ice cream owner becomes monk News: कोई शख्स जिंदगी के चार दशक लगाकर करोड़ों का कारोबारी साम्राज्य खड़ा करे, फिर एक दिन अचानक सब कुछ दांव पर लगाकर कह दे. 'मुझे अब जंगल में ध्यान लगाना है, संन्यासी बनना है.' सुनने में यह किसी फिल्म की कहानी लग सकती है, लेकिन यह बिल्कुल सच्ची और दिल को छू लेने वाली हकीकत है. थाईलैंड के जाने-माने आइसक्रीम ब्रांड 'हावेल्स' (Hawell's) के मालिक सिरिपोंग अक्कारास्रीयुक ने अपनी दशकों पुरानी कंपनी बेचने का फैसला किया है. कीमत तय की गई है 165 मिलियन बाथ, यानी करीब 47.2 करोड़ रुपए. लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर कामयाबी के इस मुकाम पर पहुंचकर कोई सब कुछ क्यों छोड़ना चाहता है?
करोड़ों छोड़कर जंगल क्यों जा रहे बिजनेसमैन?
सिरिपोंग का कहना है कि उनकी जिंदगी का अंतिम और सबसे बड़ा मकसद 'अरहंत' (मोक्ष और ज्ञान की सर्वोच्च अवस्था) प्राप्त करना है. वे सांसारिक माया-मोह और इस भागदौड़ भरी जिंदगी को अलविदा कहकर बौद्ध भिक्षु बनना चाहते हैं.
यह कोई अचानक लिया गया फैसला नहीं है. सिरिपोंग पिछले 15 सालों से इस दिन की योजना बना रहे थे. वे बौद्ध दर्शन पर गहरी आस्था रखते हैं और 2016 में 'सक्सेस डिराइव्ड फ्रॉम द बुद्धा' नाम से एक किताब भी लिख चुके हैं.
सिरिपोंग ने साफ किया है कि वे अगले दो साल में जंगल में एक कुटिया (मेडिटेशन रिट्रीट) तैयार करेंगे और फिर पूरी तरह संन्यास ले लेंगे. उन्होंने सोशल मीडिया पर अपनी भावनाएं साझा करते हुए लिखा, "अगले दो सालों में मैं ध्यान साधना के लिए जंगल में जगह चुनूंगा. समय आने पर मैं संन्यास लूंगा और जंगल के एकांत में ध्यान लगाऊंगा. मेरा बाहरी दुनिया से कोई संपर्क नहीं रहेगा. साथ में सिर्फ एक साथी भिक्षु होंगे और एक शिष्य, जो मेरे लिए भोजन लाएगा."

1999 से शुरुआत: फर्श से अर्श तक की कहानी
सिरिपोंग ने साल 1999 में 'हावेल्स' की शुरुआत की थी. देखते ही देखते यह ब्रांड थाईलैंड के घर-घर में लोकप्रिय हो गया. पहले आउटलेट के बाद महज 3 साल के भीतर कंपनी ने 22 शाखाएं खोल लीं. एक दौर था जब थाईलैंड के बड़े-बड़े शॉपिंग मॉल्स में 'हावेल्स' का दबदबा हुआ करता था. लेकिन समय के साथ बाजार बदला और चुनौतियां भी बढ़ीं.
ये भी पढ़ें: बुलंदशहर का लड़का, रातों-रात गंवाए 100 करोड़ के बिटकॉइन, आज एलन मस्क के साथ प्राइवेट जेट में चलता है
सिरिपोंग के मुताबिक, पिछले दो सालों में मॉल्स में जगह खाली होने के बावजूद उन्हें नए आउटलेट्स के लिए जगह नहीं दी जा रही थी. विस्तार रुकने की वजह से आज उनके पास सिर्फ एक स्टैंडअलोन स्टोर बचा है. कारोबार में आ रही इस रुकावट ने भी उनके संन्यास के फैसले को और गति दी.
47 करोड़ की इस डील में खरीदार को क्या-क्या मिलेगा?
सिरिपोंग सिर्फ अपना ब्रांड नाम नहीं बेच रहे, बल्कि पूरा का पूरा बना-बनाया सेटअप सौंप रहे हैं. 165 मिलियन बाथ (47.2 करोड़ रुपये) की इस डील में शामिल है.
- 2.77 एकड़ (1.1 हेक्टेयर) जमीन, साथ में ऑफिस बिल्डिंग.
- पूरी तरह चालू फैक्ट्री, सभी आधुनिक मशीनें और कानूनी लाइसेंस.
- हावेल्स का आउटलेट और रजिस्टर्ड ट्रेडमार्क.
- 37 सालों का अनुभव और सीक्रेट रेसिपी: सॉफ्ट-सर्व से लेकर हार्ड आइसक्रीम तक के सभी फॉर्मूले और बिजनेस का पूरा हुनर.
- ग्राहक लाने वाले को 1.43 करोड़ का 'बोनस'
सिरिपोंग अपने इस फैसले को लेकर इतने संजीदा हैं कि उन्होंने एक अनोखा ऐलान भी किया है. जो भी व्यक्ति इस कारोबार के लिए सही खरीदार खोजकर लाएगा, उसे सिरिपोंग 5 मिलियन बाथ (लगभग 1.43 करोड़ रुपये) की रेफरल फीस यानी कमीशन देंगे.
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं