विज्ञापन
This Article is From Dec 21, 2025

व्हीलचेयर पर बैठकर की अंतरिक्ष की सैर, जर्मन महिला इंजीनियर ने रचा इतिहास, जानें क्यों खास उनकी ये उड़ान

एक जर्मन महिला इंजीनियर अंतरिक्ष में जाने वाली पहली व्हीलचेयर इस्तेमाल करने वाली इंसान बन गईं, उन्होंने ब्लू ओरिजिन की फ्लाइट में एक छोटी यात्रा की.

व्हीलचेयर पर बैठकर की अंतरिक्ष की सैर, जर्मन महिला इंजीनियर ने रचा इतिहास, जानें क्यों खास उनकी ये उड़ान
  • इंजीनियर मिकाएला बेंथाउस व्हीलचेयर पर रहने वाली पहली महिला हैं जिन्होंने अंतरिक्ष की यात्रा पूरी की है
  • मिकाएला की अंतरिक्ष उड़ान ब्लू ओरिजिन के न्यू शेपर्ड रॉकेट से 100 किलोमीटर की ऊंचाई पर हुई थी
  • यह मिशन ब्लू ओरिजिन का 16वां क्रूड फ्लाइट था जिसमें कुल छह यात्री शामिल थे

ख्वाहिशों की कोई सीमा नहीं होती, खासकर तब जब बात खुले आसमान में सैर की हो. जो नभ कई रहस्यों से भरा हुआ है, वहां की सैर कई लोगों के लिए सपना ही होता है लेकिन इंजीनियर मिकाएला बेंथाउस ने अपने सपने को हकीकत में तब्दील कर दिया. व्हीलचेयर पर जिंदगी बिताने वाली इस महिला ने अंतरिक्ष की ऊंचाइयों को छूकर इतिहास रच डाला है. दुनिया के नामचीन रइसों में से एक जेफ बेजोस की कंपनी ब्लू ओरिजिन के न्यू शेपर्ड रॉकेट ने उन्हें 100 किलोमीटर ऊपर उस जगह पहुंचाया, जहां गुरुत्वाकर्षण का नामोनिशान नहीं था. यह सिर्फ एक स्पेस ट्रिप नहीं, बल्कि उम्मीद, साहस और हौसले की उड़ान थी.

Latest and Breaking News on NDTV

मिकाएला बेंथाउस पैराप्लेजिया (रीढ़ की चोट के कारण व्हीलचेयर पर निर्भर) होने के बावजूद अंतरिक्ष में जाने वाली पहली महिला बनीं. उनकी यह ऐतिहासिक उड़ान अमेरिकी अरबपति  और एमेजॉन कंपनी के मालिक जेफ बेजोस की कंपनी ब्लू ओरिजिन ने पूरी की.

कैसा था यह मिशन?

यह ब्लू ओरिजिन का 16वां क्रूड फ्लाइट था. इस मिशन में कुल 6 यात्री शामिल थे, जिसमें मिकाएला बेंथाउस, पूर्व स्पेस इंजीनियर हांस कोनिग्समैन और चार अमेरिकी उद्यमी. न्यू शेपर्ड NS-37 रॉकेट ने वेस्ट टेक्सास से सुबह 8:15 बजे (स्थानीय समय) उड़ान भरी. उड़ान लगभग 11 मिनट तक चली और अंतरिक्ष यान ने करीब 100 किलोमीटर (62 मील) की ऊंचाई हासिल की. यात्रियों ने कुछ क्षणों के लिए वजनहीनता (Zero Gravity) का अनुभव किया.

मिकाएला की कहानी और संदेश

33 वर्षीय मिकाएला बेंथाउस यूरोपियन स्पेस एजेंसी (ESA) में इंजीनियर हैं. उन्होंने अपनी वापसी के बाद कहा कि यह मेरे जीवन का सबसे शानदार अनुभव था. सच में, कभी अपने सपनों को मत छोड़ो. कभी-कभी संभावना बहुत कम होती है, लेकिन फिर भी कोशिश करनी चाहिए. मिकाएला ने बताया कि 26 साल की उम्र में माउंटेन बाइकिंग के दौरान हुए हादसे में उनकी रीढ़ की हड्डी को चोट लगी थी, जिसके बाद वह व्हीलचेयर पर निर्भर हो गईं.

उन्होंने दुनिया से अपील की कि दिव्यांग लोगों के लिए सुविधाएं बढ़ाई जाएं. मेरे हादसे के बाद मुझे एहसास हुआ कि हमारी दुनिया अभी भी कितनी अनएक्सेसिबल है. हमें एक समावेशी समाज बनाने के लिए बदलाव करने होंगे.

ब्लू ओरिजिन का लक्ष्य और भविष्य

ब्लू ओरिजिन अब तक दर्जनों लोगों को अंतरिक्ष में भेज चुका है, जिनमें पॉप सिंगर कैटी पेरी से लेकर स्टार ट्रेक के अभिनेता विलियम शैटनर भी शामिल हैं. कंपनी का लक्ष्य है कि अंतरिक्ष पर्यटन को आम लोगों के लिए सुलभ बनाया जाए और एलन मस्क की स्पेसएक्स को चुनौती दी जाएं.

क्यों है यह उड़ान खास?

पहली बार किसी पैराप्लेजिक व्यक्ति ने अंतरिक्ष की यात्रा की.  यह उड़ान न सिर्फ़ तकनीकी उपलब्धि है, बल्कि इंक्लूसिविटी और इंस्पिरेशन का प्रतीक भी है. अपने इस सपने के सच होने पर मिकाएला ने संदेश देते हुए कहा कि सपनों को मत छोड़ो, और दुनिया को सबके लिए सुलभ बनाओ.

पूरी स्टोरी पढ़ें

NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं

फॉलो करे:
German Engineer, Michaela Benthaus, Paraplegia, Space Travel, Blue Origin
Listen to the latest songs, only on JioSaavn.com