Bhopal Cost Of Living: मेट्रो शहर की लाइफ भला किसे नहीं लुभाती, लेकिन वहां का ट्रैफिक, पॉल्यूशन और आसमान छूती महंगाई इंसान को थका देती है. इसी उलझन से तंग आकर एक वेल्थ मैनेजर और फाइनेंस कंसलटेंट कल्याण कुमार बिस्वाल ने अपनी पत्नी के साथ मुंबई छोड़कर भोपाल शिफ्ट होने का मन बना लिया. मुंबई की महंगी और भागदौड़ भरी जिंदगी को अलविदा कहकर कल्याण कुमार बिस्वाल नाम के एक वेल्थ मैनेजर ने भोपाल में बसने का फैसला लेते हुए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट शेयर की है. उन्होंने अपनी पोस्ट में 14 ऐसे रीजन बताए हैं, जिन्हें पढ़कर मेट्रो शहरों में रहने वाले लोग भी अपनी लाइफस्टाइल पर सोचने को मजबूर हो जाएंगे. सस्ते मकान से लेकर साफ हवा और काम के बेहतरीन बैलेंस तक, जानिए आखिर भोपाल ने उनका दिल कैसे जीता.
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17 हजार में वेल इक्विपड् 2BHK और ट्रैफिक से मुक्ति (Bhopal cost of living)
वेल्थ मैनेजर कल्याण ने अपनी पोस्ट में बताया है कि, भोपाल में बेहतरीन सोसाइटी के अंदर 2 AC, फ्रिज और सोफे के साथ फुली फर्निश्ड (Fully Furnished) 2BHK सिर्फ 17,000 रुपये महीने में मिल जाता है. वहीं मुंबई जैसे शहर में इस बजट में इतने बड़े घर का सपना भी नहीं देख सकते. इसके अलावा भोपाल में पूरा शहर 17 मिनट की दूरी पर है. कैब या बाइक टैक्सी 2 मिनट में दरवाजे पर आ जाती है, जिससे खुद की गाड़ी, पार्किंग और पेट्रोल के झंझट खत्म हो जाते हैं.
My decision to leave Mumbai and move to Bhopal is going to make you question your own lifestyle in the metro.
— Kalyan Kumar Biswal (@KalyanKBiswal) August 16, 2026
I spent most of my life in Mumbai, and after marriage, moving to Bhopal with my wife was a major decision. But here are the perks:
1. Rent- A fully furnished 2BHK with…
साफ हवा, अच्छा खाना और कम खर्च में बेहतर लाइफस्टाइल (Metro vs Tier 2 city)
पोस्ट में उन्होंने बताया कि, 'मुंबई के धुएं और स्मॉग से दूर भोपाल की हवा बहुत साफ है, जहां AQI अक्सर 50 के नीचे रहता है. यहां का खाना बिल्कुल शुद्ध है. काम वाली बाई का खर्च मुंबई में जहां 7,000 से ऊपर जाता है, वहीं भोपाल में 4,500 रुपये में बेहतरीन खाना पकाने वाली मेड मिल जाती है. प्रीमियम जिम की सालाना फीस मुंबई के 40,000 रुपये के मुकाबले भोपाल में सिर्फ 27,000 रुपये है.' इसके अलावा उन्होंने बताया कि, भोपाल में काम का प्रेशर बेहद कम है और ज्यादातर ऑफिस शाम 5:30 बजे तक बंद हो जाते हैं. लोग 6:30 बजे तक अपने घर पहुंच जाते हैं. भाषा की बात करें, तो मुख्य बोली हिंदी होने के कारण यहां कोई लोकल लैंग्वेज प्रेशर नहीं है. साथ ही देश के ठीक बीच में होने की वजह से दिल्ली या मुंबई कहीं भी आना-जाना ट्रेन से बहुत आसान है.
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