नई दिल्ली:
निरंतर बढ़ रही महंगाई के साथ महानगर के बच्चों और युवाओं का जेब खर्च भी 2005 से अब तक 10 गुना बढ़ चुका है। शहरी भारत में जेब खर्च की स्थिति पर किए गए एक सर्वेक्षण में यह बात सामने आई। एसोसिएटेड चैम्बर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री ऑफ इंडिया (एसोचैम) ने एसोचैम सामाजिक विकास फाउंडेशन के मार्गदर्शन में देश के पांच महानगरों के कुल 3,000 किशोरों और युवाओं से बातचीत कर यह निष्कर्ष निकाला। सर्वेक्षण में शामिल किए जाने वाले बच्चों और युवाओं की उम्र 12-20 साल थी। एसोचैम के महासचिव डीएस रावत ने कहा कि 2005 में जहां स्कूली बच्चों और कॉलेज के युवाओं को 450-500 रुपये प्रति माह मिलते थे। आज उन्हें जेब खर्च के रूप में 3,600-12,000 रुपये प्रति माह मिल रहे हैं। सर्वेक्षण के मुताबिक महानगरों में सात-10 वर्ष के बच्चे हर सप्ताह 50-100 रुपये खर्च करते हैं। महानगर के बच्चे अपनी जेबखर्च का 55 फीसदी हिस्सा आधुनिक गैजेट जैसे डिजिटल कैमरे, आईपॉड, एमपी3 प्लेयर, मोबाइल, आदि पर खर्च करते हैं। जेब खर्च का 25 फीसदी फिल्म और मॉल पर और 20 फीसदी खाने-पीने पर खर्च होता है। सर्वेक्षण के मुताबिक किशोरियों और युवतियों से दोस्ती रखने वाले बच्चे अधिक खर्च करते हैं।
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