
गुदगुदी वाला पेड़
बहराइच:
क्या पौधे भी आम इंसानों की तरह संवेदनशील होते हैं? इंसान की तरह हंसते मुस्कुराते हैं उन्हें भी महसूस होता है. क्या वास्तव में ऐसा होता है, जी हां ऐसा होता है ये हम नहीं कह रहे हैं बल्कि प्रभागीय वनाधिकारी कतर्नियाघाट जेपी सिंह कहते है कि उनके जंगल में ऐसे पेड़ हैं, जिनमें गुदगुदी होती है, इसलिए उन्हें गुदगुदी वाला पेड़ कहते हैं. इन पेड़ों को सहलाने से इनको गुदगुदी होती है और इनकी पत्तियां तथा डलियां हिलने लगती हैं.उत्तर प्रदेश के बहराइच जिले के प्रभागीय वनाधिकारी कतर्नियाघाट जेपी सिंह ने एनडीटीवी को बताया कि कतर्नियाघाट वन्य जीव प्रभाग के अंतर्गत ग्रास लैंड में पांच पेड़ ऐसे हैं, जो दिखने में आम पेड़ जैसे हैं लेकिन इनकी हरकत बिल्कुल भी सामान्य पेड़ों जैसी नहीं है.
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इन पेड़ों को सहलाने पर इन्हें इंसानों जैसे गुदगुदी लगती है और इनमें कम्पन साफ दिखाई देता है. जैसे ही इन्हें कोई हाथों से सहलाता है, इनकी टहनियां हिलने लगती हैं. यूं तो पतझड़ होने के चलते इस समय कम्पन उतना तेज नहीं होता, जैसे पत्तियां होने पर दिखाई देता है. लेकिन इसके बावजूद भी पत्तियां न होने पर भी सहलाने पर इस पेड़ में हो रहे कम्पन से टहनियों के हिलने को साफतौर से देखा जा सकता है. उन्होंने एनडीटीवी को आगे बताया कि 550 वर्ग किलो मीटर में फैला कतर्नियाघाट का जंगल प्राकृतिक सम्पदा से काफी धनी है, इसीलिए यहां का एक स्लोगन मशहूर है कि दुर्लभ, सुलभ है. इस जंगल में आपको गिद्ध भी देखने को मिलेगा और इसकी नदियों में डॉल्फिन, घड़ियाल, मगरमच्छ और जंगल में पांच प्रकार के हिरन, तेंदुआ, चीता, हाथी और गैंडे देखने को मिल जाएंगे.
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फलदार पेड़ो के साथ-साथ यहां साखू और सागौन की बड़ी तादाद है. इस जंगल में जड़ी बूटियां भी पर्याप्त मात्रा में पाई जाती है, लेकिन जबसे गुदगुदी वाले पेड़ के बारे में पर्यटकों को पता चला है, तब से यह पेड़ सबका आकर्षण बनता जा रहा. जो लोग इसके बारे में सुनते हैं वह इसे एक बार सहलाते अवश्य हैं.
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इन पेड़ों को सहलाने पर इन्हें इंसानों जैसे गुदगुदी लगती है और इनमें कम्पन साफ दिखाई देता है. जैसे ही इन्हें कोई हाथों से सहलाता है, इनकी टहनियां हिलने लगती हैं. यूं तो पतझड़ होने के चलते इस समय कम्पन उतना तेज नहीं होता, जैसे पत्तियां होने पर दिखाई देता है. लेकिन इसके बावजूद भी पत्तियां न होने पर भी सहलाने पर इस पेड़ में हो रहे कम्पन से टहनियों के हिलने को साफतौर से देखा जा सकता है. उन्होंने एनडीटीवी को आगे बताया कि 550 वर्ग किलो मीटर में फैला कतर्नियाघाट का जंगल प्राकृतिक सम्पदा से काफी धनी है, इसीलिए यहां का एक स्लोगन मशहूर है कि दुर्लभ, सुलभ है. इस जंगल में आपको गिद्ध भी देखने को मिलेगा और इसकी नदियों में डॉल्फिन, घड़ियाल, मगरमच्छ और जंगल में पांच प्रकार के हिरन, तेंदुआ, चीता, हाथी और गैंडे देखने को मिल जाएंगे.
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