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आंगनवाड़ी कार्यकर्ता से एवरेस्ट तक; छत्तीसगढ़ की बेटी अमिता श्रीवास के हौसले को CM साय का सलाम

Chhattisgarh Mountaineer Amita Shrivas: छत्तीसगढ़ की आंगनबाड़ी कार्यकर्ता अमिता श्रीवास माउंट एवरेस्ट फतह के लिए रवाना. CM विष्णुदेव साय ने दी शुभकामनाएं, जानें पूरी कहानी.

आंगनवाड़ी कार्यकर्ता से एवरेस्ट तक; छत्तीसगढ़ की बेटी अमिता श्रीवास के हौसले को CM साय का सलाम
माउंट एवरेस्ट अभियान पर जा रहीं अमिता श्रीवास

Chhattisgarh News: छत्तीसगढ़ के जांजगीर‑चांपा जिले की साधारण पृष्ठभूमि से निकलकर असाधारण ऊंचाइयों तक पहुंचने की तैयारी कर रहीं युवा पर्वतारोही अमिता श्रीवास इन दिनों पूरे प्रदेश की शान बनी हुई हैं. आंगनवाड़ी कार्यकर्ता के रूप में सेवा देने वाली अमिता अब दुनिया की सबसे ऊंची चोटी माउंट एवरेस्ट पर तिरंगा फहराने के संकल्प के साथ अपने सबसे बड़े अभियान पर निकलने वाली हैं. मुख्यमंत्री विष्णु देव साय (CM Vishnu Deo Sai) ने रायपुर में उनसे मुलाकात कर इस साहसिक यात्रा के लिए शुभकामनाएं दीं. अमिता की कहानी केवल पर्वतारोहण की नहीं, बल्कि जज़्बे, मेहनत और आत्मविश्वास से सीमाओं को तोड़ने की मिसाल है.

सीएम निवास में मुख्यमंत्री से मुलाकात

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने राजधानी रायपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास में पर्वतारोही अमिता श्रीवास से मुलाकात की. इस दौरान उन्होंने कहा कि आगामी 9 अप्रैल को अमिता माउंट एवरेस्ट अभियान के लिए काठमांडू रवाना होंगी. मुख्यमंत्री ने इसे केवल एक व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं, बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ की आकांक्षाओं, साहस और आत्मविश्वास की ऊंची उड़ान बताया. उन्होंने कहा कि अमिता का यह अभियान यह सिद्ध करता है कि जब संकल्प मजबूत हो, तो कोई भी चुनौती असंभव नहीं रहती.

Amita Shrivas Everest: अमिता के संघर्ष की कहानी

Amita Shrivas Everest: अमिता के संघर्ष की कहानी

बेटियों के हौसले की प्रतीक बनी अमिता

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रदेश की बेटियां आज हर क्षेत्र में अपनी प्रतिभा और परिश्रम से नए मानक स्थापित कर रही हैं. अमिता श्रीवास का पर्वतारोहण अभियान उसी बदलाव का जीवंत उदाहरण है. उन्होंने विश्वास जताया कि अमिता अपने साहसिक मिशन में सफल होकर माउंट एवरेस्ट की चोटी पर तिरंगा फहराएंगी और छत्तीसगढ़ के साथ‑साथ पूरे देश का गौरव बढ़ाएंगी.

आंगनवाड़ी कार्यकर्ता, लेकिन सपने आसमान से भी ऊंचे

जांजगीर‑चांपा जिले के चांपा नगर की रहने वाली अमिता श्रीवास पेशे से आंगनवाड़ी कार्यकर्ता हैं. सीमित संसाधनों और साधारण परिवार से आने के बावजूद उन्होंने हमेशा कुछ अलग करने का सपना देखा. बच्चों को क, ख, ग सिखाने वाली अमिता ने अपने जीवन में ऐसे लक्ष्य तय किए, जिनकी कल्पना करना भी कई लोगों के लिए कठिन होता है. उनका मानना है कि हालात चाहे जैसे हों, अगर इरादे मजबूत हों तो रास्ते खुद बनने लगते हैं.

कई ऊंची चोटियों पर फहरा चुकी हैं तिरंगा

अमिता श्रीवास पहले ही कई बड़ी पर्वतीय उपलब्धियां अपने नाम कर चुकी हैं. उन्होंने लद्दाख की यूटी कांगरी, कांग यात्से और अफ्रीका की सबसे ऊंची चोटी माउंट किलिमंजारो पर सफल चढ़ाई कर तिरंगा लहराया है. इन अभियानों के साथ वह छत्तीसगढ़ की तीसरी पर्वतारोही बन चुकी हैं. हर सफल अभियान ने उनके आत्मविश्वास को और मजबूती दी और एवरेस्ट के सपने को साकार करने की दिशा में कदम बढ़ाए.

एवरेस्ट के लिए कठिन और वैज्ञानिक तैयारी

माउंट एवरेस्ट पर ऑक्सीजन का स्तर सामान्य से लगभग 33 प्रतिशत ही होता है. इस चुनौती को देखते हुए अमिता विशेष तैयारी कर रही हैं. उनकी दिनचर्या में योग, प्राणायाम, अनुलोम‑विलोम, स्ट्रेंथ ट्रेनिंग, वेट ट्रेनिंग और नियमित रनिंग शामिल है. पिछले करीब 10 महीनों से वह रोज सुबह चार से पांच घंटे कठिन अभ्यास कर रही हैं, ताकि शरीर और मन दोनों हर परिस्थिति के लिए तैयार रहें.

शिक्षा और प्रशिक्षण का सफर

अमिता की शुरुआती पढ़ाई चांपा के सरकारी स्कूल में हुई. उन्होंने प्राथमिक शिक्षा मठ प्राथमिक स्कूल से और मैट्रिक गर्ल्स स्कूल, चांपा से पूरी की. इसके बाद एमएमआरपीजी कॉलेज से कॉलेज शिक्षा हासिल की. पर्वतारोहण की शुरुआत उन्होंने वर्ष 2018 में राजस्थान के माउंट आबू स्थित सरकारी संस्थान से रॉक क्लाइंबिंग कोर्स करके की. धीरे‑धीरे उन्होंने पश्चिम और उत्तर सिक्किम के पर्वतीय क्षेत्रों में करीब 5500 मीटर तक की ऊंचाई पर प्रशिक्षण प्राप्त किया.

आर्थिक चुनौतियां, लेकिन हौसला अडिग

पर्वतारोहण जैसे महंगे खेल में आर्थिक चुनौतियां सबसे बड़ी बाधा होती हैं. अमिता बताती हैं कि उनकी आर्थिक स्थिति इतनी मजबूत नहीं थी कि वे पूरा खर्च खुद उठा सकें. इसके बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और जिला प्रशासन से सहयोग मांगा. उनके जज़्बे को देखकर प्रशासन ने उन्हें आर्थिक सहायता दी, जिससे उनके अभियान को नई ताकत मिली.

मौत से सामना, फिर भी नहीं मानी हार

लद्दाख की यूटी कांगरी चोटी पर चढ़ाई के दौरान अमिता शिखर से महज 50 मीटर दूर थीं, तभी भीषण एवलांच आ गया. चारों ओर बर्फ का तांडव और माइनस 31.4 डिग्री सेल्सियस की ठंड थी. अमिता कहती हैं कि अगर वह उस वक्त पीछे हट जातीं, तो प्रदेश की दूसरी बेटियों का हौसला टूट जाता. उन्होंने साहस दिखाया और तिरंगा फहराकर ही वापस लौटीं.

महिलाओं और युवाओं के लिए संदेश

अमिता श्रीवास का संदेश साफ है कि सपने देखना कभी मत छोड़िए. उनका कहना है कि कोई भी लक्ष्य छोटा या बड़ा नहीं होता, बस इरादे मजबूत होने चाहिए. अगर जुनून और मेहनत का जज्बा हो, तो हर सपना पूरा किया जा सकता है.

एवरेस्ट की ओर ऐतिहासिक कदम

गुरुवार 9 अप्रैल को अमिता काठमांडू के लिए रवाना होंगी. जब देश अपनी दिनचर्या में व्यस्त होगा, तब चांपा की यह बेटी इतिहास रचने की ओर कदम बढ़ा रही होगी. मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने उन्हें छत्तीसगढ़ की हिम्मत की मिसाल बताते हुए विदा किया है. अमिता की कहानी साबित करती है कि हौसले अगर फौलादी हों, तो पहाड़ भी रास्ता दे देते हैं.

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