
New Zealand के इस गांव में लगने जा रहा है बिल्ली पर BAN
कुत्ते और बिल्लियों को पालतु जानवर होते हैं और लोग इनको अपने घर में पालते हैं. लेकिन New Zealand के एक गांव में बिल्लियां बैन होने वाली हैं. पीछे की वजह भी हैरान करने वाली है. न्यूजीलैंड के Omaui गांव में बिल्लियों को बैन लगाने का प्लान बनाया जा रहा है. जिनके पास फिलहाल बिल्ली है, वो उनके पास ही रहेंगी. लेकिन उनके मरन के बाद बिल्ली को पालना नामुमकिन हो जाएगा. गांव में करीब 35 लोगों ने 7 से 8 बिल्लियां पाली हैं.
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इसलिए किया जा रहा है बैन
न्यूजीलैंड के इस गांव में बिल्लियों पर बैन इसलिए लग रहा है क्योंकि बिल्लियां यहां की पक्षियों को खा जाती हैं. लगातार पक्षियों की तादाद कम होती जा रही है. यहां तक कि यहां पक्षियों की वो प्रजाति हैं जो कही और नहीं पाई जाती हैं. ये पक्षी लुप्त होने की कगार पर हैं.

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बता दें, न्यूजीलैंड में पक्षियों की तादाद काफी ज्यादा है. यहां 4 हजार से ज्यादा नुकसान न पहुंचाने वाले क्रिएचर्स हैं. नेशनल आइकन भी किवी है. एक्सपर्ट्स का कहना है कि न्यूजीलैंड में कई ऐसी पक्षियों की प्रजातियां हैं जो सिर्फ इसी देश में पाई जाती हैं.

2016 में देश ने प्रण लिया था कि 2050 तक सभी मैमल्स को बाहर किया जाएगा. सरकारी रिपोर्ट के मुताबिक हर साल ढाई करोड़ पक्षियों की मौत होती है. जिसके बाद सरकार का टार्गेट बिल्लियों को दूर करना था. जिसके बाद से ही यहां बिल्लियों को सीरियल किलर माना जात है. 2013 में एक मूवमेंट शुरू किया गया था. जिसका नाम 'Cats To Go' दिया गया.
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न्यूजीलैंड का पूरा फोकस नेचर और पक्षियों को बचाना है इसलिए उन्होंने ये कदम उठाने का फैसला लिया है. हालात आउट ऑफ कंट्रोल होने की वजह से ये फैसला लिया गया. सरकार के मुताबिक, पक्षियों के मरने के कारण इकोसिस्टम पर काफी असर पड़ता है. पड़ोसी देश ऑस्ट्रेलिया और अमेरिका इस दिक्कत का सामना कर रहे हैं. फार्मिंग में और वातावरण पर इसका काफी असर पड़ता है.
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इसलिए किया जा रहा है बैन
न्यूजीलैंड के इस गांव में बिल्लियों पर बैन इसलिए लग रहा है क्योंकि बिल्लियां यहां की पक्षियों को खा जाती हैं. लगातार पक्षियों की तादाद कम होती जा रही है. यहां तक कि यहां पक्षियों की वो प्रजाति हैं जो कही और नहीं पाई जाती हैं. ये पक्षी लुप्त होने की कगार पर हैं.

इसलिए बिल्लियों पर बैन लगाया जा रहा है. गांव में रहने वाले नीको जार्विस के पास भी कई बिल्लियां हैं. उनका कहना है- ''मैं यहां अकेला रहता हूं, इसलिए मैं बिल्लियों के साथ रहता हूं, अगर बिल्लियां नहीं रहेंगी तो मैं घर में नहीं रह पाऊंगा.''
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बता दें, न्यूजीलैंड में पक्षियों की तादाद काफी ज्यादा है. यहां 4 हजार से ज्यादा नुकसान न पहुंचाने वाले क्रिएचर्स हैं. नेशनल आइकन भी किवी है. एक्सपर्ट्स का कहना है कि न्यूजीलैंड में कई ऐसी पक्षियों की प्रजातियां हैं जो सिर्फ इसी देश में पाई जाती हैं.

2016 में देश ने प्रण लिया था कि 2050 तक सभी मैमल्स को बाहर किया जाएगा. सरकारी रिपोर्ट के मुताबिक हर साल ढाई करोड़ पक्षियों की मौत होती है. जिसके बाद सरकार का टार्गेट बिल्लियों को दूर करना था. जिसके बाद से ही यहां बिल्लियों को सीरियल किलर माना जात है. 2013 में एक मूवमेंट शुरू किया गया था. जिसका नाम 'Cats To Go' दिया गया.
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न्यूजीलैंड का पूरा फोकस नेचर और पक्षियों को बचाना है इसलिए उन्होंने ये कदम उठाने का फैसला लिया है. हालात आउट ऑफ कंट्रोल होने की वजह से ये फैसला लिया गया. सरकार के मुताबिक, पक्षियों के मरने के कारण इकोसिस्टम पर काफी असर पड़ता है. पड़ोसी देश ऑस्ट्रेलिया और अमेरिका इस दिक्कत का सामना कर रहे हैं. फार्मिंग में और वातावरण पर इसका काफी असर पड़ता है.
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