देश की आर्थिक राजधानी मुंबई इन दिनों भीषण जल संकट की चपेट में है. हालात इतने गंभीर हो चुके हैं कि शहर को पानी देने वाले जलाशयों में अब सिर्फ 9.65% पानी ही बचा है. पहले से चल रही पानी की कटौती के बीच अब कुएं सूखने लगे हैं, जिससे टैंकरों की सप्लाई भी करीब आधी हो गई है.
जलाशयों में खतरनाक स्तर पर पहुंचा पानी
मुंबई को पानी सप्लाई करने वाले सातों जलाशयों में पानी का स्तर तेजी से गिरा है. कुल मिलाकर स्टॉक अब 9.65% तक सिमट गया है. ‘अप्पर वैतरणा' पूरी तरह सूख चुका है, जबकि तानसा में केवल 5.13% पानी बचा है. शहर के मुख्य स्रोत भातसा में भी महज 9.64% जलस्तर रह गया है. यह स्थिति आने वाले दिनों के लिए बेहद चिंताजनक मानी जा रही है.
कुएं सूखने से टैंकरों पर भी असर
भीषण गर्मी और तेजी से हो रहे कंक्रीटीकरण के कारण भूजल स्तर बुरी तरह गिर गया है. कई कुएं सूखने की कगार पर पहुंच गए हैं. वॉटर टैंकर एसोसिएशन के मुताबिक, पानी की कमी के चलते टैंकरों की सप्लाई में लगभग 50% तक गिरावट आ गई है. इससे उन इलाकों में संकट और बढ़ गया है, जो टैंकरों पर निर्भर हैं.
BMC का सख्त सर्कुलर जारी
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) ने एक सख्त सर्कुलर जारी किया है. इसके तहत पानी बचाने के लिए कई बड़े फैसले लिए गए हैं, ताकि मौजूदा जल भंडार को लंबे समय तक चलाया जा सके और संकट को नियंत्रित किया जा सके.
पानी की कटौती और कड़े प्रतिबंध
BMC ने पहले से लागू 10% पानी कटौती को जारी रखने का फैसला किया है. इसके अलावा कंस्ट्रक्शन साइट्स के लिए पानी के सभी अस्थायी कनेक्शन बंद कर दिए हैं और नए कनेक्शन भी नहीं दिए जाएंगे. शहर के सभी स्विमिंग पूल में पानी की सप्लाई फिलहाल रोक दी गई है.
कमर्शियल सेक्टर पर भी असर
इंडस्ट्रियल और कमर्शियल यूनिट्स को भी राहत नहीं मिली है. उन्हें अपनी रोजाना की पानी की खपत में 20% की कटौती करनी होगी. वहीं बॉटलिंग प्लांट्स को केवल जरूरी जरूरतों तक ही पानी मिलेगा, ताकि पीने के पानी को प्राथमिकता दी जा सके.
दैनिक उपयोग पर भी लगी रोक
BMC ने साफ कर दिया है कि गाड़ी धोने, बागवानी और सड़क साफ करने जैसे कामों में पीने के पानी का इस्तेमाल पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा. लोगों को इसके लिए बोरवेल या अन्य स्रोतों का इस्तेमाल करना होगा. नियम तोड़ने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई है. बड़े संस्थानों जैसे रेलवे, रेलवे कोच फैक्ट्री, तेल कंपनियों और नेवी को निर्देश दिए गए हैं कि वे अपने ऑपरेशन में रीसाइकल या ट्रीटेड पानी का इस्तेमाल करें. इसका मकसद पीने के पानी का दबाव कम करना है.
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