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'अब बस बहुत हुआ'! दुबई वाले 'बाबू' ने भारतीय प्रॉपर्टी से की तौबा, वजह सुनकर आप भी कहेंगे- 'ये तो होना ही था'

दुबई में बैठे एक NRI ने इंडियन रियल एस्टेट मार्केट की ऐसी 'कुंडली' खोली है कि सोशल मीडिया पर तहलका मच गया. हैदराबाद और बेंगलुरु में फ्लैट लेकर फंसे इस शख्स का कहना है कि, अब वो तीसरी प्रॉपर्टी की गलती कभी नहीं करेंगे. आखिर क्या है वो 'सिरदर्द' जिसने करोड़ों के इन्वेस्टमेंट को 'सफेद हाथी' बना दिया?

'अब बस बहुत हुआ'! दुबई वाले 'बाबू' ने भारतीय प्रॉपर्टी से की तौबा, वजह सुनकर आप भी कहेंगे- 'ये तो होना ही था'
बेंगलुरु-हैदराबाद में घर लेकर पछता रहा है ये NRI, बोला- 'इससे अच्छा तो बैंक में पैसे रखता'

Hyderabad Bangalore Property Rates: आजकल हर कोई जमीन-जायदाद के पीछे लगा है, लेकिन दुबई में रहने वाले एक एनआरआई (NRI) ने इंडिया में प्रॉपर्टी खरीदने को लेकर जो कड़वा सच बोला है, उसने सबकी नींद उड़ा दी है. रेडिट पर अपनी भड़ास निकालते हुए उन्होंने साफ कह दिया कि, भारत में घर खरीदना अब 'घाटे का सौदा' बन गया है. उनके मुताबिक, हैदराबाद और बेंगलुरु जैसे बड़े शहरों में करोड़ों लगाने के बाद जो किराया (Rental Yield) हाथ आता है, वो ऊंट के मुंह में जीरे जैसा है.

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किराए से ज्यादा तो बैंक का ब्याज है! ( Rental Yield vs Savings Interest)

शख्स का कहना है कि,  'सारे टैक्स, मेंटेनेंस और सोसाइटी के नखरे झेलने के बाद साल का सिर्फ 2 से 3 परसेंट किराया बचता है. इससे बेहतर तो दुबई के सेविंग अकाउंट हैं, जो बिना किसी झंझट के 4 परसेंट ब्याज दे रहे हैं. ऊपर से कागजी कार्रवाई ऐसी कि इंसान की उम्र 5 साल कम हो जाए. पावर ऑफ अटॉर्नी (POA) से लेकर बैंक स्टेटमेंट्स और नोटरी के चक्कर काटते-काटते चप्पलें घिस जाती हैं, पर काम खत्म होने का नाम नहीं लेता.

I'm an NRI in Dubai. I own 2 properties in India. Won't be buying a third. Here's why.
by u/alphatrader_99 in indianrealestate

टैक्स का चक्कर और किरायेदारों का गुस्सा (Tax Hurdles and Tenant Trouble)

मसाला तब और बढ़ गया जब उन्होंने टैक्स की बात छेड़ी. विदेशी मकान मालिक होने की वजह से टैक्स काटने और भरने की सारी जिम्मेदारी किराएदार पर आ जाती है. अब बिचारा किराएदार घर रहने के लिए लेता है या सीए (CA) बनने के लिए? इसी वजह से आधे लोग तो एनआरआई का घर लेने से ही मना कर देते हैं, जो लेते हैं वो हर महीने टैक्स के झमेले को लेकर सिर पकड़कर बैठ जाते हैं.

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देसी लोग बोले- 'चलो, अच्छा हुआ पीछा छूटा'! (Local Buyers' Reaction on NRI Investment)

जैसे ही यह पोस्ट वायरल हुई, भारत के आम लोगों ने राहत की सांस ली. सोशल मीडिया पर यूजर्स ने कहा, 'शुक्र है आप जैसे लोगों ने खरीदना बंद किया, तभी तो हम जैसे आम लोगों के लिए घर की कीमतें कम होंगी'. लोगों का गुस्सा वाजिब भी है, क्योंकि एनआरआई निवेश की वजह से कई शहरों में प्रॉपर्टी के रेट आसमान छू रहे हैं, जिससे लोकल लोग अपने ही शहर में बेगाने हो गए हैं. कुल मिलाकर बात ये है कि कागजों पर तो प्रॉपर्टी की कीमत बढ़ती दिखती है, लेकिन जब उसे बेचने या मेंटेन करने की बारी आती है, तो असली 'अग्निपरीक्षा' शुरू होती है. 

(डिस्क्लेमर: यह जानकारी सोशल मीडिया पर वायरल पोस्ट के आधार पर दी गई है. NDTV इसकी पुष्टि नहीं करता.)

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