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दोनों पैर खोने के बाद भी नहीं टूटा हौसला, हाथों के सहारे माउंट एवरेस्ट पर की फतह, वीडियो हुआ वायरल

Mount Everest: रूसी पर्वतारोही रुस्तम नाबिएव ने 2015 में अपने दोनों पैर गंवा दिए थे, इसके बाद भी उन्होंने कभी हार नहीं मानी और अब उन्होंने सिर्फ अपने हाथों के सहारे माउंट एवरेस्ट पर चढ़ाई पूरी कर इतिहास रच दिया है.

दोनों पैर खोने के बाद भी नहीं टूटा हौसला, हाथों के सहारे माउंट एवरेस्ट पर की फतह, वीडियो हुआ वायरल
Rustam Nabiev Mount Everest
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Mount Everest: 2015 में एक भयानक हादसे में अपने दोनों पैर गंवाने वाले रूसी पर्वतारोही रुस्तम नाबिएव (Rustam Nabiev) ने मई 2026 में इतिहास रच दिया है. उन्होंने वो कर दिखाया जो कई लोगों के लिए असंभव माना जाता था. रुस्तम नाबिएव ने बिना प्रोस्थेटिक के ही सिर्फ अपने हाथों के सहारे माउंट एवरेस्ट पर चढ़ाई पूरी की. रूसी पर्वतारोही रुस्तम नाबिएव इतिहास के पहले ऐसे व्यक्ति बन गए हैं, जिन्होंने सिर्फ अपने हाथों के सहारे एवरेस्ट की चोटी तक पहुंचने का कारनामा किया है. उन्होंने अपने 34वें जन्मदिन पर अपनी चढ़ाई शुरू की और एक हफ्ते के भीतर ही दुनिया के सबसे ऊंचे पर्वत की चोटी पर पहुंच गए.

2015 में गंवा दिए दोनों पैर

रुस्तम नाबिएव ने साल 2015 में एक बड़ा हादसा झेला था, जब वह एक सैन्य बैरक में सो रहे थे और इमारत गिर गई. इस हादसे में उन्होंने अपने दोनों पैर खो दिए थे और कई सैनिकों की मौत भी हुई थी. इतनी बड़ी मुश्किल के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और खुद को लगातार कठिन चुनौतियों के लिए तैयार करते रहे. एवरेस्ट बेस कैंप के अधिकारी खिम लाल गौतम के अनुसार, नाबिएव ने सुरक्षित तरीके से शिखर तक पहुंचने में सफलता हासिल की और इसके बाद वह बेस कैंप की ओर वापस उतरना भी शुरू कर चुके हैं.

सोशल मीडिया पर शेयर किए गए वीडियो में दिखा कि रुस्तम नबिएव ने खुम्बू आइसफॉल के खतरनाक हिस्से में लगी सीढ़ियों को भी सिर्फ अपने हाथों के सहारे पार किया. रिपोर्ट्स के मुताबिक, उन्हें इस आइसफॉल को पार कर करीब 6,065 मीटर ऊंचाई पर स्थित कैंप-1 तक पहुंचने में लगभग 15 घंटे का समय लगा. दोनों पैर खोने के बाद भी रुस्तम ने हार नहीं मानी. उन्होंने सबसे पहले रूस और यूरोप के सबसे ऊंचे पहाड़ माउंट एल्ब्रस पर चढ़ाई की. इसके बाद वह साल 2021 में नेपाल पहुंचे और दुनिया के आठवें सबसे ऊंचे पर्वत माउंट मानस्लू को भी सफलतापूर्वक फतह किया.

माउंट एवरेस्ट की चढ़ाई करने के बाद उन्होंने लिखा, “20 मई को नेपाल समय के अनुसार सुबह 8:16 बजे, मैंने पहली बार सिर्फ अपने हाथों की मदद से माउंट एवरेस्ट की चोटी पर पहुंचकर इतिहास रच दिया. मैं यह उपलब्धि उन सभी लोगों को समर्पित करता हूं, जो मुझे देख रहे हैं. मैं बस एक बात कहना चाहता हूं, जब तक आपके अंदर जीवन है, तब तक लड़ते रहो. अंत तक लड़ो, यही सबसे ज्यादा मायने रखता है.” जब उनकी चढ़ाई की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आए, तो लोगों ने उनके हौसले और ताकत की जमकर तारीफ की.

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