इन्वेस्टमेंट क्लब...सब उसी पॉन्जी सोच के नए चेहरे हैं. नाम बदला है, तरीका नहीं. पैसे का सपना बुरा नहीं, लेकिन गारंटीड रिटर्न सबसे बड़ा रेड फ्लैग है. चार्ल्स पॉन्जी की कहानी हमें सिखाती है कि, जहां दिमाग से ज्यादा उम्मीद बिक रही हो, वहां रुक जाना ही समझदारी है.
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