राजस्थान के रणथंभौर नेशनल पार्क से सामने आए एक वायरल वीडियो ने वन्यजीव पर्यटन को लेकर गंभीर चिंता पैदा कर दी है. वीडियो में एक बाघ को कई सफारी वाहनों से घिरा हुआ देखा जा सकता है, जिसे सोशल मीडिया पर ‘सफारी जाम' कहा जा रहा है. यह वीडियो सबसे पहले इंस्टाग्राम यूजर रतन भयाल ने शेयर किया था, जिसे बाद में उत्तराखंड वन विभाग के मुख्य वन संरक्षक डॉ. पी.एम. धाकाटे ने एक्स पर पोस्ट किया है. इसके बाद यह क्लिप तेजी से वायरल हो गई और जिम्मेदार पर्यटन पर बहस छिड़ गई.
बाघ के रास्ते में बना वाहनों का घेरा
वीडियो में दिखाई देता है कि कई सफारी वाहन बाघ के बेहद करीब आकर उसके रास्ते को लगभग घेर लेते हैं. पर्यटक बेहतर फोटो और करीब से देखने की कोशिश में जानवर की प्राकृतिक गतिविधियों में बाधा डालते नजर आते हैं. बाघ इस दौरान सतर्क दिखाई देता है और आवाज भी निकालता है, जो इस बात का संकेत माना जा रहा है कि वह असहज और तनाव में है. पोस्ट के कैप्शन में चेतावनी दी गई है कि जब वाहनों की भीड़ बाघ का रास्ता रोकती है, तो वह ‘फाइट या फ्लाइट' यानी हमले या भागने की स्थिति में आ सकता है.
देखें Video:
This "safari jam" shows a critical point in wildlife tourism. When vehicles crowd a tiger's path, the animal's natural movement is disrupted, forcing it into a "fight or flight" state.
— Dr. PM Dhakate (@paragenetics) February 23, 2026
The tiger's vocalization is a clear territorial stress signal. Crowding creates a physical… pic.twitter.com/2rQ78gAQ7o
तनाव और आक्रामकता का बढ़ सकता है खतरा
विशेषज्ञों के अनुसार, इस तरह की स्थिति बाघ में तनाव हार्मोन कॉर्टिसोल का स्तर बढ़ा सकती है. बाघ की आवाज को एक 'टेरिटोरियल स्ट्रेस सिग्नल' बताया गया है. अगर जानवर को चारों ओर से घेर लिया जाए, तो यह उसके लिए शारीरिक बाधा बन जाता है और रक्षात्मक आक्रामकता का खतरा बढ़ सकता है.
वन्यजीव पर्यटन में जिम्मेदारी जरूरी
वन्यजीव विशेषज्ञ लंबे समय से यह कहते आए हैं कि राष्ट्रीय उद्यान मनोरंजन स्थल नहीं, बल्कि संरक्षित प्राकृतिक आवास हैं. बाघ या अन्य जानवरों को देखने की उत्सुकता के साथ-साथ पर्यटकों और सफारी ऑपरेटरों की जिम्मेदारी भी उतनी ही महत्वपूर्ण है. विशेषज्ञों का कहना है कि जानवरों से सुरक्षित दूरी बनाए रखें, पूर्ण शांति रखें और उनके प्राकृतिक रास्तों (कॉरिडोर) को बाधित न करें. इससे न केवल पर्यटकों की सुरक्षा सुनिश्चित होती है, बल्कि वन्यजीवों का पारिस्थितिक संतुलन भी बना रहता है.
सोशल मीडिया पर उठे सख्त नियमों के सवाल
वीडियो वायरल होने के बाद सोशल मीडिया पर कई यूजर्स ने सफारी नियमों के पालन और निगरानी को लेकर सवाल उठाए हैं. भारत में बाघों की संख्या धीरे-धीरे बढ़ रही है, ऐसे में पर्यटन गतिविधियों को नियंत्रित करना और सख्त दिशा-निर्देश लागू करना बेहद जरूरी हो गया है. यह घटना एक महत्वपूर्ण याद दिलाती है कि वन्यजीवों के प्रति हमारा प्रेम और उत्साह उनकी सुरक्षा और सम्मान से कभी भी ऊपर नहीं होना चाहिए.
(Disclaimer: यह खबर सोशल मीडिया पर यूजर द्वारा की गई पोस्ट से तैयार की गई है. एनडीटीवी इस कंटेंट की प्रामाणिकता की पुष्टि नहीं करता.)
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