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अब फसलें खुद बताएंगी अपनी बीमारी, MIT के वैज्ञानिकों ने खोज निकाली बैक्टीरिया से चलने वाली लिविंग चिप

MIT bacteria computer: वैज्ञानिकों ने बैक्टीरिया की मदद से एक ऐसी टेक्निक बनाई है, जो कंप्यूटर चिप की तरह सिग्नल प्रोसेस करती है और लिविंग सर्किट बोर्ड की तरह काम करती है.

अब फसलें खुद बताएंगी अपनी बीमारी, MIT के वैज्ञानिकों ने खोज निकाली बैक्टीरिया से चलने वाली लिविंग चिप
क्या अब बैक्टीरिया भी सोचने लगेंगे? MIT के वैज्ञानिकों ने बनाई लिविंग सेल्स वाली अनोखी कंप्यूटर चिप
Image: MIT

MIT living transistor research: क्या आपने कभी सोचा है कि कोई कंप्यूटर बिना बिजली और बिना सिलिकॉन चिप के भी काम कर सकता है? मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (MIT) के वैज्ञानिकों ने ऐसा ही एक कारनामा कर दिखाया है. उन्होंने पंतोया एग्लोमेरंस नाम के बैक्टीरिया को जेनेटिकली मॉडिफाई करके एक ऐसा बायोलॉजिकल सर्किट बनाया है, जो कंप्यूटर के ट्रांजिस्टर की तरह काम करता है.

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जिंदा बैक्टीरिया से बना नया सर्किट बोर्ड (Living Circuit Board Made of Bacteria)

दरअसल, MIT के वैज्ञानिकों ने एक ऐसा ऑर्गेनिक सर्किट तैयार किया है, जो किसी इलेक्ट्रिकल चिप की तरह नहीं, बल्कि बैक्टीरिया के जरिए केमिकल सिग्नल भेजकर काम करता है. ये सिस्टम सिलिकॉन चिप्स जितना तेज नहीं है, लेकिन ये आने वाले समय में खेती-किसानी और एनवायरनमेंट से जुड़े क्राइसिस को हल करने का तरीका बदल सकता है. इस प्रैक्टिकल में बैक्टीरिया को पेट्री डिश पर 5 मिलीमीटर की दूरी पर खास पैटर्न में रखा गया. जब एक बैक्टीरिया केमिकल सिग्नल छोड़ता है, तो दूसरा उसे पहचानकर आगे बढ़ाता है. इस तरह एक लिविंग सर्किट बोर्ड की तरह सूचनाएं एक जगह से दूसरी जगह ट्रांसफर होती हैं.

इंसानी दिमाग की तरह एक्यूरेट सोच (Pantoea agglomerans biological computer)

इलेक्ट्रॉनिक कंप्यूटर किसी भी सवाल का जवाब सेकंड में दे देते हैं, जबकि इस बैक्टीरियल कंप्यूटर को एक छोटी सी कैलकुलेशन करने में लगभग 8 घंटे का समय लगता है. रिचर्स का मानना है कि, इसका मकसद आईफोन या लैपटॉप को रिप्लेस करना बिल्कुल नहीं है. पेड़ पौधों और फसलों को सेकंड के हिसाब से रिएक्शन देने की जरूरत नहीं होती. अगर कोई पौधा रात भर में ऑर्गेनिक सर्किट के जरिए सूखे या कीड़ों के हमले का पता लगा ले और सुबह तक केमिकल रिलीज कर दे, तो ये खेती के लिए काफी होगा.

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खेती और बायोलॉजिकल साइंस में बड़ा चेंज (Future Impact on Agriculture and Medicine)

ये टेक्निक फ्यूचर में खेती का रूप बदल सकती है. फसलों की जड़ों या पत्तियों पर इन बैक्टीरिया को लगाया जा सकता है. जैसे ही फसल पर कोई बीमारी या पानी की कमी का खतरा मंडराएगा, ये सर्किट खुद-ब-खुद उस खतरे को समझकर पौधे को बचाने वाले केमिकल बनाना शुरू कर देगा. इस रिसर्च की सबसे खास बात ये है कि वैज्ञानिकों ने सारा काम एक ही कोशिका पर लादने के बजाय अलग-अलग बैक्टीरियल स्ट्रेन में बांट दिया है. इससे बायोलॉजी में जटिल कैलकुलेशन करना काफी आसान हो गया है.

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