Indian Origin Engineer Meta: मेटा जैसी दिग्गज कंपनी में काम करने वाले भारतीय मूल के सॉफ्टवेयर इंजीनियर प्रक्षाल जैन ने अपनी सालाना 300,000 डॉलर यानी कि करीब ढाई करोड़ रुपये की नौकरी छोड़ दी है. उन्होंने अपने साथी एलेक्स मॉरिस के साथ मिलकर Mitosis Labs नाम का एक नया एआई स्टार्टअप लॉन्च किया है. प्रक्षाल का मानना है कि आने वाले समय में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यूजर इंटरफेस के तरीके को पूरी तरह बदल देगा. उन्होंने लिंक्डइन पर पोस्ट करके बताया कि वो अब सिर्फ कोडिंग और एआई की दुनिया में जीना चाहते हैं.
ये भी पढ़ें:-सोशल मीडिया पर लाइक्स के चक्कर में पहाड़ पर बाथटब छोड़ आया इन्फ्लुएंसर, सोशल मीडिया पर मचा बवाल
नौकरी छोड़ने का चौंकाने वाला फैसला (Leaving Meta Job for Startup)
लिंक्डइन पर पोस्ट करते हुए प्रक्षाल जैन ने बताया कि, उन्होंने पहले मेटा में यूजर एक्सपीरियंस और फ्रंटएंड इंजीनियरिंग पर काम किया है, जहां उन्होंने एक्सटेंडेड रियलिटी (XR) और वेब एक्सपीरियंस को डेवलप करने में मदद की थी. उन्होंने कहा कि मेटा में रहते हुए उन्होंने और उनकी टीम ने 2024 में मेटा क्वेस्ट पर फेसबुक और इंस्टाग्राम लॉन्च किया और मेटा के AI एप्लिकेशन के अपडेट में भी योगदान दिया. उन्होंने बताया कि, उनका दिल बड़ी टेक कंपनी की आरामदायक नौकरी में नहीं लग पा रहा था. उन्होंने लिंक्डइन पोस्ट के जरिए ये जानकारी भी दी कि वे और उनके को-फाउंडर एलेक्स मॉरिस सात महीने तक इस प्रोजेक्ट पर काम करने के बाद 'स्टेल्थ मोड' से बाहर आकर माइटोसिस लैब्स' (Mitosis Labs) लॉन्च कर रहे हैं.
ये भी पढ़ें:-भारतीयों की इस आदत पर छिड़ी बहस, कंफर्म टिकट..फिक्स सीट होने के बाद भी प्लेन में सबसे पहले चढ़ने की होड़ क्यों?
टर्मिनल की दुनिया और नया कॉन्सेप्ट (Living in Terminal and The Best UX Is No UI)
दुनिया की सबसे बड़ी टेक्नोलॉजी कंपनियों में से एक को छोड़ने की वजह बताते हुए, प्रक्षाल जैन ने कहा कि उन्हें लगता है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) लोगों के कंप्यूटर के साथ काम करने के तरीके को पूरी तरह से बदल देगा. उन्होंने लिखा, 'मैंने पाया कि मैं ज्यादातर समय अपने टर्मिनल पर ही बिता रहा था. मैंने वेबसाइट्स पर जाना या ऐप्स का इस्तेमाल करना बंद कर दिया था. मैं बस ChatGPT या Claude Code से चीजें खोजने या मेरे लिए काम करने को कहता था.' इसी एक्सपीरियंस के कारण उन्होंने यह बात कही, 'सबसे अच्छा UX वह है जिसमें कोई UI न हो.' उनका मानना है कि जैसे जैसे एआई एजेंट स्मार्ट होते जाएंगे, वैसे वैसे स्क्रीन, डैशबोर्ड और फॉर्म जैसी पुरानी चीजें गायब हो जाएंगी.
Mitosis Labs और तीन दमदार पिलर (Mitosis Labs Three Pillars and Products)
अपने आइडिया को टेस्ट करने के लिए उन्होंने बताया कि, अपने डिजिटल फ़ुटप्रिंट का इस्तेमाल करके उन्होंने एक पर्सनल AI एजेंट बनाया हैं. उन्होंने दावा किया कि इस एक्सपेरिमेंट से सिर्फ तीन हफ्तों में उनका iPhone स्क्रीन टाइम 78% कम हो गया. उन्होंने कहा कि Mitosis Labs का मकसद ऐसे AI सिस्टम को बनाना है, जो रोजमर्रा के काम संभाल सकें और साथ ही यूजर्स को उनके पर्सनल डेटा पर पूरा कंट्रोल भी दें. उन्होंने कंपनी के तीन मुख्य स्तंभों (पिलर्स) के बारे में बताया.
- पहला है एक इंटेलिजेंस लेयर जो भरोसेमंद, सुरक्षित, तेज और बड़ी मात्रा में डेटा संभालने में सक्षम हो. उन्होंने दावा किया कि सिस्टम ने पहले ही बेहतरीन बेंचमार्क नतीजे हासिल कर लिए हैं.
- दूसरा स्तंभ एक ऐसा इंटरफेस बनाने पर फोकस करता है, जो इस्तेमाल में इतना आसान हो कि कोई भी उसे इस्तेमाल कर सके, जिसमें ऐसे बुज़ुर्ग यूजर्स भी शामिल हैं जिन्हें मुश्किल टेक्नोलॉजी के साथ काम करने में सहजता महसूस नहीं होती.
- तीसरे स्तंभ का मकसद सिलिकॉन वैली से बाहर एक बड़ा AI समुदाय बनाना है, ताकि ज्यादा से ज्यादा लोग भरोसे के साथ इस टेक्नोलॉजी को अपना सकें.
इन आइडियाज के आधार पर तीन प्रोडक्ट्स पर काम चल रहा है- Mitosis Cortex, Yappy और UFA & Wikipedia. उन्होंने कहा कि, 'हम पिछले सात महीनों से इस पर काम कर रहे हैं. मैं आने वाले दिनों में अपनी कड़ी मेहनत को आप सबके सामने दिखाने के लिए बहुत उत्साहित हूं.'
ये भी पढ़ें:-70 साल के पिता की खातिर बेटे ने 55 फीट ऊंचे खजूर के पेड़ पर बनवा डाली सीढ़ियां, जुगाड़ देख हैरान रह गई दुनिया
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं