- NHAI ने दुर्घटना के बाद एंबुलेंस को 10 मिनट में मौके पर पहुंचने का सख्त नियम लागू किया है.
- एंबुलेंस को इमरजेंसी मैसेज मिलने के 1 मिनट के भीतर स्वीकार करना होगा और 2 मिनट में रवाना होना आवश्यक होगा.
- दुर्घटना स्थल पर पहुंचने के बाद घायल व्यक्ति को 1 घंटे के भीतर नजदीकी अस्पताल पहुंचाना अनिवार्य कर दिया गया है
नेशनल हाइवे पर सफर करने वालों की सुरक्षा को लेकर भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने अब तक का सबसे सख्त रुख अपनाया है. अब हाइवे पर दुर्घटना होने के बाद एंबुलेंस के देर से पहुंचने का बहाना नहीं चलेगा. NHAI ने इमरजेंसी रिस्पांस टाइम को लेकर बेहद सख्त गाइडलाइंस जारी की हैं, जिनके तहत एंबुलेंस को हादसे की सूचना मिलते ही 10 मिनट के भीतर मौके पर पहुंचना होगा.
नियमों का पालन न करने पर ठेकेदारों और एंबुलेंस चालकों पर भारी जुर्माना लगाया जाएगा. इस नए फैसले का सबसे बड़ा मकसद सड़क दुर्घटनाओं में घायल लोगों को जल्द से जल्द डॉक्टरी इलाज मुहैया कराना है, ताकि 'गोल्डन आवर' (हादसे के बाद का पहला घंटा) में लोगों की जान बचाई जा सके.
1 मिनट में स्वीकार करना होगा, 2 मिनट में गाड़ी रवाना
नए नियमों के अनुसार, अब NHAI प्रोजेक्ट्स पर तैनात सभी इमरजेंसी गाड़ियों के लिए 'NHAI केयर/इंसिडेंट मैनेजमेंट सिस्टम' का इस्तेमाल अनिवार्य कर दिया गया है. 1 मिनट में रिस्पांस करना होगा. कंट्रोल रूम से इमरजेंसी मैसेज मिलने के 1 मिनट के भीतर एंबुलेंस टीम को उसे स्वीकार करना होगा. यदि इसमें 1 मिनट से ज्यादा की देरी होती है, तो प्रति मिनट 5,000 रुपये का जुर्माना लगेगा.
टिकट स्वीकार करने के बाद अगले 2 मिनट के भीतर एंबुलेंस को घटनास्थल के लिए रवाना होना पड़ेगा. देरी होने पर फिर से 5,000 रुपये प्रति मिनट का जुर्माना ठोंका जाएगा. कोई भी एंबुलेंस या ऑन-रोड यूनिट इमरजेंसी टिकट को रिजेक्ट नहीं कर सकती. अगर किसी ने टिकट रिजेक्ट किया, तो सीधे 10,000 रुपये का जुर्माना लगेगा.
10 मिनट की डेडलाइन
- NHAI ने दूरी के हिसाब से पहुंचने का समय भी तय कर दिया है.
- दुर्घटना अगर 10 किलोमीटर के दायरे में हुई है, तो एंबुलेंस को टिकट मिलने के 10 मिनट के अंदर दुर्घटनास्थल पर पहुंचना होगा.
- यदि हादसा 10 किमी से अधिक दूरी पर हुआ है, तो दूरी के हिसाब से पहुंचने का समय तय होगा.
- अगर एंबुलेंस तय समय पर मौके पर नहीं पहुंचती है, तो 10,000 रुपये प्रति घटना का जुर्माना लगाया जाएगा.
1 घंटे के भीतर अस्पताल पहुंचाना अनिवार्य
केवल हादसे की जगह पर पहुंचना ही काफी नहीं होगा. NHAI ने यह भी तय किया है कि इमरजेंसी टिकट मिलने के 1 घंटे के भीतर घायल व्यक्ति को नजदीकी अस्पताल पहुंचाना होगा. यदि मरीज को अस्पताल ले जाने में देरी होती है, तो इसके लिए भी 10,000 रुपये प्रति मामला जुर्माना वसूला जाएगा.
जीपीएस और ऐप बंद रखा तो रोजाना लगेगा फाइन
- NHAI के संज्ञान में आया था कि कई ठेकेदार और एंबुलेंस एजेंसियां लापरवाही बरतती हैं. वे जीपीएस (GPS) बंद रखती हैं या मोबाइल ऐप का इस्तेमाल नहीं करतीं. इसे रोकने के लिए तकनीक को जटिल बना दिया है.
- सभी एंबुलेंस, क्रेन और गश्ती वाहनों में AIS-140 जीपीएस सिस्टम और IoT सिम वाले एंड्रॉइड डिवाइस अनिवार्य कर दिए गए हैं.
- यदि कोई ऑन-रोड यूनिट NHAI केयर ऐप का इस्तेमाल नहीं करती, जीपीएस बंद रखती है या डैशबोर्ड पर ऑनलाइन नहीं दिखती, तो 2,500 रुपये रोजाना का जुर्माना लगेगा.
- अगर किसी निरीक्षण में एंबुलेंस के अंदर जरूरी उपकरण, दवाएं, डॉक्टर/ईएमटी (EMT) या ड्राइवर नदारद मिले, तो प्रति निरीक्षण 10,000 रुपये का जुर्माना ठोका जाएगा.
एंबुलेंस हर समय तैयार रहे, इसके लिए हर 24 घंटे में कम से कम 5 किलोमीटर का मॉक ड्रिल या ड्राय रन करना अनिवार्य होगा. हालांकि, यदि उस दिन एंबुलेंस किसी हादसे में जाकर पहले ही 5 किमी से ज्यादा चल चुकी है, तो ड्राय रन की जरूरत नहीं होगी.
इसके अलावा, यदि किसी पड़ोसी हाइवे स्ट्रैच पर एंबुलेंस उपलब्ध नहीं है, तो आपात स्थिति में एंबुलेंस को अपने तय इलाके (प्रोजेक्ट एरिया) से बाहर जाकर भी मरीज की मदद करनी होगी.
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