भारत सरकार देश में बिकने वाले घटिया और घटिया क्वालिटी के स्मार्टफोन स्क्रीन प्रोटेक्टर्स (Tempered Glass/Screen Guards) की बिक्री पर पूरी तरह से रोक लगाने की तैयारी कर रही है. इससे उन टेम्पर्ड ग्लास की ब्रिकी को रोका जाएगा जो तय क्वालिटी स्टैंडर्ड को पूरा नहीं करते हैं. इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) ने एक बड़ा कदम उठाते हुए स्मार्टफोन स्क्रीन प्रोटेक्टर्स को भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) रजिस्ट्रेशन के दायरे में शामिल कर दिया है.
सरकार के इस नए आदेश के अनुसार, सभी स्क्रीन प्रोटेक्टर्स को 1 अप्रैल 2027 से कड़े भारतीय मानकों का पालन करना होगा. 21 सितंबर को जारी एक आधिकारिक अधिसूचना के तहत, केंद्र सरकार ने इलेक्ट्रॉनिक सामानों के लिए जरूरी रजिस्ट्रेशन स्कीम CRS की लिस्ट में “Screen Protectors for smartphones” को भी जोड़ दिया है. अब 1 अप्रैल 2027 से भारत के सभी मैन्युफैक्चर्स और इम्पोर्टर्स को यह सुनिश्चित करना होगा कि उनके स्क्रीन प्रोटेक्टर्स देश में बिक्री के लिए उपलब्ध होने से पहले कड़े BIS मानक IS 19348:2025 के सभी नियमों को पूरा करते हों.
तत्काल कोई प्रतिबंध नहीं
इस नए आदेश का मतलब ये नहीं है कि कल से ही बाजार से खराब स्क्रीन प्रोटेक्टर्स गायब हो जाएंगे. सरकार ने इस अधिसूचना के जरिए मैन्युफैक्चर्स और इम्पोर्टर्स को को अपने प्रोडक्ट को इन मानकों के अनुरूप ढालने के लिए 6 महीने से अधिक का समय दिया है. ये नया नियम आधिकारिक तौर पर 1 अप्रैल 2027 से पूरी तरह प्रभावी होगा.
नए नियम से ग्राहकों को फायदा
नया IS 19348:2025 मानक मुख्य रूप से ग्लास (कांच) से बने स्क्रीन प्रोटेक्टर्स की क्वालिटी और उनकी टेस्टिंग से जुड़े नियम तय करता है.
ग्लास क्वालिटी: स्क्रीन गार्ड के सटीक साइज, उसकी मजबूती और उसकी सतह की स्पष्टता को लेकर सख्त नियम तय किए गए हैं. इसके तहत सामान्य ग्लास के लिए न्यूनतम 89% और प्राइवेसी ग्लास के लिए न्यूनतम 59% लाइट क्लेरिटी होनी जरूरी है. साथ ही, ग्लास में कम से कम 500 MPa की कंप्रेसिव स्ट्रेंथ और 200 MPa की बेंडिंग स्ट्रेंथ होनी चाहिए.
Clarity: स्क्रीन गार्ड्स में लाइट ट्रांसमिशन को लेकर कड़े नियम होंगे ताकि स्क्रीन पूरी तरह साफ दिखे. ग्लास पर किसी भी तरह के बुलबुले , खरोंच, दरारें या रफ किनारे नहीं होने चाहिए.
अतिरिक्त फीचर्स की जांच: ग्लास पर मिलने वाले अन्य फीचर्स जैसे एडहेसिव (चिपकाने वाला गोंद), एंटी-शैटर फिल्म (टूटने पर बिखरने से रोकने वाली परत), ओलेओफोबिक कोटिंग (फिंगरप्रिंट और तेल के दाग से बचाने वाली परत), एंटी-ग्लेयर (चमक रोकने वाली), ब्लू-लाइट फिल्टर और प्राइवेसी फिल्म्स की भी कड़ी जांच की जाएगी.
पैकेजिंग पर कड़े नियम: अब मैन्युफैक्चर्स को स्क्रीन प्रोटेक्टर्स के रिटेल बॉक्स (पैकेजिंग) पर कुछ बेहद जरूरी जानकारियां साफ तौर पर लिखनी होंगी. इनमें मैन्युफैक्चर का नाम, बैच नंबर, बनने की तारीख, ग्लास की सटीक मोटाई और आधिकारिक BIS मानक मार्क शामिल होना अनिवार्य है .
ग्राहकों पर क्या होगा असर?
आम उपभोक्ताओं के लिए यह फैसला बेहद फायदेमंद साबित होगा. इसका सीधा मतलब ये है कि आने वाले समय में आपको बाजार में बेहद मजबूत और हाई क्वालिटी वाले असली स्क्रीन प्रोटेक्टर्स मिलेंगे. जिससे आपके महंगे स्मार्टफोन की स्क्रीन गिरने पर टूटने से सुरक्षित रहेगी.
अभी भारतीय बाजार अलग-अलग कीमतों वाले अनगिनत स्क्रीन गार्ड्स और टेम्पर्ड ग्लासेज से पटा हुआ है, जिसमें नामी ब्रांड्स से लेकर बेहद सस्ते और बिना ब्रांड वाले चीनी प्रोडक्ट्स शामिल हैं. दुकानदार अक्सर नकली ग्लास पर '9H हार्डनेस' के झूठे स्टिकर्स लगाकर ग्राहकों को बेच देते हैं. लेकिन इस नए नियम के लागू होने के बाद, मैन्युफैक्चर्स और आयातकों को हर हाल में इन प्रोडक्ट्स का बीआईएस-मान्यता प्राप्त लैब में कड़ी टेस्टिंग करवानी होगी. जिससे नकली और घटिया प्रोडक्ट्स बाजार से पूरी तरह बाहर हो जाएंगे.
क्या दाम बढ़ेंगे?
सरकारी गजट अधिसूचना में कहीं भी यह नहीं कहा गया है कि इस नियम के कारण स्क्रीन प्रोटेक्टर्स की कीमतें बढ़ जाएंगी या कुछ खास प्रोडक्ट्स को जानबूझकर बाजार से हटा दिया जाएगा. हालांकि, कड़ी टेस्टिंग और बीआईएस सर्टिफिकेशन के लंबे प्रोसेस के कारण मैन्युफैक्चर्स और आयातकों की ऑपरेटिंग कॉस्ट में थोड़ी बढ़ोतरी हो सकती है. जिसका आंशिक असर कीमतों पर देखने को मिल सकता है.
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