- प्रवर्तन निदेशालय ने HPZ टोकन निवेश घोटाले में दीमापुर कोर्ट में सप्लीमेंट्री चार्जशीट दाखिल की है
- जांच में पता चला कि देशभर के हजारों निवेशकों को HPZ Token App के जरिए धोखा दिया गया था
- मनी लॉन्ड्रिंग के लिए म्यूल अकाउंट्स, शेल कंपनियां और पेमेंट प्लेटफॉर्म का बड़े पैमाने पर दुरुपयोग हुआ
HPZ टोकन निवेश घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय ने दीमापुर की कोर्ट में सप्लीमेंट्री चार्जशीट दायर कर दी है जिस पर अदालत ने संज्ञान भी ले लिया है. यह जांच उस FIR के आधार पर शुरू हुई थी, जो साइबर क्राइम थाना कोहिमा, नागालैंड में साल 2021 में दर्ज हुई थी. जांच के दौरान सामने आया कि इस घोटाले से जुड़े कई और मामले भी देश के अलग-अलग हिस्सों में दर्ज हैं, जिनमें गुवाहाटी CID और CBI दिल्ली की FIR भी शामिल है. इसके बाद सभी मामलों को जोड़कर ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग के एंगल से जांच शुरू की.
चार्जशीट में क्या
- ईडी की जांच में खुलासा हुआ है कि HPZ टोकन एक बड़ा फर्जी निवेश स्कैम था. देशभर के हजारों लोगों को HPZ Token App के जरिए ऊंचे रिटर्न का झांसा दिया गया और उनकी मेहनत की कमाई हड़प ली गई. जांच में सामने आया कि पैसा घुमाने के लिए म्यूल अकाउंट्स, शेल कंपनियां, डमी डायरेक्टर्स और पेमेंट एग्रीगेटर्स का बड़े पैमाने पर दुरुपयोग किया गया.
- ईडी के मुताबिक, निवेशकों से पैसा UPI ID के जरिए इकट्ठा किया गया, जो ICICI बैंक में खुले फर्जी अकाउंट्स से जुड़े थे. इसके बाद यह पैसा कई शेल कंपनियों में ट्रांसफर किया गया. इन कंपनियों ने PayU, Aggrepay, Easebuzz जैसे पेमेंट प्लेटफॉर्म का गलत इस्तेमाल किया.
- कुछ निवेशकों को जानबूझकर थोड़ा-बहुत पैसा वापस भी किया गया, ताकि उनका भरोसा बने और वे और ज्यादा पैसा निवेश करें.
- जांच में यह भी सामने आया कि आखिरकार यह पैसा Shigoo Technology Pvt. Ltd. और Lillian Technocab Pvt. Ltd. के खातों में पहुंचा. यहां से आगे रकम को और कई संदिग्ध कंपनियों जैसे Digi India Marketing, Analytiq Business Ventures, Freebie Solutions, Truvinta Solutions, Zavion Trading और अन्य के खातों में भेजा गया.
- ईडी का आरोप है कि इन सभी फर्जी कंपनियों का कंट्रोल भूपेश अरोड़ा और उसके करीबियों के हाथ में था. भूपेश अरोड़ा ने शेल कंपनियों, म्यूल अकाउंट्स, हवाला नेटवर्क और विदेशी करेंसी एक्सचेंजर्स के जरिए हजारों करोड़ रुपए की मनी लॉन्ड्रिंग की.
- ईडी ने बताया कि भूपेश अरोड़ा फिलहाल एक और ऐसे ही फर्जी निवेश ऐप केस में पहले से गिरफ्तार है, जिसमें उसने बड़ी संख्या में लोगों को ठगा था.
- इस मामले में पहली चार्जशीट 4 मार्च 2024 को दाखिल हो चुकी है और केस अदालत में ट्रायल पर है.
- अब तक की जांच में करीब 2200 करोड़ रुपये की अपराध की कमाई सामने आई है. हालांकि समय रहते कार्रवाई करते हुए ईडी ने 650 करोड़ रुपए को म्यूल अकाउंट्स में रहते हुए अटैच कर लिया.
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