- उत्तर कोरिया के पुंग्ये-री परमाणु परीक्षण स्थल पर पिछले नौ वर्षों से लगातार भूकंप आ रहे हैं
- लगातार भूकंपों के कारण जमीन के अंदर दबा रेडिएशन बाहर लीक होने का खतरा बढ़ गया है और स्थानीय लोग प्रभावित हैं
- नीदरलैंड और अमेरिका में भी मानवीय गतिविधियों के कारण लंबी अवधि तक भूकंपीय गतिविधियां बढ़ने के उदाहरण मौजूद हैं
वैज्ञानिकों ने एक बेहद चौंकाने वाला खुलासा किया है. उत्तर कोरिया के परमाणु परीक्षणों के कारण वहां के शांत पहाड़ अशांत हो गए हैं. पुंग्ये-री परीक्षण स्थल (माउंट मंटाप) पर हुए इस धमाके के 9 साल बाद भी वहां लगातार भूकंप आ रहे हैं, और हैरानी की बात यह है कि समय के साथ इन भूकंपों की संख्या और ताकत घट नहीं रही, बल्कि बढ़ रही है.
2000 साल की शांति एक झटके में खत्म
जनरल साइंस में प्रकाशित स्टडी के अनुसार माउंट मंटाप पहाड़ और इसके आस-पास का इलाका पिछले 2,000 सालों से बिल्कुल शांत था. यहां ऐतिहासिक रूप से कभी भूकंप नहीं आए थे. लेकिन उत्तर कोरिया ने 2006 से 2017 के बीच इस पहाड़ के नीचे 6 भूमिगत परमाणु परीक्षण किए. 2017 में हुए छठे धमाके की ताकत इतनी ज्यादा (160 किलोटन) थी कि इससे 6.3 तीव्रता का भूकंप आया और पहाड़ के अंदर बनी सुरंगें ढह गईं.
लगातार कांप रही है धरती
दक्षिण कोरिया और चीन के वैज्ञानिकों ने जब डेटा खंगाला, तो वे हैरान रह गए. साल 2008 से 2025 के बीच इस इलाके में 1,399 छोटे-छोटे भूकंप दर्ज किए गए. आमतौर पर किसी भी परमाणु धमाके के बाद आने वाले भूकंप के झटके कुछ हफ्तों में शांत हो जाते हैं, लेकिन यहां इसका बिल्कुल उल्टा हो रहा है. 2017 के बाद से भूकंपीय गतिविधियां लगातार बढ़ती जा रही हैं.
ऐसा क्यों हो रहा है?
वैज्ञानिकों का कहना है कि इतने शक्तिशाली विस्फोट ने धरती की ऊपरी परत (क्रस्ट) को बुरी तरह हिलाकर रख दिया है. पहाड़ के अंदर की पुरानी और सुप्त दरारें इस धमाके से फिर से सक्रिय हो गई हैं. इसके अलावा, विस्फोट के कारण चट्टानों में जो नई दरारें बनीं, उनमें पानी भर गया है. पानी के इस दबाव (पोर प्रेशर) की वजह से चट्टानें आपस में खिसक रही हैं और लगातार छोटे-छोटे भूकंप (2 से 3 तीव्रता के) आ रहे हैं.
इसका खतरा क्या है?
पहाड़ के ढहने और लगातार आ रहे भूकंपों के कारण जमीन के अंदर दबा खतरनाक रेडिएशन (विकिरण) बाहर लीक हो सकता है. टेस्ट साइट के पास रहने वाले लोगों में रेडिएशन के लक्षण भी मिले हैं. अगर उत्तर कोरिया भविष्य में कोई नया परीक्षण करता है, तो लगातार आ रहे इन भूकंपों के कारण वैज्ञानिकों के लिए असली धमाके को पहचानना मुश्किल हो जाएगा. इंसानों द्वारा किए गए इस परमाणु हमले ने कुदरत को ऐसा जख्म दिया है, जिसे भरने में शायद कई दशक या सदियां लग जाएंगी.
नीदरलैंड और अमेरिका में भी खतरा
शिकागो यूनिवर्सिटी के जियोफिजिकल साइंसेज डिपार्टमेंट में असिस्टेंट प्रोफेसर सनयंग पार्क ने कहा, "मुझे लगता है कि इससे मिलने वाली बड़ी सीख यह है कि कम समय की हलचल के नतीजे सालों या दशकों तक बने रह सकते हैं. पृथ्वी की ऊपरी परत (क्रस्ट) की याददाश्त लंबी होती है." हालांकि, उन्होंने बताया कि इंसानों की वजह से होने वाली देर से शुरू होने वाली और लंबे समय तक चलने वाली भूकंपीय गतिविधियां कोई नई बात नहीं हैं. नीदरलैंड में, 1960 के दशक में गैस निकालने का काम शुरू होने के बाद से 1,700 से ज्यादा भूकंप आ चुके हैं. इन भूकंपीय गतिविधियों से संपत्ति को नुकसान पहुंचा है. अमेरिका के ओक्लाहोमा में, 2009 और 2015 के बीच तेल और गैस के उत्पादन के दौरान वेस्टवॉटर (गंदे पानी) को जमीन के नीचे इंजेक्ट किया गया. इस प्रक्रिया में तरल पदार्थों को जमीन के नीचे जमा किया जाता है, जिससे राज्य में भूकंपीय गतिविधियों में काफी बढ़ोतरी हुई.
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